भारत नई दिल्ली में इस समय ब्रिक्स का सम्मेलन चल रहा है। जिसमें ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत पहुंचे। जिनके बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़वा देने पर सहमति हुई। भारत में यह ब्रिक्स का 18वाँ सम्मेलन चल रहा। जिसमें देश दुनिया के अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
ब्रिक्स में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping भी भारत पहुंचे। जिनका गर्मजोशी के साथ स्वागत हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के प्रधानमंत्री Xi Jinping के साथ अहम मुलाकात हुई। जिसमें सीमावर्ती विवादों को लेकर भी बातचीत हुई। जो देश के अजाद होने के बाद से अभी तक चल रहा है और कई बार सैनिकों में झड़प हो चुकी है। 2020 में गलवावन में झड़प के भारत के 20 सैनिकों ने अपना बलिदान दिया जबकि चीन के 4 सैनिकों के जान गई थी।
चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में कुछ न कुछ करता रहता है। खासकर अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर। चीन ने तिब्बत के अपने क्षेत्र में 628 गांवों को बसाया है। इसमें से 75% तिब्बत के सामने हैं और 90% अरुणाचल प्रदेश के सामने हैं। इसमें कुछ बस्तियां ऐसे क्षेत्र में हैं जहां पर भारत और चीन के बीच सीमा का विवाद चल रहा है। इसके साथ ही ऐसा भी कहा जा रहा है कि चीन अरुणाचल प्रदेश में मवेशियों को चराने वाले मैदानों पर भी कब्जा कर रहा है और लोगों के आने जाने पर रोक लगा रहा है। सरकार इसको नहीं मान रही है और इसे निराधार बता रही है लेकिन इन बातों को दरकिनार भी नहीं किया जा सकता है।
The Indian express की रिपोर्ट, 4 और 6 सितंबर की छापी रिपोर्ट में इंडिया और चीन के बीच पहली बार हाई कमांडर लेवल बातचीत हुई। चीन इन क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति को दर्ज कराने के लिए अपने लोगों को वहां पर विस्थापित कर रहा है और उन क्षेत्रों के नाम बदलता रहता है। चीन LAC को भी नहीं मानता है। क्या प्रधानमंत्री मोदी जी इन मुद्दों पर चर्चा करेंगे और भविष्य में कोई हल निकल सकता है। चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत नए नए विवादों को जन्म देता रहता है।
Xi Jinping 7 साल बाद भारत में ब्रिक्स में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे। भारत चीन का सबसे बड़ा बाजार है। चीन के साथ भारत का घाटे का व्यापार है। लगभग 100 अरब डालर का अंतर है। 2025 में चीन भारत का व्यापार 155.6 अरब डालर तक पहुँच गया था।भारत चीन का सबसे बड़ा बाजार होने के बावजूद भी सीमावर्ती विवादों पर कोई नरमी नहीं दिखाता है। प्रधानमंत्री मोदी व्यापार को संतुलित करने की बात कर रहे हैं। प्रधानमंत्री जी आप चीन को कौन सा प्रोडक्ट भेज सकते हैं। चीन विश्व का सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर है। जब तक चीन जितना प्रोडक्शन नहीं होगा, तब तक व्यापार संतुलित नहीं होगा। भारत चाहता है कि चीन से आयात पर निर्भरता कम हो जिससे भारतीय कंपनियों को चीन के बाजार मे जगह मिले।







