नीट पेपर घोटाला में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, केंद्रीय मंत्री पहलाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्य भार । आज यानी रविवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों से की बातचीत। हालांकि पहलाद जोशी के पास पहले से ही कई बड़े मंत्रालय हैं और उनके पास ही मौजूद रहेंगे। अभी उनके पास कई मंत्रालय हैं जैसे उपभोक्ता मामले, खाद्य और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। भारत सरकार ने उन पर भरोसा जताया है।
पहलाद जोशी काफी लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उनकी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि संसद के बाहर हो या अंदर एक सक्रिय नेता के रूप में देखी जाती है। उन्होंने ने अपने जीवन की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ से की थी। कर्नाटक में उन्होंने ने संगठन के लिए जमीनी स्तर से जुड़कर काम किया है और उनकी अच्छी पहचान है अपने क्षेत्र में और लगातार काम करते रहे हैं।
अपना पहला चुनाव 2004 में लड़ा था और अब वह 22 साल से लगातार संसद है। लगातार 5 बार कर्नाटक से लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं। जिससे वो अपने क्षेत्र के प्रभावशाली नेता बन गए है।। समय समय पर उनको सरकार ने कई जिम्मेदारियां दी हैं।
सरकार में रहते हुए कई बड़े पदों को संभाला है वर्ष 2012 कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 2014 के बाद लोकसभा में संसदीय समितियों की जिम्मेदारी मिली। 2019 में मोदी सरकार ने कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भार सौंपा गया है। अब उनके पास अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी आ गई है।
उनके पास शिक्षा व्यवस्था को लेकर इस समय कई चुनौतियां हैं। चाहे नीट पेपर लीक को लेकर हो या नई शिक्षा नीति लागू करना हो। शिक्षा नीति में कई बदलाव सख्त जरूरत है। NTA हो या और शिक्षा से जुड़े संस्थान। अब युवाओं और उनके माता पिता का भरोसा नए शिक्षा मंत्री पहलाद जोशी पर टीका हैं। बहुत सारी पॉलिसीज बनानी और लागू होनी है।
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