भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर प्रसाद और रूस के राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात सोमवार को मास्को के क्रेमलिन में हुई है। भारत और रूस ने परमाणु कार्यक्रमों, ऊर्जा, खाद और व्यापार के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग करने पर बात की गई है। जिससे दोनों देशों में आपसी सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही रूस के अन्य नेताओं से भी मुलाकात की। जयशंकर प्रसाद दो दिवसीय यात्रा पर रविवार को मॉस्को पहुंचे। यह यात्रा 12-13 सितंबर को होने वाले देशों के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने लिए पुतिन के दिल्ली दौरे से पहले हो रही है। जयशंकर प्रसाद ने रूस के उपराष्ट्रपति डेनिश मंत्युरोव के साथ व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक मुद्दों पर बात हुई।
हालांकि भारत का व्यापार रूस के साथ घाटे का व्यापार है और व्यापार का सन्तुलन भारत के पक्ष में नहीं है। 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत रूस को $4.9 अरब का निर्यात करता है और रूस से आयात लगभग $ 63.9 अरब का था, यानी भारत को $58.9 अरब का घाटा हुआ। व्यापार में आर्थिक साझेदारी बढ़ाने के लिए जयशंकर प्रसाद और पुतिन के बीच इन मुद्दों को लेकर बात चीत हुई। जिसमें उन्होंने परमाणु कार्यक्रमों और उर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय बढ़ावा देने के साथ भारतीय निर्यात और भारतीय वस्तुओं को रूस के बाजार में बढ़ाने पर भी बातचीत हुई। इसी के साथ भारत और रूस के व्यापार को $58.9 से बढ़ाकर 2030 तक $100 अरब तक पहुंचना है। व्यापार को बैलेंस करने की चुनौती बनी हुई है।
इसके साथ राष्ट्रपति पुतिन ने उर्वरक को लेकर भी आपसी सहयोग करने का अश्वासन दिया। उन्होंने कहा इसके लिए हम कोशिश कर रहे। इस आपसी सहयोग से भारत में उर्वरक की किल्लत से छुटकारा मिल सकता है। जिससे कृषि क्षेत्रों में किसानों को उर्वरक के रूप में सहायता मिल सकती है। यह किसानों के लिए बड़ी सौगात होगी। खाद की आपूर्ति की जा सकती है। इसी क्रम मे एनर्जी, फार्मा, मिलेट्री जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग करने पर भी चर्चा हुई ।
जयशंकर प्रसाद ने राष्ट्रपति पुतिन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत संदेश भी दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति पुतिन को शुभकामनाएं दी,और भारत में होने वाले BRICS का 18वां शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर 2026 में हो रहा है। जहां दिल्ली में इसका आयोजन होगा प्रधानमंत्री ने पुतिन से मिलने की इच्छा जताई है। आपसी सहयोग से आर्थिक स्थिति में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत और रूस के संबंध पारंपरिक तौर से लंबे समय से अच्छे रहे हैं और लगातार व्यापार बढ़ रहा है।
