The Public Pahuch

रविवार, 17 मई 2026

जिसने दिया है ये जीवन

 जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

कैसे भूल जाते, हम उनको।

अनमोल रतन है, जीवन सबका।

बार बार है, न ये मिलता।

याद है करते, हम उनको।

जिसने दिया है , जीवन ये मुझको।

                        मां बाप से बढ़कर, कोई नहीं होता ।

                          दुनिया का दिखावा, कम नहीं होता।

                            कष्ट न होने दो, तुम उनको ।

                              जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

पाई पाई जोड़कर, तुमको पढ़ाते हैं।

खुद का मन मार कर, तुमको बढ़ाते हैं।

उनके बुढ़ापे का , तुम ही सहारा हो।

जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

कैसे भूल जाते, हम उनको।

                              सौरभ कुमार 

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