Parliament मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे बीच सरकार ने आज यानी 27 जुलाई को Anti paper leak Bill और Amendment 2026 को संसद के दोनों सदन में संसदीय कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेन्द्र सिंह ने पेश किया। इसमें पेपर लीक curruption को रोकना और सजा के लिए कड़े नियमों को बनाना और उनका पालन करना। Fast track courts जिसमें संवेदनशील मुद्दों के लिए कार्यवाही को कम समय में सुनवाई करना और फैसला सुनाना। जिससे सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके।
किसी भी पेपर लीक से जुड़ी समस्या को हल्के में न लिया जाए, उस पर तुरंत कार्यवाही हो और नियमित समय से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए । विपक्ष सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों पर लाठीचार्ज हुई और अमितशाह से जवाब की मांग करते हुए हंगामा कर रहे थे। संसद की कार्यवाही स्थगन होने के बाद दोबारा 12 बजे के बाद शुरू हुई और दुबारा विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच उन्होंने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने TMC सहित कई सांसदों का नाम लिया और कहा कि क्या वे इस विधेयक को लेकर कुछ बोलना चाहते। इस पर विपक्ष कि तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ओम बिड़ला ने कहा यह महत्वपूर्ण विधेयक है इस पर देश की मंशा पर व्यापक चर्चा होगी। विपक्ष बहुत सारे लोग इस पर चर्चा करने की मांग कर रहे थे। यह सुधार का प्रथम चरण है। सबको इसे साथ देना चाहिए, हम इसके लिए पर्याप्त देंगे और यह बिल पास हो सके ताकि पेपर लीक रोकने का समुचित प्रावधान हो सके।
सरकार के इस बिल में पेपर लीक और फ्रॉड करने वालों के लिए कड़े नियमों का प्रावधान है। जिसमें कानूनी प्रक्रिया को स्पीड देना ।किसी भी पेपर लीक खिलाफ दर्ज हुए मामलों में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करना होगा। 2 महीनों के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पेपर लीक या अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने पर 5 से 10 साल तक सजा होगी। इससे पहले 3 से 5 साल सजा का प्रावधान था। यदि जुर्माने की बात करें तो पहले 50 लाख ,और 10 करोड़ है। एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन होगा और हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। पेपर लीक माफिया को पकड़ कर कम समय में मामलों को सुलझाया जा सके।

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