The Public Pahuch
सटीक खबर, आपकी पहुँच
विश्वसनीय  |  निष्पक्ष  |  जनहित
f 𝕏 ◎ ▶ ⌕FOLLOW
☁️मौसम
▶️वीडियो
⚡न्यूज़ शॉर्ट्स
⚡ BREAKING NEWS
The Public Pahuch की बड़ी और ताजा खबरें यहां पढ़ें...
मुख्य खबर
मुख्य खबर

The Public Pahuch
FOLLOW
ADVERTISEMENT
#हेल्थ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
#हेल्थ लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 24 अगस्त 2026

महाराष्ट्र के अमरावती हॉस्पिटल में लगी आग, 3 नवजात बच्चों की मौत; 36 नवजात बच्चों को रेस्क्यू किया गया

 
Three new born baby death

 अमरावती, महाराष्ट्र। 24 अगस्त 2026 को महाराष्ट्र के अमरावती हॉस्पिटल NICU में आग लगने से 3 नवजात बच्चों ने अपनी जिन्दगी की शुरूवात करने से पहले आग चपेट में आकर अपनी जिंदगी से हार गए और दर्दनाक मौत हो गई। इसके साथ ये भी कहना गलत नहीं होगा कि 3 नवजात जिंदगियां इस सिस्टम से हर गई। शायद ये नवजात बच्चों ने अपनी मां का  चेहरा भी अच्छे से नही देखा होगा। इस भीषण आग ने 3 बच्चों की जिंदगी छीन ली जबकि 36 नवजात बच्चों को इसी हॉस्पिटल से सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस घटना ने लोगों के दिल को दहला दिया।

अधिकारियों की रिपोर्ट के अनुसार, अमरावती district women's हॉस्पिटल के NICU के ऑउटबोर्न बेबी सेक्शन में सुबह 3:15 मिनट पर एक वेंटीलेटर में आग लगने की वजह से विस्फोटक धमाका हुआ और आग चारों तरफ फैल गई। वार्ड में महजूद डॉक्टर्स और नर्स ने 6 बच्चों को वहां से निकाला और 3 बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। जिन बच्चों की हालत गंभीर है उनको सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। हॉस्पिटल में देखभाल के लिए वार्ड में 3 सेक्शन है जिनमें कुल 39 बच्चे थे।

आग लगने के कारणों पर अभी जांच की जा रही है। पुलिस और हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन इन कारणों पर जांच कर रहा है। आग वेंटिलेटर से लगी या इसका कोई दूसरा कारण हो सकता है। क्या समय पर जांच होती थी?  इसका जिम्मेदार कौन है? हॉस्पिटल सारे मानक सेफ्टी के अनुसार चल रहा था ? क्या तकनीकी खराबी का अंदाजा पहले से नहीं लगाया गया। क्या वहां अग्निशामक यन्त्र नहीं लगे थे। जिससे बच्चों को बचाया जा सके। इस बात पता लगाने के लिए पुलिस आगे की कार्यवाही कर रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा बच्चों की मौत धुएं और दम घुटने की वजह से हुई है। कुछ बच्चे आग की तेज लपटों की वजह झुलस गए हैं जिनके बेहतर इलाज के लिए नजदीकी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में रेफर किया गया है। क्या इन नवजात बच्चों की जिंदगियों की इतनी कीमत नहीं है जो हम एक अच्छी व्यवस्था मुहैया करवा सकें। महाराष्ट्र के CM देवेंद्र फडणवीस ने इस हादसे पर दुख जताते हुए  उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है उनको 5 लाख आर्थिक सहायता करने का आश्वासन दिया है।

जिन परिवारों अपने बच्चों को खोया है उनकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है। हम क्या ऐसे हादसे होने का इंतजार करते हैं। जब हादसे होंगे उसके बाद से प्रशासन अलर्ट होगा। हादसा होने से पहले नियमित सुरक्षा मानकों की जांच हो सकती है। ऐसे हादसे बहुत दुखद होते हैं जिनमें लोग सिस्टम से हार जाते हैं।



शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

पान मसाला के पैकेजिंग में अब नहीं चलेगी प्लास्टिक! Fassi ने बदले नियम

   

Fassi ने बैन किया प्लास्टिक पैकेजिंग पान मसाला

7अगस्त 2026 को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Fassi)  ने पान मसाला कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं। Fassi ने कहा अब कोई पान मसाला पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक, एल्यूमिनियम फॉयल और मे मेटालाइज्ड लेयर का प्रयोग करने पर सख्त रोक लगाई है।  इसके रिप्लेसमेंट में पान मसाला पैकेजिंग  पेपर, पेपरबोर्ड, टिन या ग्लास विकल्पों को लगाने की छूट है। इसका कहना है कि प्लास्टिक के प्रयोग को रोकना है और इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रभाव को कम करना है। 

  इसका क्या प्रभाव पड़ेगा कंज्यूमर और फैक्ट्रियों पर आने वाले समय में पता चलेगा।सम्भावित अनुमान के अनुसार कंपनियां पैकिंग की वजह से पान मसाला का प्राइस बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर कंज्यूमर्स पर पड़ सकता है। इसकी भरपाई ग्राहकों की पॉकेट से की जाएगी। पान मसाला से बने उत्पादों पर कोई रोक नहीं लगाई गई । पान मसाला की पैकेजिंग पर रोक लगाई गई है।

  Fssai ने निर्देश दिया कि स्कूलों से 100 मीटर दायरे में कोई पान मसाला और जंक फूड्स की दुकान नहीं होनी चाहिए। बच्चे जंक्स फूड खाकर बीमार पड़ रहे हैं।

कर्नाटक ने एक साल के लिए बैन किया गुटका, टुबैको और निकोटीन

कर्नाटक में कमिश्नर फूड ऑफ सेफ्टी कर्नाटक की ओर से हाल ही में एक आदेश जारी किया लेकिन इसमें सभी पान मसाला शामिल नही है।जिसमें गुटका, टुबैको और निकोटीन से बने उत्पादों पर एक साल तक रोक लगाने की बात कही है।जिसमें इन उत्पादों को बनाने, बेचने और लाने ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।जिससे ड्रग्स गुटका टुबैको और निकोटीन पर रोक लगाई जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य गुटका और निकोटीन से बने उत्पादों पर रोक लगाना है। युवा लगातार ड्रग्स का आदी होता जा रहा है। एक बड़ी संख्या में युवा टोबैको और निकोटीन से प्रभावित हैं।

  इसमें स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है केवल एक साल के लिए बैन किया गया है। कर्नाटक में यह एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।


गुरुवार, 6 अगस्त 2026

तुकाराम मुंडे की FDA की कार्यवाही पर Bombay High Court सख्त और अगले दिन कोर्ट की canteen पर लगा ताला


  यह मामला करीब 3 हफ्ते पहले का है। जब महाराष्ट्र के FDA (food and drugs administration)  department के IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने प्राइवेट बड़े बड़े होटलों ,रेस्टोरेंट और कैंटीनों में छापा मारा और बंद कर दिया। ये सारे होटल,  FASSI के मानक नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इस समय मुम्बई की पुलिस से ज्यादा FDA की चर्चा हो रही है और इन्हें महाराष्ट्र FDA का सिंघम कहा जा रहा है। FDA जो खाने का सामान और ड्रग्स की गुणवत्ता की देखभाल करता।

  देश में लगातार बढ़ रहे मिलावटी पनीर ,दूध से बने उत्पादों पर रोक लगाना। इसके अलावा रेस्टोरेंट, हॉटल, कैंटीन और बेकरी जो भी खाद्य सुरक्षा मानक नियमों का पालन नहीं कर रहा उसके लाइसेंस को रद्द किया जा रहा है इसी क्रम में उन्होंने ने मुम्बई के बड़े जाने माने कैंटीन,होटल और रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुम्बई में 6 होटेल्स, रेस्तरां , बेकरी और क्लब्स का लाइसेंस निलंबित कर दिया है इसी तरह अलग अलग जगहों पर छापा मारा और लाइसेंस निलंबित कर दिया। कुछ का तो कैंसिल ही कर दिया। स्कूल ,कॉलेज से दूर लगभग 50 मीटर दूरी पर गुटका पान मसाला की दुकान होनी चाहिए।

   कुछ लोग जिनके लाइसेंस बंद या निलंबित हुए कोर्ट पहुंच गए जिसकी सुनवाई 2 अगस्त को हुई।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि प्राईवेट होटल और रेस्टोरेंट को टारगेट करके बंद किया जा रहा है।कोर्ट का कहना था कि प्राइवेट और सरकारी रेस्टोरेंट और होटल के लिए अलग नियम है। कुछ लोगों की दलील है कि बिना नोटिस दिए रेस्टोरेंट को बंद कर दिया गया।इससे पहले सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इसके अगले ही दिन IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे अपने आला ऑफिसरों के साथ बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे और वहां कैंटीन में छापा मारा और ये कैंटीन खाद्य सुरक्षा मानक नियमों पर खरे नहीं उतरे और उनको सील कर दिया। इसके लिए बड़ा जिगरा होना चाहिए। इसके पहले ये हेल्थ डिपार्टमेंट में थे वहां भी डॉक्टर और नर्स सब समय पर पहुंच जाते थे। ये जहां भी जाते अपनी छाप छोड़ देते हैं।

  ये 2005 बैच के IAS अधिकारी है जो महाराष्ट्र के कैडर जिले बीड से एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। इनकी UPSC all India rank 20 थी। ये अपने कार्यकाल 21 वर्षों में अब तक 25 बार ट्रांसफर (तबादला) हो चुका है। हो सकता ये अपने पूरे कार्यकाल में हॉफ सेंच्युरी पार कर दें। जाहिर सी बात है इनकी मंत्री मिनिस्टर से साठ गांठ नहीं होगी और अपने वसूलों के प्रति ईमानदार होंगे।तभी तो इतने ट्रांसफर हुए।

  इनके जैसे IAS अधिकारी देश के हर जिले में होते तो हमारा देश और भी तरक्की करता । 

CJP ने 48 घंटे का दिया Altimatem CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे! राहुल गांधी लगातार हमलावर बीजेपी और चुनाव आयोग पर

    चुनाव आयोग की सच्चाई सामने आने के बाद देश भर में राजनीतिक पारा बढ़ गया है। विपक्ष पूरी तरह से बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हो गया है।...