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रविवार, 30 अगस्त 2026

उत्तर प्रदेश के जिला सीतापुर में गांवों की सड़कों की हालत खराब, लोगों के आवागमन में हो रही असुविधा: बारिश के मौसम में सड़कों पर भर रहा पानी और कीचड़

     

उत्तर प्रदेश सीतापुर में ग्रामीणों के द्वारा पक्की सड़क की मांग की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में जिला सीतापुर के  मजरे दरियापुर, ग्राम तिंदोहिया में सड़कों की हालत इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में लोगों को पानी और कीचड़ में आना जाना पड़ता है। जिससे उनको बहुत असुविधा होती है। गांव के लोगों की मांग है सड़क बननी चाहिए। जिससे आने जाने में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

ग्रामीणों की मांग है बह्मा चौकी नहर से लेकर भगौली तीर्थ स्थल तक सड़क का निर्माण होना चाहिए। इसके साथ ही इटैला पुल और बहेरवा पुल के बीच में जो तिंदोहिया की पुलिया है, वहां से लेकर गांव तक पक्की सड़क का निर्माण होना चाहिए। इससे पहले गांव के लोग कई नेताओं के पास इस समस्या को लेकर गए थे। लेकिन इसका समाधान नहीं हो पाया। 

सरकार के जल मिशन योजना के तहत गांवों में घरों तक पानी पहुंचाने के लिए जो पाइप डाले गए हैं और सड़कों को खोदा गया। पाइप डालने के बाद उन गड्ढों वैसे ही खुला छोड़ दिया गया है। इसकी वजह से स्कूल जाने वाले बच्चों को गड्ढे में गिरने का खतरा बना रहता है और आने जाने में असुविधा होती है। बारिश के मौसम में पानी के निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से पानी और कीचड़ सड़कों पर भर जाता है। यह समस्या केवल एक गांव की नहीं है। ऐसे बहुत सारे गांव हैं जिनमें सड़कों की यही हालत है। येे कोई एक सड़क नहीं है। गांव की जितनी सड़के हैं वे एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ती हैं उन सभी सड़कों की यही हालत है।

गांवों में कोई कार्य नहीं हुआ है। बारिश के समय में इन सड़कों पर पूरा पानी और कीचड़ जमा हो जाता है। यदि कोई काम भी होता है तो वह बस नाम मात्र मिट्टी डाल दी गई गड्ढे ढक गए, इससे ज्यादा कुछ भी नहीं हुआ है। अगले साल बारिश आने पर फिर गड्ढे हो जाते हैं। यह समस्या कोई आज की नहीं है सालों पुरानी है। जो भी आया और गया लेकिन गांवों के हालात नहीं बदले। चाहे ग्राम प्रधान हो, बीडीसी,जिला पंचायत, विधायक और सांसद हो, ये सब इसके जिम्मेदार हैं। इन सबको पता है कहां क्या समस्या है इसके बावजूद कोई कार्य नहीं हुआ है।

सारा कार्य दस्तावेजों होता है, ग्राउंड पर कुछ भी नहीं मिलता है। भ्रष्टाचार अपने चरम पर है। बजट हर साल पास होता है और फंड भी मिलता है। कार्य नहीं होता है और न ही इन सबको आम लोगों की समस्यों से कोई मतलब है। ये लोग बस चुनाव के समय आते हैं और बड़े बड़े वादे करके चले जाते हैं। कार्य न होने का पॉलिटिकल कारण भी है। जब पैसा ऊपर से लेकर नीचे तक बटेगा कार्य कैसे हो पाएगा। विकास के नाम पर जिन गांव में कुछ कार्य हुआ है उसे ही दिखा दिया जाता है।



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