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रविवार, 13 सितंबर 2026

पैकेट पर लाल रंग का निशान बताएगा कितना खतरनाक है खाना? सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा जवाब

 

फूड पैकेट पर वार्निंग लेबल लगाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने पैक्ड और अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड खाद्य पदार्थों में ज्यादा चीनी, वसा और नमक को लेकर कड़ा रुख अपनाया है और FSSAI से जवाब मांगा है। Front of pack labeling (FoPL) करने का आदेश दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में 10सितंबर 2026 को 3S और our health Society बनाम Union of India का मामला दायर किया गया। जिसकी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट FSSAI से 10 दिन के अंदर जवाब मांगा है। फूड पैकेट पर पैकेट के आकार के अनुसार वार्निंग लेबल रेड कलर का लगाया जाएगा। वार्निंग लेबल का आकार 6 कोणीय और उसका साइज सब कुछ निर्धारित करना होगा। उसमें कौन सा इंग्रीडिएंट है और उसकी मात्रा कितनी है? पैकेट के टेक्स्ट के फॉन्ट से वार्निंग लेबल का फॉन्ट बड़ा होगा। वार्निंग लेबल फूड पैकेट के फ्रंट पर लगेगा। 

इससे ग्राहकों समझने और पढ़ने में आसानी होगी। उपभोक्ता को आसानी से पता चलेगा कि कौन सा इंग्रीडिएंट कम या ज्यादा है। लोग अपनी इच्छा अनुसार निर्णय ले सकेंगे कौन प्रोडक्ट लेना है या नहीं। इन जंक फूड्स में वसा, शुगर और चीनी मात्रा ज्यादा अलग अलग खाद्य पदार्थों के अनुसार होती है। जंक फूड्स और कोल्ड्रिंक्स जैसे पेय पदार्थों में नेचुरल सुगर के साथ अलग से सुगर मिलाया जाता है। जो स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर fssai ने इस पर समय मांगा है और इसको दो चरणों में लागू करने को कहा है। इसमें कंपनियों को बदलाव करने पर समय लग सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस पर 10 दिन के अंदर जवाब मांगा है। वार्निंग , बैकग्राउंड, इंग्रीडिएंट मात्रा सबकुछ निर्धारित करना होगा। क्या वार्निंग लेबल लगाने से लोग जंक फूड्स और कोल्ड्रिंक्स पीना कम कर सकते हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने यह कदम खासकर बच्चों के लिए उठाया है क्योंकि इन जंक फूड्स का बुरा प्रभाव सबसे ज्यादा बच्चों पर पड़ता है। इन जंक फूड्स के खाने से सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित होते हैं। इन जंक फूड्स में वसा, शुगर और नमक की मात्रा बॉडी की जरूरत से ज्यादा होती है। क्यों ये कपनियां सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं करती हैं और उनको लेबल लगाने की जरूरत पड़ रही है। 




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