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गुरुवार, 6 अगस्त 2026

तुकाराम मुंडे की FDA की कार्यवाही पर Bombay High Court सख्त और अगले दिन कोर्ट की canteen पर लगा ताला


  यह मामला करीब 3 हफ्ते पहले का है। जब महाराष्ट्र के FDA (food and drugs administration)  department के IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने प्राइवेट बड़े बड़े होटलों ,रेस्टोरेंट और कैंटीनों में छापा मारा और बंद कर दिया। ये सारे होटल,  FASSI के मानक नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इस समय मुम्बई की पुलिस से ज्यादा FDA की चर्चा हो रही है और इन्हें महाराष्ट्र FDA का सिंघम कहा जा रहा है। FDA जो खाने का सामान और ड्रग्स की गुणवत्ता की देखभाल करता।

  देश में लगातार बढ़ रहे मिलावटी पनीर ,दूध से बने उत्पादों पर रोक लगाना। इसके अलावा रेस्टोरेंट, हॉटल, कैंटीन और बेकरी जो भी खाद्य सुरक्षा मानक नियमों का पालन नहीं कर रहा उसके लाइसेंस को रद्द किया जा रहा है इसी क्रम में उन्होंने ने मुम्बई के बड़े जाने माने कैंटीन,होटल और रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुम्बई में 6 होटेल्स, रेस्तरां , बेकरी और क्लब्स का लाइसेंस निलंबित कर दिया है इसी तरह अलग अलग जगहों पर छापा मारा और लाइसेंस निलंबित कर दिया। कुछ का तो कैंसिल ही कर दिया। स्कूल ,कॉलेज से दूर लगभग 50 मीटर दूरी पर गुटका पान मसाला की दुकान होनी चाहिए।

   कुछ लोग जिनके लाइसेंस बंद या निलंबित हुए कोर्ट पहुंच गए जिसकी सुनवाई 2 अगस्त को हुई।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि प्राईवेट होटल और रेस्टोरेंट को टारगेट करके बंद किया जा रहा है।कोर्ट का कहना था कि प्राइवेट और सरकारी रेस्टोरेंट और होटल के लिए अलग नियम है। कुछ लोगों की दलील है कि बिना नोटिस दिए रेस्टोरेंट को बंद कर दिया गया।इससे पहले सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इसके अगले ही दिन IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे अपने आला ऑफिसरों के साथ बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे और वहां कैंटीन में छापा मारा और ये कैंटीन खाद्य सुरक्षा मानक नियमों पर खरे नहीं उतरे और उनको सील कर दिया। इसके लिए बड़ा जिगरा होना चाहिए। इसके पहले ये हेल्थ डिपार्टमेंट में थे वहां भी डॉक्टर और नर्स सब समय पर पहुंच जाते थे। ये जहां भी जाते अपनी छाप छोड़ देते हैं।

  ये 2005 बैच के IAS अधिकारी है जो महाराष्ट्र के कैडर जिले बीड से एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। इनकी UPSC all India rank 20 थी। ये अपने कार्यकाल 21 वर्षों में अब तक 25 बार ट्रांसफर (तबादला) हो चुका है। हो सकता ये अपने पूरे कार्यकाल में हॉफ सेंच्युरी पार कर दें। जाहिर सी बात है इनकी मंत्री मिनिस्टर से साठ गांठ नहीं होगी और अपने वसूलों के प्रति ईमानदार होंगे।तभी तो इतने ट्रांसफर हुए।

  इनके जैसे IAS अधिकारी देश के हर जिले में होते तो हमारा देश और भी तरक्की करता । 

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