घरेलू बाजार में 1अगस्त से लगातार चीनी के मूल्यों बढ़ोत्तरी देखी गई है। चीनी के खुदरा मूल्यों में लगभग 20% वृद्धि देखी गईं है और इससे पहले चीनी की कीमत 42 रुपए प्रति kg थी। अब वह बढ़कर 60-65 /केजी घरेलू बाजार में हो गई है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इससे आने वाले समय चीनी किल्लत और बढ़ सकती क्योंकि त्यौहारों पर भी इसका असर पड़ेगा। रक्षाबंधन, दशहरा और दिवाली जैसे त्यौहारों पर चीनी की खपत बढ़ जाती है। इससे चीनी के मूल्यों वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है और आने वाले समय में चीनी के मूल्यों में उछाल देखने को मिल सकती है।
चीनी से बने अन्य उत्पादों के मूल्यों पर भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। चीनी का मूल्य बढ़ने के कई कारण बताए जा रहे हैं। गन्ने की फसल के अनुसार बारिश न होना जिससे फसल की पैदावार में कमी। रिपोर्ट के अनुसार चीनी बनाने के लिए गन्ने की खपत का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपत किया जा रहा है। DFPD के अनुसार 2024-25 में करीब 34 लाख टन चीनी बनाने के बराबर का हिस्सा एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया गया है। ISMA के अनुसार 2025-26 में 50 लाख टन चीनी बनाने के बराबर एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट का अनुमान है।
लगातार चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने, सरकार ने इस पर नियंत्रण रखने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को आयात करने की अनुमति दी है। जिससे बाजार में बढ़ती हुई कीमतों पर नियंत्रण किया जा सके। इसके साथ सरकार उन कारोबारियों पर नजर बनाए हुए है जो खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक लगा लेते हैं। 1सितंबर से 30 नवम्बर तक उपभोक्ता बल्क में 10 मीट्रिक टन चीनी अधिकतम 15 दिनों के लिए रख सकेंगे।
चीनी के मूल्यों में उछाल से एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित होता है और उनपर इसका सीधा असर पड़ता है। चीनी की कीमत में वृद्धि होने के साथ ही चीनी से बने अन्य उत्पादों के मूल्यों में भी वृद्धि देखने को मिली है। एक लंबे अरसे के बाद चीनी के मूल्यों में उछाल देखने को मिला है।






