हाल में ही CAG ( Comptroller and Auditor General of India) यानी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक जो भारत की एक संवैधानिक संस्था है जिसकी एक रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। जिसमें रेलवे स्टेशनों पर होने वाली सुविधाओं में बड़ी कमियां पाई गई है। रेलवे स्टेशनों पर जो पीने वाला पानी है उसमें E. Coli, बैक्टीरिया पाए गए हैं। यह समस्या देश के एक दो स्टेशनों पर नही है बल्कि देश के 89% स्टेशनों पर सुविधाओं में कमी पाई गई है और 8 ज्यादा जगहों पर पीने वाले पानी में बैक्टीरिया पाए गए हैं।
बड़े बड़े दावा करने वाली करने वाली सरकारें कब तक दावे करती रहेंगी कम से कम यात्रियों के लिए साफ पानी तो मुहैया करवा दे। इसी तरह दूसरी कमियां टॉयलेट, सेल्टर और यात्रियों की बैठने की सुविधा नहीं है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कुछ स्टेशनों पर क्लोरिन की मात्रा तय सीमा से ऊपर पाई गई है। जो अपने आप में चिंता का विषय है। जब ये हालात बड़े बड़े रिहायशी शहरों के हैं। शहर से दूर बसे गांवों के हालात क्या होंगे अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। जब बात करते हैं हम टेक्नोलॉजी की और डेवलपमेंट की दूसरी तरफ हम अपने लोगों को स्वच्छ पानी तक नहीं दे सकते हैं।
CAG ने 512 चयनित गैर उपनगरीय रेलवे स्टेशनों की जांच की जिसमें से 458 रेलवे स्टेशनों पर सुविधाओं में खामियां पाई गई। ये सामान्य सुविधाओं में कमी थी। CAG ने यात्रियों को मिलने वाले बजट पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 और 2023-24 के दौरान मिलने वाले बजट का 36%से 40% तक खर्च नहीं किया गया है। इस कदर से करप्शन हो रहा है। मूलभूत सुविधाओं को कटकर पैसा बचाया जा रहा है।

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