कितनी सरकारें आई गयी , कुछ ने काम किया कुछ ने नही।देश कभी तेजी से आगे बढ़ा,कभी रुक सा गया। सभी सरकारों ने अपने अपने दावे किये , कभी पूरे हुए कभी नहीं।यही सिलसिला चलता रहा,शायद आगे भी चलता रहेगा। पर आम लोगों की जिन्दगी जैसी तब थी, वैसी ही शायद आज है।कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला आम लोगों के लिए। अमीर, अमीर होते चले गए ,गरीब मध्यम वर्ग में तो आ गए पर उनकी स्थिति गरीब से भी खराब है। वे लोग न तो अमीर बन पाए और न ही गरीब, शुरु से लेकर आजतक बीच में ही पिसते रहे। कहने को तो कागज पर बहुत काम हुआ पर जमीन पर कुछ नहीं। हॉस्पिटल्स, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटी बनते रहे हैं लेकिन ये सब नेताओं और अमीरों के लिए और उनके बेटों के लिए क्वालिटी नहीं दे पाएं। ये लोग अपने बेटों को पढ़ाने के लिए विदेश भेजते हैं और खुद बीमार हो जाएं तो विदेशों में इलाज करवाते हैं। जो नेता संसद में खड़े होकर समोसा चाय पानी रिचार्ज और युवाओ के मुद्दों को उठाते थे। ईमानदारी का डंका बजाते थे। आज वही नीट ,SSC जैसे युवाओं के मुद्दों पर चुप हैं। बाबू भैया सब रुपयों और सत्ता का खेल है ।फिर वही पुराना सवाल आम लोगों का क्या। आम लोगों ने तो बनवाया नहीं एजुकेशन और हेल्थ संस्थानों को। जो उनकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। देश को चलने वाले जितने भी लोग हो चाहे नेता ,उद्योगपति या आला अफसर,इन सभी का हाथ है देश के बड़े संस्थानों को बनाने में। इन सब करप्ट और भ्रष्ट लोगों को पता है।जो भी हमने देश में बनाया है, वह अच्छा नहीं।इसी कारण ये लोग विदेश जाते हैं, चाहे पढ़ाई करना हो या इलाज करवाना हो। यही विकास का सबसे बड़ा सबूत है। देश के सब लोग करप्ट और भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन जो है वो बहुत कुछ कंट्रोल करते हैं। आज आप देख लो कोई अपनी समस्याओं को लेकर धरना नही कर सकता है। जबकि यह हमारा अधिकार है।हम शांतिपूर्वक किसी का भी विरोध कर सकते हैं यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। लोगों को जाति धर्म और मंदिर मस्जिद नहीं,उनको स्किल्स सिखाओ, रोजगार दो जिससे देश का विकास होगा। देश का विकास तो हो रहा है पर आम लोगों का नहीं , नेताओं का और कुछ बड़े आला अफसरों का। सारा विकास का रुपया इन्हीं सब के पास है।अब मैं देख पा रहा हूं कि नया यूथ इन सब बातों को समझ पा रहा है लेकिन इसमें देश के भविष्य के हित विषयों पर बात होनी चाहिए। देश हमेशा रहेगा, लेकिन ये लोग नहीं रहेंगे। देश किसी के भी हाथ में रहे । वह देश का सेवक बनकर काम करे ,भगवान बनकर नहीं। देश की अर्थव्यवस्था 4th से 6th नम्बर पर आ गई है। हालात कैसे भी हो आम जनता को सच बताना चाहिए, और जनहित के मुद्दों पर बात होनी चाहिए। कोई पक्ष और विपक्ष आम लोगों के मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता है। समय एक सा नही रहता है। बदलाव ही प्रकृति का नियम है।इसका कारण कुछ भी हो सकता है,और शुरूवात कही से भी।
The Public Pahuch
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
असम में बाढ़ का कहर लाखों लोगों का जीवन हुआ प्रभावित
असम में बाढ़ का कहर पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होने कारण,लाखों लोगों का जन जीवन प्रभावित हुआ है। लोगो...
-
BJP का गढ़ कहा जाने वाला बांकीपुर का किला जन स्वराज पार्टी,प्रशांत किशोर ने भेद दिया है। भारतीय जनता पार्टी आज पहली बार चुनाव हारा है और...
-
मेदांता hospital sonam wangchuk पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने क...
-
आओ दीपों को लेकर हम, आगे बढ़ते जाएं। जाति धर्म के अंधियारे से, सदा दूर हम हो जाएं। इसकी विविधता जिसने देखा, उसमें वो खो जाये। इतना बड़ा देश...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें