संसद के इस मानसून सत्र में सरकार FCRA बिल पारित करने के लिए ला रही है। यह मानसून सत्र 20 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें 5 नए बिल है और दो पहले से ही संसद में लागू करने के लिए ,बहस चल रही है। इस सत्र में नीट पेपर लीक को लेकर संसद में काफी हंगामा हो रहा है और कई बार सदन की कार्यवाही को रोकना पड़ा।
FCRA ( Foreign Countribution Regulation Act) Amendment Bill 2026
इस बिल को 28 मार्च 2026 को भारत सरकार ने लोकसभा में प्रस्तावित किया था। यह बिल विदेश से आने वाली फंडिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए इसे लाया जा रहा है। कौन लोग और संस्थान है जो इस फंडिंग को प्राप्त कर रहे हैं। इसको खर्च किस पर किया जा रहा है। इन सब पर सरकार की नजर रहेगी।इसका मुख्य उद्देश्य है इसके गलत प्रयोग को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। ऐसे कई खबरें आती रहती हैं कि फंडिंग का उपयोग गलत कार्यों में किया जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हितों को ध्यान रखते हुए सरकार ने इस बिल को लाया है यह बिल होम मिनिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा।
देश दुनिया में बहुत सारे NGOs या संस्थान है जिनको विदेशों से फंडिंग आती है। जिसके द्वारा बहुत सारे प्रोग्राम चलाए जाते हैं जैसे हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए विदेशों से फंडिंग मिलती । यह फंड पॉलिटिकल पार्टी , सांसद, जज, सरकारी कर्मचारी और मीडिया संस्थानों को नही मिल सकता है।
यदि FCRA किसी कारण से रद्द या ले लिया जाता है तो उस पर बने कानून के अनुसार FCRA उस संपति को अपने प्रबंधन में ले लेगा । यदि पंजीकरण समाप्त होने पर सारी संपति प्रबंधन के पास जाएगी ,यदि NGOs का सर्टिफिकेट बहाल कर दिया जाता है तो सारी संपति वापस कर दी जाएगी।
यदि पंजीकरण एक निश्चित समय तक जारी नहीं किया जाता तो सरकार सारी संपति जप्त कर लेगी और उसका उपयोग सार्वजनिक हितों के लिए किया जाएगा।
यदि पंजीकरण कैंसिल कर दिया जाता है तो आप ऑथोरिटी विरोध कोर्ट में इसकी अपील कर सकते हैं।
FCRA नियम के तहत अनुसार कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर सजा अधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1वर्ष तक घटने प्रावधान है।
जितने भी राज्यों में NGOs पंजीकरण है उन सभी को सरकार को अपने कार्यों के विषय में बताना होगा। जिससे सरकार सुनिश्चित करे पाए।
सरकार का कहना है कि इसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है और हम देश में राष्ट्रीय सुरक्षा ,संप्रभुता और शांति को बनाए रख पाएं। बहुत सारे लोगों का कहना है कि सरकार इस पर अपना ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती। इसके परिणाम स्वरूप इसका प्रभाव पर देखा लोगों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता। उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा जो विदेशों से NGOs की फंडिंग का दुरूपयोग करते हैं और जो यह सब करवाते हैं। यह बिल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और संसद में इसकी बहस चल रही है।

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