जब कहीं विकसित भारत की बात होती है तो सबसे पहले हमे अपनी शिक्षा व्यवस्था की हालत याद आती है। युवा छात्र पढ़ने के बजाय सड़को पर धरना दे रहे और रो रहे हैं। ये हाल देश के किसी एक राज्य में नहीं है और किसी एक पार्टी के शासन में नहीं है। ये पूरे देश में और सब पार्टियां इसमें शामिल हैं। बस ये लोग एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते और काम तो करना नहीं है, कॉलेज में टीचर्स नहीं हैं। पेपर सही से करवा नहीं पा रहे हैं और अवैधानिक भर्तियां हो रही है। इसके बावजूद भी ये विकास की बात करते हैं। विकास कहां से होगा।
अभी जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन सबने देखा कि कैसे युवा अपने मुद्दे और जिम्मेदारी समझ रहे हैं। लेकिन इन नेताओं की समझ से बाहर है कि युवाओं को अब पैसा नहीं अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जो एक अच्छे राष्ट्र निर्माण की नींव होती है। कोई भी आगे तभी होता है जब वहां की शिक्षा व्यवस्था अच्छी होती है। जब जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट हो रहा था तब पूरा विपक्ष छात्रों के साथ था और अपनी आवाज उठा रहा था। सभी की आवाज सुनी भी गई।
इसी क्रम में हम देख रहे हैं, झारखंड रांची में JPSC, JSSC और अन्य पेपर लीक और भर्तियों बहुत बड़े पैमाने पर घोटाला हो रहा। बच्चों का कहना पैसे लेकर नौकरियां बांटी जा रही हैं।यह क्रम 2010 से लगातार चला आ रहा है। TDS जैसी बैकलिस्टेड कंपनी एक्जाम करवा रही है। जितने छात्रों हैं सबकी यही समस्याएं हैं। वहां के छात्र इस्तीफा भी नहीं मांग रहे हैं, वो तो बस जवाबदेही मांग रहे हैं।
झारखण्ड के सोनम वांगचुक कहे जाने वाले देवेन्द्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल अनशन शुरू कर दिया,झारखंड में होने वाले परीक्षा में अनियमित भर्ती होने से इसका विरोध कर रहे हैं। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महागठबंधन की सरकार है और हेमंत सोरेन शिक्षा मंत्री भी है। यहां पर विपक्ष में बीजेपी की सरकार है। लेकिन एक बात कुछ अजीब लग रही है ये यही राहुल गांधी है जो छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं और जनसभा कर रहे हैं। ऐसा क्या कारण है कि राहुल गांधी जी चुप हैं।
यदि ये पार्टियां सच में लोगों के साथ है तो कही भी पेपर लीक हो,किसी राज्य में हो, किसी की सरकार हो मुद्दे तो वही रहते हैं। युवा तो हर राज्य में सड़क पर है, उनकी कोई नहीं सुन रहा है। सारा विकास इनके भाषण में ही होता है। ये लोग छात्रों से बात करना नही चाहते हैं सुधार क्या करेंगे।

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