20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में जिन छात्रों पर कार्यवाही की मांग की जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा है प्रदर्शन कारी छात्रों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई में कहा था कि लोकतंत्र में ऐसे प्रदर्शन होते रहते हैं । मामले की गंभीर और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
Supreme कोर्ट का बड़ा आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ सुनाया है। नीट पेपर लीक में प्रदर्शन कर रहे छात्र जिनकी उम्र 18 साल से कम है उन पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह किसी भी राज्य जुड़ा हो। CCTV camera या ड्रोन की द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग या डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखे इसे किसी भी हाल सार्वजनिक नहीं क्या जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और 7 राज्यों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने कहा राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद हाई लेवल कमेटी का गठन होगा। इस कमेटी के द्वारा हाल में घटित हुए मामलों की निष्पक्ष जांच कराएगा।
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है जिसने भी ज्यादती की है कानून उसके खिलाफ अपना काम करेगा। इस सब के खिलाफ पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक जांच का कोई मतलब नहीं है।
CJI सूर्यकांत ने कहा इन सभी पिटीशन में एक आरोप कई बार लगाया गया है। जंतर मंतर दिल्ली के प्रदर्शन में पुलिस द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जिसमें कई लोगों चोटें आई हैं। एक 19 साल के लड़के की आँख रोशनी चली गई है। इलेक्ट्रॉनिक बैटन के कारण एक लड़की को ICU में भर्ती कराया गया है। एक और आरोप है जिसमे पुलिस के द्वारा कील वाली लाठी का प्रयोग जिसमें जान खतरा और एक आरोप मीडियाकर्मी के घायल होने का भी मामला है। पुलिस वाले सिविल ड्रेस में, उनके पास बैचेस नहीं थे और पुलिस की हिंसा का मामला है।
केन्द्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस हिंसा में 250 से ज्यादा पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार छात्रों पर बल का प्रयोग हल्के में नहीं ले रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुषार मेहता को टोकते हुए कहा इसलिए हम चाहते हैं जांच हो ,इस तुषार मेहता ने कहा हम ये नहीं कहते हैं कि हिंसा छात्रों ने की लेकिन आंदोलन के दौरान इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुसे जिसके द्वारा यह हिंसा हुई जिसका हम डेटा पेश करेंगे। उन्होंने ने दावा किया इसमें वो लोग शामिल थे जो पहले से किसी आरोपो में शामिल हैं।
इसमें जांच समिति को लेकर भी दलील हुई दोनों लोगों का कहना है कि यदि हम अपनी अपनी तरफ से रिटायर्ड जजो का चुनाव करेंगे तो हम पर आरोप लगेंगे न इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा हम खुद से इस समिट का गठन करेंगे।
इसी बीच बिहार का भी मामला सामने आया जिसमें सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि हम मुकदमे वापस ले रहे हैं। लेकिन अभी 150 ज्यादा नाबालिक बच्चे पुलिस की कस्टडी में है। जिनको 48 घंटे के अंदर मजिस्टेट के सामने पेश किया जाय।

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