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शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

चीनी के दामों में तेजी से उछाल: आम लोगों पर पड़ रहा इसका सीधा असर

 

लगातार चीनी के मूल्यों में हो रही वृद्धि

घरेलू बाजार में 1अगस्त से लगातार चीनी के मूल्यों बढ़ोत्तरी देखी गई है। चीनी के खुदरा मूल्यों में लगभग 20% वृद्धि देखी  गईं है और इससे पहले चीनी की कीमत 42 रुपए प्रति kg थी। अब वह बढ़कर 60-65 /केजी घरेलू बाजार में हो गई है। इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई और उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। इससे आने वाले समय चीनी किल्लत और बढ़ सकती क्योंकि त्यौहारों पर भी इसका असर पड़ेगा। रक्षाबंधन, दशहरा और दिवाली जैसे त्यौहारों पर चीनी की खपत बढ़ जाती है। इससे चीनी के मूल्यों वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाती है और आने वाले समय में चीनी के मूल्यों में उछाल देखने को मिल सकती है।

चीनी से बने अन्य उत्पादों के मूल्यों पर भी बढ़ोत्तरी हो सकती है। चीनी का मूल्य बढ़ने के कई कारण बताए जा रहे हैं। गन्ने की फसल के अनुसार बारिश न होना जिससे फसल की पैदावार में कमी। रिपोर्ट के अनुसार चीनी बनाने के लिए गन्ने की खपत का एक बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में खपत किया जा रहा है। DFPD के अनुसार 2024-25 में करीब 34 लाख टन चीनी बनाने के बराबर का हिस्सा एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट किया गया है। ISMA के अनुसार 2025-26 में 50 लाख टन चीनी बनाने के बराबर एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट का अनुमान है।

लगातार चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने, सरकार ने इस पर नियंत्रण रखने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी को आयात करने की अनुमति दी है। जिससे बाजार में बढ़ती हुई कीमतों पर नियंत्रण किया जा सके। इसके  साथ सरकार उन कारोबारियों पर नजर बनाए हुए है जो खपत से ज्यादा चीनी का स्टॉक लगा लेते हैं। 1सितंबर से 30 नवम्बर तक उपभोक्ता बल्क में 10 मीट्रिक टन चीनी अधिकतम 15 दिनों के लिए रख सकेंगे।

चीनी के मूल्यों में उछाल से एक बड़ा वर्ग इससे प्रभावित होता है और उनपर इसका सीधा असर पड़ता है। चीनी की कीमत में वृद्धि होने के साथ ही चीनी से बने अन्य उत्पादों के मूल्यों में भी वृद्धि देखने को मिली है। एक लंबे अरसे के बाद चीनी के मूल्यों में उछाल देखने को मिला है।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

पान मसाला के पैकेजिंग में अब नहीं चलेगी प्लास्टिक! Fassi ने बदले नियम

   

Fassi ने बैन किया प्लास्टिक पैकेजिंग पान मसाला

7अगस्त 2026 को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (Fassi)  ने पान मसाला कंपनियों को सख्त निर्देश दिए हैं। Fassi ने कहा अब कोई पान मसाला पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक, एल्यूमिनियम फॉयल और मे मेटालाइज्ड लेयर का प्रयोग करने पर सख्त रोक लगाई है।  इसके रिप्लेसमेंट में पान मसाला पैकेजिंग  पेपर, पेपरबोर्ड, टिन या ग्लास विकल्पों को लगाने की छूट है। इसका कहना है कि प्लास्टिक के प्रयोग को रोकना है और इससे पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रभाव को कम करना है। 

  इसका क्या प्रभाव पड़ेगा कंज्यूमर और फैक्ट्रियों पर आने वाले समय में पता चलेगा।सम्भावित अनुमान के अनुसार कंपनियां पैकिंग की वजह से पान मसाला का प्राइस बढ़ा सकती है। इसका सीधा असर कंज्यूमर्स पर पड़ सकता है। इसकी भरपाई ग्राहकों की पॉकेट से की जाएगी। पान मसाला से बने उत्पादों पर कोई रोक नहीं लगाई गई । पान मसाला की पैकेजिंग पर रोक लगाई गई है।

  Fssai ने निर्देश दिया कि स्कूलों से 100 मीटर दायरे में कोई पान मसाला और जंक फूड्स की दुकान नहीं होनी चाहिए। बच्चे जंक्स फूड खाकर बीमार पड़ रहे हैं।

कर्नाटक ने एक साल के लिए बैन किया गुटका, टुबैको और निकोटीन

कर्नाटक में कमिश्नर फूड ऑफ सेफ्टी कर्नाटक की ओर से हाल ही में एक आदेश जारी किया लेकिन इसमें सभी पान मसाला शामिल नही है।जिसमें गुटका, टुबैको और निकोटीन से बने उत्पादों पर एक साल तक रोक लगाने की बात कही है।जिसमें इन उत्पादों को बनाने, बेचने और लाने ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।जिससे ड्रग्स गुटका टुबैको और निकोटीन पर रोक लगाई जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य गुटका और निकोटीन से बने उत्पादों पर रोक लगाना है। युवा लगातार ड्रग्स का आदी होता जा रहा है। एक बड़ी संख्या में युवा टोबैको और निकोटीन से प्रभावित हैं।

  इसमें स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है केवल एक साल के लिए बैन किया गया है। कर्नाटक में यह एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।


शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

क्या UPI से ट्रांजेक्शन करने पर लग सकता है चार्ज सरकार ने लोकसभा में पेश किया बिल

   


सरकार ने लोकसभा में ऐसा बिल पेश किया है जिसमें होने वाले यूपीआई के ट्रांजेक्शन सहित ई पेमेंट्स पर चार्ज लगाने के  संभवतः नए रास्ते खुल सकते हैं। यह चार्ज मर्चेंट डिस्काउंट रेट MDR के रूप में लगा सकेंगे। अभी UPI से MDR पेमेंट करने पर चर्चा नहीं लगता। अभी सरकार की तरफ साफ नहीं किया गया है कि MDR पेमेंट पर कितना चार्ज और कब लगेगा। अभी यह एक कानूनी प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया है। आने वाले समय में तय होगा किस पर कितना चार्ज लगेगा। UPI सहित किन डिजिटल MDR पेमेंट करने पर यह चार्ज लगेगा या नहीं अभी इसका न ही शुल्क तय हुआ है और न ही इसकी कोई तारीख तय हुई है। 

  बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली इकाइयां डिजिटल ट्रांजेक्शन के बदले में कारोबारियों से फीस लेती हैं उसे MDR कहते हैं। मर्चेट डिस्काउंट रेट MDR केवल डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगता है। UPI से ट्रांजेक्शन करने पर यह चार्ज नहीं लगता है।

लेकिन उपभोक्ता को नही देना होगा चार्ज 

     मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कारोबारी किसी कस्टमर से MDR नहीं ले सकता, इसलिए UPI पेमेंट पर MDR लगने पर भी कस्टमर से इसे नही लिया जा सकेगा। यह केवल कारोबारियों पर लगेगा। आने वाले समय में तय होगा कितना चार्ज और कब देना होगा। अभीतक रिपोर्ट के अनुसार यह साफ नहीं किया गया है कि यह किस प्रकार के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लगेगा या नहीं और आम लोगों के UPI ट्रांजेक्शन पर कोई बात नहीं की गई है।

MDR लागू हुआ तो क्या बदलेगा

 फिलहाल सरकार ने इस पर कोई ऐसी बात नहीं की है कि यह कब लागू होगा या नहीं।यह विधेयक केवल अभी लोकसभा में पेश किया है। इस बिल से भविष्य में डिजिटल ट्रांजेक्शन करने पर MDR लग सकता है।  सरकार अगर आगे तय करेगी है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन पर कारोबारियों को कितना बिल देना होगा।अभी यह बिल लागू नहीं है और न ही इसकी कोई तारीख तय है। मौजूदा नियमों के अनुसार यह चार्ज आम लोगों के लिए नही है। सरकार का कहना है इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप टिकाऊ बनाने में सहायता मिल सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह चार्ज बड़े कारोबारियों और उच्च संस्थानो के  2000 से ज्यादा लेनदेन पर लागू होगा। यही पर बात करे आम लोगों और आम कस्टमर, छोटे मोटे दुकानदारों को इस चार्ज से छूट मिलेगी। इनको 2000 से ज्यादा लेनदेन करने पर चार्ज नहीं लगेगा।

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

तुकाराम मुंडे की FDA की कार्यवाही पर Bombay High Court सख्त और अगले दिन कोर्ट की canteen पर लगा ताला


  यह मामला करीब 3 हफ्ते पहले का है। जब महाराष्ट्र के FDA (food and drugs administration)  department के IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने प्राइवेट बड़े बड़े होटलों ,रेस्टोरेंट और कैंटीनों में छापा मारा और बंद कर दिया। ये सारे होटल,  FASSI के मानक नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इस समय मुम्बई की पुलिस से ज्यादा FDA की चर्चा हो रही है और इन्हें महाराष्ट्र FDA का सिंघम कहा जा रहा है। FDA जो खाने का सामान और ड्रग्स की गुणवत्ता की देखभाल करता।

  देश में लगातार बढ़ रहे मिलावटी पनीर ,दूध से बने उत्पादों पर रोक लगाना। इसके अलावा रेस्टोरेंट, हॉटल, कैंटीन और बेकरी जो भी खाद्य सुरक्षा मानक नियमों का पालन नहीं कर रहा उसके लाइसेंस को रद्द किया जा रहा है इसी क्रम में उन्होंने ने मुम्बई के बड़े जाने माने कैंटीन,होटल और रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुम्बई में 6 होटेल्स, रेस्तरां , बेकरी और क्लब्स का लाइसेंस निलंबित कर दिया है इसी तरह अलग अलग जगहों पर छापा मारा और लाइसेंस निलंबित कर दिया। कुछ का तो कैंसिल ही कर दिया। स्कूल ,कॉलेज से दूर लगभग 50 मीटर दूरी पर गुटका पान मसाला की दुकान होनी चाहिए।

   कुछ लोग जिनके लाइसेंस बंद या निलंबित हुए कोर्ट पहुंच गए जिसकी सुनवाई 2 अगस्त को हुई।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि प्राईवेट होटल और रेस्टोरेंट को टारगेट करके बंद किया जा रहा है।कोर्ट का कहना था कि प्राइवेट और सरकारी रेस्टोरेंट और होटल के लिए अलग नियम है। कुछ लोगों की दलील है कि बिना नोटिस दिए रेस्टोरेंट को बंद कर दिया गया।इससे पहले सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इसके अगले ही दिन IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे अपने आला ऑफिसरों के साथ बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे और वहां कैंटीन में छापा मारा और ये कैंटीन खाद्य सुरक्षा मानक नियमों पर खरे नहीं उतरे और उनको सील कर दिया। इसके लिए बड़ा जिगरा होना चाहिए। इसके पहले ये हेल्थ डिपार्टमेंट में थे वहां भी डॉक्टर और नर्स सब समय पर पहुंच जाते थे। ये जहां भी जाते अपनी छाप छोड़ देते हैं।

  ये 2005 बैच के IAS अधिकारी है जो महाराष्ट्र के कैडर जिले बीड से एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। इनकी UPSC all India rank 20 थी। ये अपने कार्यकाल 21 वर्षों में अब तक 25 बार ट्रांसफर (तबादला) हो चुका है। हो सकता ये अपने पूरे कार्यकाल में हॉफ सेंच्युरी पार कर दें। जाहिर सी बात है इनकी मंत्री मिनिस्टर से साठ गांठ नहीं होगी और अपने वसूलों के प्रति ईमानदार होंगे।तभी तो इतने ट्रांसफर हुए।

  इनके जैसे IAS अधिकारी देश के हर जिले में होते तो हमारा देश और भी तरक्की करता । 

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

Company ILGIM Electronic Chip Factory of a unit Gretor Noida में लगी भीषण आग और कई दमकल कर्मी हुए घायल

   


सोमवार देर रात ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कंपनी ILGIM जो इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाती है उसकी एक यूनिट PCB में भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां वहां पहुंची और बचाव कार्य में लग गए। छह दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंची आग बहुत तेजी फैल रही थी लेकिन अचानक एक दीवार और लोहे का बीम गिर गया।

   पुलिस ने बताया दीवार और लोहे का बीम के गिरने से दो दमकल कर्मियों की जान चली गई है। जिसमें चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव। तीन दमकलकर्मी इसमें घायल हुए हैं चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार और फायरमैन अमित कुमार गंभीर रूप से घायल है और हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

 पांच दमकल कर्मी घायल हुए और उनको जल्दबाजी में हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां डॉक्टर्स देखते  ही बता दिया दो लोग मर चुके हैं और तीन लोगों की हालत अब खतरे से बाहर है पुलिस ने कहा।

सोमवार, 3 अगस्त 2026

Illigal tariffs को लेकर America में trump को झटका 25 States ने किया Case

     


अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई सालों से अपनी मनमर्जी के मुताबिक illigal टैरिफ किसी भी देश पर लगा रहे हैं।अभी हाल के ही दिनों में चीन, भारत समेत और कई देश थे, जिनपर आयात टैरिफ 100% लगाया और इसके लिए बकायदा एक कानून भी पास करवा दिया। जो देश अपना उत्पाद अमेरिका भेज रहे थे और जिनपर पहले आयात टैरिफ 10 से 12% था। अब ट्रंप अपने ही देश में लोग ट्रंप को बेनकाब कर रहे हैं और इस टैरिफ को अवैध बता रहे हैं। अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। इन राज्यों में शामिल भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर लगे टैरिफ अवैध बताया गया है। इन राज्यों की मांग है कि टैरिफ को अभी रोका जाय और सारा अवैध टैरिफ का पैसा वापस किया जाय।

  राज्यों के अनुसार ट्रंप ने पिछले महीने में भारत समेत 59 यूरोपीय संघ देशों पर अपने मनमाने ढंग से टैरिफ लगाया था। जब से यह अपने दूसरे कार्यकाल में आया है तब से कुछ भी करता और बोलता रहता है।

  न्यूयॉर्क की एटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को अवैध बताया है। उन्होंने ने कहा कि इससे अमेरिका में बिज़नेस परिवारों का बोझ बढ़ेगा। पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर इस टैक्स को लगाया था। लेकिन बाद में विवाद होने पर कोर्ट ने ट्रंप से कहा था यह अधिकार तुमको किसने दिया है और अपने मनमाने ढंग से टैरिफ नही लगा सकते हालांकि बाद में पैसे भी वापस करने पड़े थे। अमेरिका में ऐसे टैरिफ वहां की कांग्रेस द्वारा लगाए जा सकते हैं।

   ट्रंप सरकार ने अपनी भरपाई पूरी करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974, सेक्शन 301 का इस्तेमाल किया है। इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं  और जबरन श्रम को रोकने में असफल रहे देशों पर 10 से 12% टैरिफ लगाया गया। इस ट्रंप सरकार ने इसको वैध बताया और इस पर उन्होंने ने कहा यह अमेरिकी श्रमिकों और व्यापार बचाने के लिए जरूरी है।एक बात साफ है अमेरिका अपने फायदे के लिए कुछ भी करता है।

   

बुधवार, 29 जुलाई 2026

भारत, चीन पर US का लगेगा 100% टैरिफ रूस को आर्थिक रूप से घेरने की तैयारी।

US Russia sanction Bill 2026 


रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच US ने रसिया को घेरने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिसमें US ने रसिया के खिलाफ सैंक्शन बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनाने के बाद भारत ,चीन  स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान  से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।  इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जो रूस से तेल गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों का आयात करते हैं।डोलांड ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
      यह महत्वपूर्ण विधेयक US के दिवंगत सीनेट लिंडसे ग्राहम ने बनाया था। अमेरिका कैपिटल हिल जहां यह वोटिंग हो रही थी वहां जेलेंस्की भी महजूद रहे, यह एक दिलचस्प बात है। इस विधेयक के समर्थन में 86% सीनेटर्स  ने वोटिंग की जबकि इसके विरोध में 12%  वोट पड़े। इस विधेयक  का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना। जिससे  उन देशों को किसी तरह से रूस से दूर किया जा सके जिनके रूस की साथ अच्छे रिश्ते हैं।
    अमेरिका के 100% टैरिफ से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ है जबकि वही चीन पर 12.5% टैरिफ है। यदि 100% टैरिफ लग जाती है तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर दोगुनी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। इस विधेयक को डोलांड ट्रंप ने हरी झंडी दिखा दी है।
   विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय निर्यात में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।

   यह टैरिफ इस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और पहले से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मार्ग बाधित। जिससे तेल गैस की आवाजाही ठप हो गई है।

   पहले भारत अपने जरूरतों का 40% तेल गैस इन्हीं खड़ी देशों से पूरा करता था जब अंतर्राष्ट्रीय जलडमरू मध्य में आवाजाही बाधित है। जिसके कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है ।

   सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल  के अनुसार हालांकि इस विधेयक में कुछ राहत दी गई है।इसमें यह छूट उन देशों को मिलेगी जो देश रूस के कुल तेल का 15% खरीदेगा ।

       

CJP ने 48 घंटे का दिया Altimatem CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे! राहुल गांधी लगातार हमलावर बीजेपी और चुनाव आयोग पर

    चुनाव आयोग की सच्चाई सामने आने के बाद देश भर में राजनीतिक पारा बढ़ गया है। विपक्ष पूरी तरह से बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हो गया है।...