इसका नाम GenZ या किसी दूसरे ने नही दिया है।यह नाम हमारे देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने दिया है। इतने बड़े पद पर होते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए कोकरोच शब्द का इस्तेमाल किया। उनका दोष यह था कि, वो रोजगार मांग रहे थे, भ्रष्टचार, VIP culture, neet paper leek, ssc , scam , इन सबके खिलाफ अपनी आवाज ,अपनी मांगो को रख रहे हैं और शांतिपूर्वक, तो इसमें गलत क्या है। क्या एक लोकतांत्रिक देश में यही सब होता है, सरकार की खिलाफ बोलने पर आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है।क्या ये लोकतांत्रिक देश के सरकारों के अधिकार होते हैं। एक ऑनलाइन वर्चुअल कैंपेन से डर गई। इससे आप मुद्दों को रोक नही सकते है,बल्कि लोगों का और ज्यादा आक्रोश बढ़ता है। आपको उनकी मांगों को सुनना चाहिए।इसके बजाय आप उन पर आप लाठियां बरसाते हो।ये कहां का न्याय है।भाई साहब ऐसा कौन करता है। सबका साथ सबका विकास बोलने वाले। जिन्हें NCERT का full form नही पता उन्हें एजूकेशन मिनिस्टर बना दिया जाता है। जब तक लोगों को रोजगार नही दोगे तबतक देश कैसे आगे बढ़ेगा। आज भारत IMF की रैंकिंग में वर्ल्ड में 4th से 6th नम्बर पर आ गया है। बात करते हैं हम विश्व गुरु बनने की। जाती धर्म, मंदिर मस्जिद, मुद्दों से
हटकर बात करने वाले ये नेता देश को कभी आगे नहीं ले जा सकते हैं। स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल ये सब बनाने का क्या फायदा , उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते।उनको हॉस्पिटल की जरूरत नहीं, उन्हें तो विदेशों में इलाज करवाना है।भाई तुम्हारे से फर्क पड़ता है और नहीं भी। आज देख लो ऐसी कोई खाने वाली चीज नहीं बची है जिसमें मिलावट न हो, इन्ही चीजों को खाने से गंभीर बीमारियां हो रही है। किसी को कोई फर्क ही नही पड़ता है,FSSAI (Food safety and standards Authority of India) आराम से सो रहा है। इन सब मुद्दों पर बात करने वाला देश द्रोही है। कितना ज्यादा खुलेआम कलर ग्रेडिएंट, एडेड शुगर और हानिकारक केमिकल को बेचा जा रहा है और हम खा भी रहे हैं। यह सब जिम्मेदारी किसकी है। और हम किससे पूछेंगे हमारे देश में बैठे सिस्टम के लोगों से या अमेरिका ,चीन में बैठे सिस्टम के लोगों से।
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