ओडिसा में लगातार भारी बारिश हो रही है और कुछ जिलों में रेड अलर्ट जारी है। बारिश के कारण कई नदियां अपने उफान पर है। जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ता जा रहा है। राज्य के छह प्रमुख जिलों में 500 से ज्यादा गांव इस तरह से गंभीर रूप से प्रभावित हैं और वे गांव टापू में बदल गए हैं। जमीनी रिपोर्ट की अनुसार 2.7 लाख ( दो लाख सत्तर हजार) लोगों का जनजीवन सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। जिसमें वनस्पति सम्पदा और जीव जंतु प्रभावित हुए हैं। बाढ़ का कहर इस तरह हावी है कि कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय और मुख्य सड़कों से टूट गया है।
बाढ़ से केवल गांव ही प्रभावित नहीं हुए हैं बल्कि बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है। जिसमें प्राथमिक विद्यालय, स्वास्थ्य केंद्रों और लहलहाती हजारों एकड़ फसलों को भी बर्बाद कर दिया है। लोग बाढ़ के पानी से बचने के लिए छतों और ऊंचे बांधों पर या ऊंचे स्थानों पर जा रहे हैं। बाढ़ के पानी का बहाव इतनी तेज था कि उन्हें अपने घरों से खाने पीने का सामान और मवेशियों को भी नहीं निकाल पाये। जिससे लाखों लोगों के जीवन आजीविका पर बड़ा संकट आ गया है। अब लोग खाने पीने और दवाओं के लिए सरकार पर निर्भर है।
नदियों के उफान और बांध का पानी छोड़े जाने के कारण हालात काबू से बाहर हो गए हैं। ओडिसा में आई विनाशकारी बाढ़ के पीछे मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव के कारण हुई भरी बारिश और दूसरे राज्यों के ऊपरी क्षेत्रों से आने वाला पानी है। महानदी, ब्राह्मणी, वैतरणी, सुवर्णरेखा और बुढ़ावलंग जैसी नदियां खतरे के निशान पर हैं।
महानदी बेसिन के ऊपरी इलाकों, छत्तीसगढ़ के और पश्चिमी ओडिशा में लगातार भारी बारिश के कारण संभालपुर में स्थित हीराकुंड बांध का जल स्तर बढ़ रहा है और अपनी अधिकतम सीमा को पार कर रहा है। जलाशय की सुरक्षा को ध्यान रखते हुए, बांध के पानी को छोड़े जाने पर निचले हिस्सों में पानी का बहाव बढ़ गया है। इसके साथ ही तटीय इलाकों में हाई टाइड(उच्च ज्वार) आने के कारण नदियों का पानी तेजी से समुद्र में नही जा पा रहा है। जिससे पानी का उल्टा बहाव बस्तियों और गांवों की तरफ बढ़ रहा है और भारी तबाही मचा रहा है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने पूरे सिस्टम को हाई अलर्ट पर कर दिया है। लगातार बचाव राहत अभियान चलाया जा रहा। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRF) और कई टीमें भरी बारिश में फंसे सुदूर गांव के लोगों को बचाने के लिए अभियान चला रही है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता के तौर पर एयरलिफ्ट और नावों से निकाला जा रहा।उनको सुरक्षित शिविर सेंटर तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार की तरफ से कई सेवाओं का संचालन किया जा रहा है। जिसमें गर्म पका हुआ खाना और हेलिकाप्टर के सहायता से सूखे खाने के पैकेट, पानी बोतले और दवाएं पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों को आदेश दिया गया है समय समय पर स्थिति का जायजा लेते रहे।
इस बाढ़ के पानी के कारण बहुत सारी बीमारियों के पनपने का खतरा बढ़ गया है। सरकार अपने स्तर पर इन चीजों निपटने के लिए पूरी तरह कड़े इंतजाम किय है। ओडिशा देश का वो राज्य है जो प्राकृतिक आपदाओं के लिए दुनिया में प्रसिद्ध है। बाढ़ अभी भी यहां का एक जटिल संकट बना है।
