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रविवार, 20 सितंबर 2026

Chatron ki goonj कार्यक्रम राहुल गांधी का एक मिशन, छात्रों का मंच

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव

छात्राें की गूंज का कार्यक्रम राहुल गांधी का एक बड़ा मिशन है। जो लगातार चल रहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी इस मंच पर छात्रों से सीधा संपर्क करते हैं। उनकी समस्यों को उठाते और सुनते हैं। 

छात्रों की गूंज कार्यक्रम की शुरूवात 17 जून 2026 राजस्थान कोटा से हुई है। जिसका उद्देश्य छात्रों से मिलना, उनकी समस्यों को सुनना और उनकी आवाज को उठाना था। इस कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के जरिए हजारों लाखों छात्र राहुल गांधी से जुड़े। शुरुवाती दौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम बहुत प्रभावी नहीं रहा, लेकिन बाद में धीरे धीरे छात्र इस कार्यक्रम से जुड़ने लगे। कार्यक्रम को पूरे देश के छात्रों तक पहुंचाना है और इसी क्रम में राहुल गांधी एक के बाद एक कार्यक्रम कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार छात्रों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं। चाहे इंदौर हो या पुणे देश के अलग अलग राज्यों में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। देश हो या देश के बाहर छात्रों से मिल रहे हैं।

इससे पहले मैने नहीं देखा था कि राहुल गांधी इतना  कभी एक्टिव रहे हो।  राहुल गांधी इस कार्यक्रम में सरकार की नाकामियों की पोल खोल रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य या देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार एक्टिव हैं। छात्र उनके पास अपनी परेशानियों को लेकर जाते हैं। नीट पेपर लीक, इकॉनमी और मेडिकल सेक्टर जैसे दूसरे क्षेत्रों में सवाल उठा रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार हमलावर रहते हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार राहुल गांधी के कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है।

क्या राहुल गांधी इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं के दिल में अपनी जगह बना पाएंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव हारने के बाद चारों तरफ से सवालों से घिर गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी संगठन ने 4 में से 3 केंद्रीय पद जीते, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार दीपांश शौकीन ने जीता।NSUI का एक भी कैंडिडेट कोई चुनाव नहीं जीता। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा दीपांश शौकीन की हो रही है क्योंकि इससे पहले दीपांश शौकीन NSUI से जुड़े थे। क्या कन्हैया कुमार और कांग्रेस को पता नहीं था। जब कांग्रेस के पास ऐसे उम्मीदवार थे तो दूसरे को टिकट देने की क्या जरूरत थी। 

राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम तो लगातार कर रहे हैं। क्या वो इन कार्यक्रमों के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ बना पा रहे  हैं। चुनाव में हार के बाद कही न कही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है। इस चुनाव से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 

हालांकि राहुल गांधी इस समय काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और सरकार के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार उनपर प्रहार किया जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जिससे कई जगह पर उनको कामयाबी भी मिली है। 





शनिवार, 25 जुलाई 2026

Zen G जीत गए, सरकार को झुकना पड़ा।

    काकोरोच जनता पार्टी का आंदोलन करीब एक महीने से ज्यादा चला , सरकार को झुकना पड़ा। आज उन सभी युवाओं की जीत हुई, जो खराब शिक्षा व्यवस्था खिलाफ लड़ रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। इन युवाओं ने बता दिया कि देश हमारा है, और हम अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। जंतर मंतर का ऐसा नजारा था, कि शब्दों में बताना संभव नहीं है। उनकी  अलग ही खुशी थी ,ऐसा लग रहा था कि उन्हें सबकुछ मिल गया हो , आंखों में खुशी के आंसु थे। सरकार  का अहंकार टूट गया था।

छात्र आंदोलन जंतर मंतर दिल्ली
Cacooroch protest 2026

     इन युवाओं के कोई ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिसमें राजनीति हो सके । इनके सीधे सवाल सरकार से थे , शिक्षा व्यवस्था को लेकर,   खराब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये कोई सत्ता नहीं मांग रहे थे। इसमें भी सुनने में सरकार एक महीने से ज्यादा का समय ले लिया। शायद इनकी भाषा सरकार को समझ नहीं आ रही थी, हालांकि बाद मे समझ आ गई। युवाओं की अच्छी बात यह थी कि वह किसी पार्टी, जाति समुदाय और वर्ग का न होकर आम मुद्दों की बात कर रहे थे। जो सरकार को समझ नहीं आ रहा था। 

      ये नए जमाने के GenZ सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले , इनको सोशल मीडिया से हटकर देश मुद्दों की भी समझ है। ये कहना गलत है कि इन्हें कुछ पता नहीं है। ये लोग अब जाति, धर्म, हिन्दू, मुस्लिम और मंदिर, मस्जिद से हटकर भी सोच रहे हैं। अब इनको देश के असल मुद्दों से भटकाया नही जा सकता और डर नाम की जगह इनके अंदर नही है। चाहे कितनी  सिविल ड्रेस और बिना बैचेस के पुलिस उतार दो ।इनके सीधे सवाल सरकार से होते हैं। 

      GenZ का मानना है कि, देश इन सबसे बढ़कर कही उपर है। पार्टियां बनती बिगड़ती रहती हैं, लेकिन देश नही। सरकार के प्रचार तंत्र ने आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विदेशों से फंडिंग आ रही है, पाकिस्तान के एजेंट है, चीन के एजेंट है, गुंडे और दहशतगर्द क्या नही बोला गया इन युवाओं को, जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लाठियां खाई , आशु गैस के गोले चले और कैनन वाटर की गाड़ियां आई, सबकुछ हुआ जो एक आंदोलन मसलने के लिए किया जाता है। ये लोग फिर भी शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे और अपनी आवाज को उठाते रहे।

     आंदोलन में जुड़ने वाले सबसे ज्यादा युवा थे। जो इस आंदोलन से नही जुड़ पाए उन्होंने घर से ही चाय और खाना भेजा ।  यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत  बन गई और आंदोलन देश अलग कोनों में होने लगे। Main stream media ने इसे कोई कवरेज नहीं दिया, जिससे मीडिया के भी नाकामी के नारे लगे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को अपने मंच पर जगह दिया। इस आंदोलन ने अपना एक इतिहास बना लिया। जिसमें मीडिया और सरकार इसके खिलाफ थी और इतिहास भी शांतिपूर्वक ऐसे ही बनता है। युवाओं ने भी इस नए समय में नई पहचान बनाई।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।

जंतर मंतर पर उमड़ी छात्रों की भीड़

लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन 26 दिन के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह रहे महजूद। छात्र बोले जारी रहेगा आंदोलन।

 

जंतर मंतर आंदोलन
मेदांता hospital sonam wangchuk 

पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने कल अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि  अगर सरकार के कुछ केंद्रीय मंत्री आए और हमें भरोसा दे कि बच्चों पर कोई कार्यवाह न हो और जवाबदेही तय हो तो मैं अनशन को तोड़ सकता हूं।

जंतर मंतर दिल्ली में हो रहे आन्दोलन में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया था।यह सब संसद तक मार्च होने के दो दिन पहले हुआ था। जिससे युवाओं में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया। अब यह एक विशाल जनांदोलन का रूप ले चुका है।नीट पेपर लीक को लेकर देश के अलग अलग कोनों में आंदोलन शुरू हो गए। अब ऐसी खबरें आ रही है कि कई जगह पर युवाओं और पुलिस में झड़प हो गई है। यह आंदोलन युवाओं के जागरूक  होने की याद दिला रहा है।

आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल जहां सोनम वांगचुक का इलाज चला रहा है।इससे पहले उनका शब्दरगंज हॉस्पिटल में चला रहा था।कोर्ट के आदेश पर ,सोनम वांगचुक की पत्नी और उनके घर वाले वहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। जोकि बाद फिर कोर्ट ने आदेश दिया और वहां से रेफर करके मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया। मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर और  कई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन 26 दिन के बाद तोड़ दिया।

    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी युवाओं का कहना की, जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन शांतिपूर्वक देश के अलग अलग कोनों में चलता रहेगा। अब यह आंदोलन एक विशेष व्यक्ति का न होकर, जनांदोलन बन गया है, जिसमे स्वतः लोग जुड़ रहे हैं। अभीतक सरकार तक ने अपनी गलती को नही माना और न जवाब देही तय की है।

मंगलवार, 21 जुलाई 2026

Black Day of Education 2026

Paper leak जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन


शिक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन मेरे इतिहास का पहला और सबसे बड़ा आंदोलन है। जिसको मैने अपनी आर्टिफीशियल (कैमरा) आंखों से देखा है, ये आंखे शायद कभी झूठ नहीं देखती हैं।  इस आंदोलन की शुरुआत के कई कारण रहे,  लेकिन जिसमे शिक्षा व्यवस्था इसका मुख्य कारण था। सोशल मीडिया से शुरू हो कर एक विशाल युवा जन आंदोलन का रूप ले लिया।लगातार हो रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार। पेपर्स में जानकर गलत प्रश्नों को डालना और इससे पैसा कमाना। ऐसे आरोप लगातार शिक्षा मंत्री की एजेसिंयों पर लगते रहे हैं। पेपर की तैयारी करो, गलत प्रश्न खोजों और उसे सरकार को बताओ ।एक गलत प्रश्न का शुल्क 200-300 रूपये तक है, जिसको तुम्हे ही भरना है।94000 से भी ज्यादा सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया। हजारों बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। पिछले 5 साल में 65 से 70 से ज्यादा पेपर 19 राज्यों में लीक हुए हैं। इसी प्रकार से चल रहा था पेपर लीक उद्योग ,जिसका शिकार  देश के पढ़ने वाले बच्चे हो रहे थे। पेपर लीक की समस्या से 20-22 बच्चों ने आत्महत्या कर ली जिसकी जवाबदेही या जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं था।

         इस आंदोलन की शुरूवात कुछ यूं ही मजाकिया अंदाज में 6 जून 2026 को हुई थी। इस आंदोलन को चलाने वाली पार्टी जिसका कोई अपना नाम नहीं । इसके नाम की भी एक दिलचस्प कहानी है। सबकुछ हमारी शिक्षा व्यवस्था से ही जुड़ा है। दरअसल 15 मई 2026 को अदालत में एक सुनवाई के दौरान , न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने काकोरोच शब्द का प्रयोग युवाओं के लिए किया था।  युवाओं ने इसे एक प्रतीक के रूप में लिया और अभिजीत दीपके के द्वारा काकोरोच जनता पार्टी की स्थापना की गई। इसके बाद यह पार्टी एक आंदोलन का रूप ले लिया। सोनम वांगचुक और कई स्टूडेंट्स ने भूख हड़ताल को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का रास्ता अपनाया और बताया हम गांधी जी और भगत सिंह के आदर्शों पर चलने वाले हैं। यहां पर हर एक धर्म, जाति,समुदाय और देश के लोग अलग अलग कोनों से आए और एक दूसरे का ध्यान भी रखा।

    आंदोलन की सबसे अच्छी बात यह है कि, इस आंदोलन में जुड़ने के लिए देश के अलग अलग कोनों से लोग इसमें उपस्थिति दर्ज कराई है। इस आंदोलन में लोग स्वतः अपने हक के लिए,अपने मन से जुड़ रहे थे। इसमें जुड़ने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी और यह कोई पैसे देकर बुलाई गयी भीड़ नहीं थी। युवा  बिना बताए अपने घर से, पॉकेट मनी पर और ट्रेन से भर कर आ रहे थे। यहां उनकी उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही थी।इन लोगों की कोई बहुत बड़ी मांगे नहीं थी ,ये जवाबदेही और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे थे। पेपर की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए एक करोड़ रुपए की मांग कर रहे थे।सरकार इनकी बातों का कोई जवाब नहीं दे रही थी, हद तो तब हो गई जब सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया। शायद यह आंदोलन के बड़ा होने का एक सबसे बड़ा कारण रहा हो।

   इसके बाद से यहां बड़ी संख्या में लोग स्वतः आने लगे 20 जुलाई को होने वाले मार्च में शामिल होने के लिए। यह मार्च जंतर मंतर दिल्ली से संसद तक होना था।  दिल्ली की  पूरी सड़के जनसैलाब से भरी थी। ऐसा युवाओं का जनसैलाब मैने पहले कभी नहीं देखा, केवल शिक्षा के लिए। बहुत सारे जवाब और सवाल थे। दिल्ली की चाक चौबंद देखकर ऐसा लग रहा था कि यहां कोई दहशतगर्द और आतंकी प्रदर्शन करने वाले हैं। हमारी सरकार का बच्चों के लिए ऐसा रवैया था। चारों तरफ बैरिकेडिंग लगी थी। पुलिस बच्चों को आगे पीछे खदेड़ रही थी, हालांकि बच्चों ने अपने धैर्य को बनाए रखा।यह आंदोलन 4 बजे शाम तक एकदम शांतिपूर्वक चल रहा था।  सरकार चाहती तो आंदोलन शांतिपूर्वक हो सकता था, लेकिन उसका इगो (अहंकार) इन बच्चों के  भविष्य से बड़ा है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ आक्रोश हुआ और संसद तक जाने की कोशिश करने लगी और कुछ संसद के पास पहुंच गए।

      इसके बाद पुलिस ने लॉयन ऑर्डर को बनाए रखने और संसद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाठीचार्ज करने लगी। लाठी खाने वाले 15 से 27 साल तक के युवा थे, जो शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आवाज उठा रहे थे। कुछ पुलिस वालों ने क्रूरता की सारी हदें पार दी, जाहिर सी बात है ये सब सरकार के आदेश पर हुआ होगा।  बच्चे खड़े होकर लाठियां खा रहे थे, ये कोई राजनीतिक बैकग्राउंड से नहीं थे । हम आप जैसे आम बच्चे थे।। सिर फटे, बच्चियों के कपड़े फाड़े गए,  पैर खींचे गए , आंसू गैस के गोले चले ,वाटर कैनन की गाड़ियां आई जो कुछ होना चाहिए था सब कुछ हुआ। पुलिस वालों ने अपने बैचेस हटा रखे थे कुछ सिविल ड्रेस में थे। ऐसा लग रहा था कि, सरकार को इन बच्चों की कोई परवाह नही है।इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध में पुलिस पर पत्थर चलाए और गाड़िया तोड़ी,जिससे कुछ पुलिस वालों को भी चोटें आई। किसी भी प्रकार का वायलेंस और विद्रोह, अच्छा नहीं होता है और न ही साथ देना चाहिए। चूक दोनों तरफ से हुई चाहे प्रशासन हो या सीजेपी के कार्यकर्ता, जिसके कारण पत्थर चले। शायद इन दोनों लोगों को अंदाजा नहीं था कि इतनी भीड़ में लोग आएंगे।तक जंतर मंतर कुछ समय के लिए सूना हो गया लेकिन इसके बाद फिर वही उत्साह और जोश के साथ युवा आने लगे।

     इतना सबकुछ होने के बाद भी सरकार ने कोई बात नहीं की और अभी तक न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हुआ (शायद हो भी न)। जिससे युवाओं में काफी ज्यादा आक्रोश देखा गया। यह एक लोकतन्त्र की अच्छी पहचान नहीं है। आंदोलन को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया,लेकिन सरकार विफल रही।  आज के दिन को इतिहास में Black Day Of Education 2026 के नाम से जाना जायेगा। युवाओं में यह बदलाव का जोश , शिक्षा की एक नई पहल होगी। जिसमें युवाओं ने अपने लिए खुद लड़ाई लड़ी। देश के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझा और सरकार को बताया कि हम पढ़े लिखे युवा हैं न की अनपढ़ नेता। इस पूरे आंदोलन को main stream media ने नहीं दिखाया। कुछ यूट्यूब चैनल ने अपने मंच पर पूरे आंदोलन को  जगह दिया। इसी तरह की बहुत सारी बातें, इस आंदोलन को एक नई पहचान देती हैं। शिक्षा के लिए होने वाला यह आंदोलन, अपना नाम इतिहास के नए पन्नों में दर्ज करवाता है।जब कभी शिक्षा व्यवस्था की बात होगी तो इस आंदोलन की , युवाओं से जोड़ कर इसकी भी बात होगी।


सोमवार, 20 जुलाई 2026

जंतर मंतर पर गूंजा पेपर लीक का मुद्दा

 पेपर लीक का मुद्दा अब देश की शिक्षा व्यवस्था के सुधार का एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। जिसमे बच्चों से लेकर, युवाओं और बुजुर्गों ने अपनी उपस्थिति को दर्ज किया है। यह आंदोलन शांतिपूर्वक और गांधी जी के रास्ते पर चल रहा है, जिससे इसकी महत्वाकांक्षा और बढ़ गई है।  CJP आन्दोलन क्या है?  इसकी मांग और विचारधारा क्या है ? क्यों देश का इतना बड़ा मुद्दा बन गया है?  किसने इसकी शुरुआत की? सब  कुछ जानने की कोशिश करेंगे।

पिछले 5-6 सालों से देश में हो रहे लगातार पेपर लीक और पेपर में होने वाली खामियों को लेकर एक आंदोलन शुरू हुआ। जिसकी शुरुआत काकोरोच जनता पार्टी (CJP)के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा 6 जून को जंतर मंतर दिल्ली से इसकी शुरुआत की गई। पूरे भारत के 19 राज्यों में 65-80 पेपर लीक हुए हैं। UDISE के अनुसार 94000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को सरकार ने बंद कर दिया है। अब तो सरकार  यूनिवर्सिटी तोड़ने का प्रोजेक्ट चला रही है। केवल नीट पेपर लीक की वजह और पेपर रद्द होने से 20-21 बच्चों ने सुसाइड कर लिया । कई National education policy (NEP) आई और बजट भी बना लेकिन लागू नहीं हो पाई और न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो पाया।

इस पेपर लीक उद्योग और भ्रष्टाचार से केवल युवाओं का भविष्य खतरे में नहीं है, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकार में है। कई पेपर लीक हुए NEET, SSC, CGL, UPTET बहुत सारे पेपर्स लीक हुए लेकिन इनकी जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं है। शिक्षा मंत्री को शिक्षा से कोई मतलब नहीं है।एक महीना हो रहा है शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री किसी न भी बात करना उचित नहीं समझा। क्या लोकतंत्र में यही सब होता है। 

शिक्षा व्यवस्था के चरमराते हालत को देखते हुए युवाओं ने जंतर मंतर पर,धूप , बारिश में आंदोलन कर रहे हैं। देश के दूर दराज इलाकों से, लोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए आ रहे हैं। ये लोग किसी MP,Mnister IAS और IPS के लड़के नहीं है। आम लोग हैं जिनका सिस्टम विश्वास टूट गया है। ये कोई दहशत गर्द और आतंकी नहीं है, ये सब भारत के लोग हैं। जो अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है,गांधी जी के सत्य अहिंसा मार्ग पर। सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन से जोडक़र इसको एक नई दिशा और दशा दी है। यह देश हम सबका है, हम सब मिलकर तय करेंगे  देश किन हाथों में हो । कई स्टूडेंट्स और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं। यही कारण है,हजारों लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं।

ECI में SIR को लेकर मतभेद, दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई औपचारिक आपत्तियां फिर भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

    इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) में, मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के काले कारनामों का खुलासा The Indian Express की रिपोर्ट में हुआ है। ज...