BRICS के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए रुस के राष्ट्रपति पुतिन नई दिल्ली पहुंचे। सम्मेलन होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। 2030 तक 100 अरब डालर तक पहुंचाने पर जोर दिया गया है
नई दिल्ली 11 सितंबर 2026 को पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत हुई। जिसमें रक्षा, व्यापार और ऊर्जा जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। यह ब्रिक्स का 18वाँ शिखर सम्मेलन। और भारत में होने वाला चौथा सम्मेलन है। जिसमें दुनिया की कई शक्तियां पहुंची। इसी क्रम में भारत और रूस के बीच राजनीतिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया। लंबे समय से भारत और रूस विशेष और विशेषाधिकारों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। जिसमें आर्थिक सहयोग को मजबूर करने पर जोर दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार भारत रूस के बीच द्विपक्षीय बातचीत में 2030 तक 100 अरब डालर के व्यापार में साझेदारी पर बातचीत हुई। शुक्रवार को नई दिल्ली में रूस की तरफ से डिफेंस सेक्टर में कई महत्वपूर्ण ऑफर दिए गए। सुखोई -57 लड़ाकू जहाज का भी प्रस्ताव मिला। इसके साथ ही रूस ने ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी की बात की है और साथ में मिलकर बनाने की भी बात की है। इससे पहले भी रूस भारत को कई तरह डिफेंस सिस्टम दिए हैं। जिसमें S 400 कई वेपन्स दे चुका है और साथ में S- 500 वायु रक्षा प्रणाली की देने बात हुई है।
इसके साथ ही रूस ने उर्वरक आपूर्ति को लेकर भी कहा है। जिससे कृषि क्षेत्रों में फसलों उत्पादकता बढ़ा सके। किसानों को उर्वरक से होने वाली समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है। जिससे कृषि क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी को बढ़वा मिल सके। परमाणु कार्यक्रमों में सहयोग और ऊर्जा संबंधित विषयों पर चर्चा हुई। रूस लंबे समय से भारत के रक्षा , ऊर्जा, परमाणु कार्यक्रमों और कृषि क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं पर साथ देते आ रहा है। भारत झुकाव सुरक्षा संबंधित विषयों में रूस की ओर रहा है।
एक फिर अमेरिका के राष्ट्रपति डोलांड ट्रंप की बेचैनी बढ़ सकती है। क्योंकि ब्रिक्स का उद्देश्य एक नई स्थानीय करेंसी को स्थापित करना है। जिससे डॉलर उसकी निर्भरता कम हो सके।भविष्य में डॉलर के बजाय ब्रिक्स द्वारा बनाई करेंसी में व्यापार हो सके। ट्रंप अपने मनमाने ढंग टैरिफ लगाते रहते हैं। इसके साथ ही आतंकवाद, रूस यूक्रेन युद्ध, ईरान इजरायल युद्ध वैश्विक संकट से निपटने और शांति कायम करने पर सहमति बनी और विश्व शांति का संदेश दिया गया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में विश्व बड़ी शक्तियां एक साथ और एक मंच पर दिखाई दी। ब्रिक्स के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष पहुंचे जैसे रूस, चीन, साउथ अफ्रीका, ईरान। ये सब विश्व की महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। भारत ने इन सभी राष्ट्राध्यक्षों का गर्मजोशी से स्वागत किया। ये तीनों शक्तियां दुनियां की राजनीतिक, आर्थिक, रणनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करने क्षमता रखती हैं।

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