The Public Pahuch

बुधवार, 5 अगस्त 2026

असम में बाढ़ का कहर लाखों लोगों का जीवन हुआ प्रभावित

 


असम में बाढ़ का कहर पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होने कारण,लाखों लोगों का  जन जीवन प्रभावित हुआ है। लोगों के खाने पीने का सामान तबाह हो गया है। गांव,घरों में पानी भर गया है और लोग छतों पर रह रहे हैं। बाढ़ के आने से बहुत कुछ नुकसान होने का डर रहता है। जानवरों को बह जाना, सांप कीड़ों का निकलना और जान मान का खतरा रहता है।फिलहाल अब बाढ़ का पानी धीरे धीरे कम हो रहा है।

  आंकड़ो के अनुसार असम में अब तक 89 से ज्यादा लोगों को बाढ़ के कारण जान गंवानी पड़ी है। यह कोई बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। इस बाढ़ के कारण लगभग 1.22 लाख लोग 10 जिलों में प्रभावित हुए हैं। राज्य और केंद्र सरकार की जो भी बचाव कार्य के लिए पुलिस होती है, NDRF और SDRF  लगातार बचाव अभियान चला रही हैं और लोगों को बचाया जा रहा है। इस बाढ़ से प्रभावित लगभग 1,53492 हैक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है और बाकी बची फसल पानी के साथ बह गई है। 

  सरकारी आंकड़े की बात करें तो 1.22 लाख में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला जिला शिवसागर है जिसमें 55,200 इसके अलावा 34,050 चराईदेव और 20,200 लोग जोरहाट में प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है। बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों को राहत शिविर में लगभग 12000 लोगों को खाना पानी और दवाई आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है और 38 शिविर कैंप की स्थापना की गई है। हालांकि कई स्थानों पर राहत सामग्री की कमी के कारण लोगों ने शिकायत की है।

  इस बाढ़ के कारण लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है इसकी साथ उनकी आजीविका बहुत प्रभावित हुई है। लोगों के घरों और छतों पर पानी पहुंच गया है। यह बाढ़ कोई इस साल नहीं पिछले कई सालों से हो रहा है और इसी तरह बचाव कार्य चलता आ रहा है। हर साल लोगों की मेहनत बाढ़ के पानी के साथ बह जाती है। वहां के छात्र संगठन का आरोप है कि सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठती है। जिसके कारण बाढ़ नही रुकती है और हर साल तबाही का नया मंजर लाती है।

   सरकार की सहायता के साथ NGOs और फाउंडेशन भी असम बाढ़ में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। बहुत लोग इस बचाव राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं। हर साल यही बाढ़ का मंजर होता है। इसके बावजूद भी सरकार कोई प्रभावी कदम क्यों नहीं उठा रही है। यह केवल असम में ही नहीं पंजाब, बिहार के कुछ जिलों में हर साल यही मंजर होता है। सरकारें आई और बदल गई लेकिन यह मंजर नहीं रुका।

All India Paper Leak and Curruption, यह आरोप छात्रों द्वारा सरकार पर लगाए जा रहे और छात्र रो रहे हैं।

   


जब कहीं विकसित भारत की बात होती है तो सबसे पहले हमे अपनी शिक्षा व्यवस्था की हालत याद आती है। युवा छात्र पढ़ने के बजाय सड़को पर धरना दे रहे और रो रहे हैं। ये हाल देश के किसी एक राज्य में नहीं है और किसी एक पार्टी के शासन में नहीं है। ये पूरे देश में और सब पार्टियां इसमें शामिल हैं। बस ये लोग एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते और काम तो करना नहीं है, कॉलेज में टीचर्स नहीं हैं। पेपर सही से करवा नहीं पा रहे हैं और अवैधानिक भर्तियां हो रही है। इसके बावजूद भी ये विकास की बात करते हैं। विकास कहां से होगा।

    अभी जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन सबने देखा कि कैसे युवा अपने मुद्दे और जिम्मेदारी समझ रहे हैं। लेकिन इन नेताओं की समझ से बाहर है कि युवाओं को अब पैसा नहीं अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जो एक अच्छे राष्ट्र निर्माण की नींव होती है। कोई भी आगे तभी होता है जब वहां की शिक्षा व्यवस्था अच्छी होती है। जब जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट हो रहा था तब पूरा विपक्ष छात्रों के साथ था और अपनी आवाज उठा रहा था। सभी की आवाज सुनी भी गई।

  इसी क्रम में हम देख रहे हैं, झारखंड रांची में JPSC, JSSC और अन्य पेपर लीक और भर्तियों बहुत बड़े पैमाने पर घोटाला हो रहा। बच्चों का कहना पैसे लेकर नौकरियां बांटी जा रही हैं।यह क्रम 2010 से लगातार चला आ रहा है। TDS जैसी बैकलिस्टेड कंपनी एक्जाम करवा रही है। जितने छात्रों हैं सबकी यही समस्याएं हैं। वहां के छात्र इस्तीफा भी नहीं मांग रहे हैं, वो तो बस जवाबदेही मांग रहे हैं। 

  झारखण्ड के सोनम वांगचुक कहे जाने वाले देवेन्द्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल अनशन शुरू कर दिया,झारखंड में होने वाले परीक्षा में अनियमित भर्ती होने से इसका विरोध कर रहे हैं। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महागठबंधन की सरकार है और हेमंत सोरेन शिक्षा मंत्री भी है। यहां पर विपक्ष में बीजेपी की सरकार है। लेकिन एक बात कुछ अजीब लग रही है ये यही राहुल गांधी है जो छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं और जनसभा कर रहे हैं। ऐसा क्या कारण है कि राहुल गांधी जी चुप हैं।

   यदि ये पार्टियां सच में लोगों के साथ है तो कही भी पेपर लीक हो,किसी राज्य में हो,  किसी की सरकार हो मुद्दे तो वही रहते हैं। युवा तो हर राज्य में सड़क पर है, उनकी कोई नहीं सुन रहा है। सारा विकास इनके भाषण में ही होता है। ये लोग छात्रों से बात करना नही चाहते हैं सुधार क्या करेंगे।

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

Company ILGIM Electronic Chip Factory of a unit Gretor Noida में लगी भीषण आग और कई दमकल कर्मी हुए घायल

   


सोमवार देर रात ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कंपनी ILGIM जो इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाती है उसकी एक यूनिट PCB में भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां वहां पहुंची और बचाव कार्य में लग गए। छह दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंची आग बहुत तेजी फैल रही थी लेकिन अचानक एक दीवार और लोहे का बीम गिर गया।

   पुलिस ने बताया दीवार और लोहे का बीम के गिरने से दो दमकल कर्मियों की जान चली गई है। जिसमें चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव। तीन दमकलकर्मी इसमें घायल हुए हैं चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार और फायरमैन अमित कुमार गंभीर रूप से घायल है और हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

 पांच दमकल कर्मी घायल हुए और उनको जल्दबाजी में हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां डॉक्टर्स देखते  ही बता दिया दो लोग मर चुके हैं और तीन लोगों की हालत अब खतरे से बाहर है पुलिस ने कहा।

सोमवार, 3 अगस्त 2026

Illigal tariffs को लेकर America में trump को झटका 25 States ने किया Case

     


अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई सालों से अपनी मनमर्जी के मुताबिक illigal टैरिफ किसी भी देश पर लगा रहे हैं।अभी हाल के ही दिनों में चीन, भारत समेत और कई देश थे, जिनपर आयात टैरिफ 100% लगाया और इसके लिए बकायदा एक कानून भी पास करवा दिया। जो देश अपना उत्पाद अमेरिका भेज रहे थे और जिनपर पहले आयात टैरिफ 10 से 12% था। अब ट्रंप अपने ही देश में लोग ट्रंप को बेनकाब कर रहे हैं और इस टैरिफ को अवैध बता रहे हैं। अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। इन राज्यों में शामिल भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर लगे टैरिफ अवैध बताया गया है। इन राज्यों की मांग है कि टैरिफ को अभी रोका जाय और सारा अवैध टैरिफ का पैसा वापस किया जाय।

  राज्यों के अनुसार ट्रंप ने पिछले महीने में भारत समेत 59 यूरोपीय संघ देशों पर अपने मनमाने ढंग से टैरिफ लगाया था। जब से यह अपने दूसरे कार्यकाल में आया है तब से कुछ भी करता और बोलता रहता है।

  न्यूयॉर्क की एटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को अवैध बताया है। उन्होंने ने कहा कि इससे अमेरिका में बिज़नेस परिवारों का बोझ बढ़ेगा। पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर इस टैक्स को लगाया था। लेकिन बाद में विवाद होने पर कोर्ट ने ट्रंप से कहा था यह अधिकार तुमको किसने दिया है और अपने मनमाने ढंग से टैरिफ नही लगा सकते हालांकि बाद में पैसे भी वापस करने पड़े थे। अमेरिका में ऐसे टैरिफ वहां की कांग्रेस द्वारा लगाए जा सकते हैं।

   ट्रंप सरकार ने अपनी भरपाई पूरी करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974, सेक्शन 301 का इस्तेमाल किया है। इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं  और जबरन श्रम को रोकने में असफल रहे देशों पर 10 से 12% टैरिफ लगाया गया। इस ट्रंप सरकार ने इसको वैध बताया और इस पर उन्होंने ने कहा यह अमेरिकी श्रमिकों और व्यापार बचाने के लिए जरूरी है।एक बात साफ है अमेरिका अपने फायदे के लिए कुछ भी करता है।

   

बांकीपुर से BJP पहली बार हारी चुनाव और ऐतिहासिक जीत प्रशांत किशोर की ,आगाज बदलाव का

   


BJP का गढ़ कहा जाने वाला बांकीपुर का किला जन स्वराज पार्टी,प्रशांत किशोर ने भेद दिया है। भारतीय जनता पार्टी आज पहली बार चुनाव हारा है और प्रशांत किशोर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज  की है और एक बड़े मार्जिन से जीत हासिल की है।नितिन नवीन के राज्यसभा जाने पर बांकीपुर की विधानसभा सीट खाली हो गई थी और पर उपचुनाव में bJP के प्रत्याशी के तौर पर नीरज कुमार को उतारा गया था। जबकि जन स्वराज पार्टी की तरफ से प्रशांत किशोर लड़ रहे थे और RJD की तरफ से रेखा कुमारी सुनाव लड़ रही थी। पहले स्थान पर जन स्वराज दूसरे पर बीजेपी और तीसरे नंबर पर राजद है। बीजेपी और राजद अन्य दलों की मुश्किले बढ़ने वाली है  आगामी चुनाव में क्योंकि लोगों को अल्टरनेटिव नए विकल्प मिल रहे हैं। ये वहां के लोगों का कहना है कि दूसरे विकल्प न होने के कारण हम बीजेपी और राजद को वोट देते थे।

  अब बिहार ही नहीं पूरे देश में मुद्दे बदल रहे हैं और अल्टरनेटिव के तौर पर नए विकल्प लोगों को मिल रहे हैं। बिहार में बांकीपुर में प्रशांत किशोर के जीतने के कई बड़े कारण रहे हैं जिसमें शिक्षा व्यवस्था, बिहार के छठवीं पास  मुख्यमंत्री, और लोगों को एक नया अल्टरनेटिव विकल्प मिला। वहां की एक क्लिप बहुत वायरल हुई जिसमें कहा गया कि बीजेपी के तरफ से यहां कुत्ता बिल्ली भी चुनाव जीत जाएंगे जिसको लेकर जनता में भी नाराजगी देखी गयी। प्रशांत किशोर इन सब मुद्दों को उठाने में सफल रहे और सीजेपी आंदोलन भी एक बड़ा फैक्टर रहा। 

 पिछले समय से बिहार की पॉलिटिक्स में लगातार बदलाव देखने को मिला। विधानसभा में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने जिसके बाद उनको राज्यसभा में भेज दिया गया और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद अब विधानसभा के उपचुनाव बांकीपुर से बीजेपी हार गई,एक तरह से देखा जाए तो नितिन नवीन की ही हार है हालांकि उनकी जगह पर उनका प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा था। 

   लोगों का कहना है कि हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चुना था न की सम्राट चौधरी को।इसी तरह की बहुत सारी गलतियां सरकार ने की जिसका परिणाम सामने है। यदि हम वोटर्स परिपेक्ष में बात करे तो गढ़ और किला किसी का नहीं होता है। अब लोग देश के असल मुद्दों को समझ और उस पर बात भी कर रहे हैं और उनको नए विकल्प मिल रहे हैं जिनकी उनको तलाश है। जैसे कि तमिलनाडु हो या बांकीपुर में देखा गया है।

  देश की जो भी पुरानी पार्टियां है उनको समझना पड़ेगा कि अब  उनकी मनमानी चलने वाली नही है और न ही युवा को अब असल मुद्दों से भटकाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि उनके पास अब नए विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। आने वाले समय में इन पार्टियों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़  सकता है यदि इन्होंने अपनी सोच को नही बदला। इन पार्टियों को जरूरत है अपनी रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। 1990 से चली आ रही सरकार के लिए लोगों का एक संदेश महज एक आगाज है। लोग इसे प्रधानमंत्री जी की हार बता रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री जी के नाम पर ही वोट मिलता था।

JPSC and JSSC परीक्षा में विवाद, छात्र लगातार और अभिजीत दीपके ने किया समर्थन।प्रदर्शन कर रहे हैं।


 झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड में कर्मचारी चयन आयोग को लेकर भर्ती हो घोटाले से परेशान हो कर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों में इसका विरोध बढ़ता जा रहा है। छात्र सड़क पर बैठ गए हैं और भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। CJP पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों से बात की और इस आंदोलन का समर्थन किया है। सीजेपी संस्थापक ने कहा छात्रों की मांगे पूरी करनी चाहिए।परीक्षा भर्ती से संबंधित विषयों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता  सुनिश्चित करना चाहिए। दीपके ने छात्रों से कहा हम तुम्हारा साथ देंगे और साथ में सरकार को संकेत दिया कि हम छात्रों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करे और कहा आपकी जितनी डिमांड है उसको हम पूरा करेंगे।

 झारखंड में लोक सेवा आयोग में परीक्षा में हो रही गड़बड़ी को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।  इसी बीच रांची में छात्रों का सत्याग्रह नौवें दिन भी जारी रहा। इसी बीच आंदोलन में नया मोड़ आया जिसमें छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने अपनी मांग के समर्थन में अनिश्चितकाल तक के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दी।

धरनास्थल पर महजूद छात्रों का कहना है कि  परीक्षा प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों के प्रति जवाबदेही तय हो।  जो भी इन सब कार्यों में लिप्त है उस कार्यवाही हो और जो भी इसकी जांच है वह निष्पक्ष और ईमानदारी से होनी चाहिए। मांगे पूरी होने तक शांतिपूर्वक सत्याग्रह जारी रहेगा।

 छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो का आरोप है सरकार इसको गंभीरता से नहीं ले रही है। छात्रों का कहना है 14वी लोक सेवा आयोग परीक्षा रद्द की जाय और नए सिरे से आयोजित किया जाना चाहिए।

देश के ज्यादातर राज्यों में पेपर लीक और भर्ती से जुड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं। कही भी कोई सरकार इन समस्याओं को रोकने सक्षम नहीं है। जिन पार्टियों की जिस राज्य में सरकार है वहां भी पेपर लीक नहीं रुक रहा है। इन पार्टियों का अब एक ही काम बचा है एक दूसरे पर आरोप लगाना। गलतियां बताना, मुख्य विषयों से हटकर बात करना।

  

रविवार, 2 अगस्त 2026

साल 2026 में कब है नागपंचमी इसका क्या महत्व और पूजाविधि। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।

   

नागपंचमी पर्व

 नागपंचमी हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है और नागों को देवता माना जाता है।जो पूरे भारत देश में बड़ी धूम धाम से सांस्कृतिक विरासत के रूप में मनाया जाता है। इस साल नागपंचमी 17 अगस्त  2026 दिन सोमवार को पड़ेगी। यह त्यौहार श्रवण मास शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। नागपंचमी का त्यौहार प्राचीन समय से मान्यताओं के अनुसार मनाया जा रहा है । लोग बड़ी श्रद्धा भाव से मनाते हैं।

धार्मिक महत्व 

हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं के यह त्यौहार श्रवण मास शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है। भगवान शिव नागों को अपने गले में धारण करते हैं। भगवान विष्णु शेषनाग जी की सैया पर शयन करते हैं और नागपंचमी के दिन नाग देवता के रूप में पूजा की जाती है। नाग देवता की पूजा करने से परिवार सुखी और सुरक्षित रहता है।

पौराणिक कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कलिया नाग के आतंक से गोकुल वाशियो को बचाया था और और कलिया नाग को अपनी गलती का अहसास हुआ और भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त बन गया।

   महाभारत के राजा जनमेजय ने जनमेजय यज्ञ किया था और ऋषि आस्तिक ने सर्पो की रक्षा की थी ।इस कथा को भी नाग पंचमी से जोड़ा जाता है।

पूजा की विधि

स्नान आदि करके नए वस्त्र पहने और हल्दी ,अन्न ,जल भी अर्पित करें।

नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है दूध और खीर पिलाया जाता।

भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को दूध अभिषेक कराया जाता है और फूल चढ़ाए जाते हैं।

भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। अपनी श्रद्धा अनुसार दान करे। 

इस दिन कथ सुनने का भी विशेष महत्व है।

    इस त्यौहार का पर्यावरणीय रूप से भी महत्व क्योंकि प्रकृति का संरक्षक किया जाता है। जिसमें सर्पों को न मारकर उनके बचाने पर महत्व दिया गया है। वो भी प्रकृति का हिस्सा है और सबका कर्तव्य है किसी जीव को नुकसान न पहुंचाए।

   ये सारी जानकारी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दी गई है।

असम में बाढ़ का कहर लाखों लोगों का जीवन हुआ प्रभावित

  असम में बाढ़ का कहर पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होने कारण,लाखों लोगों का  जन जीवन प्रभावित हुआ है। लोगो...