दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में रविवार को 5 मंजिला इमारत ढह गई। 6 सितंबर 2026 को दोपहर में करीब 1:30 बजे यह घटना हुई है। जिसमें 7 लोगों की जान चली गई और 5 लोगों को रेस्क्यु कर निकला गया है।
यह घटना दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में रविवार को हुई है। यहां पर अधिकतर स्टूडेंट्स इन हॉस्टल और पीजी में रहते हैं। इस में इलाके में ज्यादातर पीजी और हॉस्टल की बिल्डिंग है। यह 5 मंजिला इमारत थी जिसके ढहने पर 6 लोगों की जान चली गई और एक लोग ने बाद में दम तोड़ दिया। कुल मिलाकर अबतक 7 लोगों की जान गई है।मौके पर पुलिस, फायर ब्रिगेड और एनडीआरएफ की टीम पहुंची। रेस्क्यु ऑपरेशन किया और मलबे में दबे 12 लोगों को निकाला गया है और अभियान अभी जारी है। जो गंभीर रूप से घायल हैं उनको इलाज के लिए हॉस्पिटल भेजा गया है। दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ट्रामा सेंटर पहुंची और घायलों के स्वास्थ्य का जायजा लिया।
रिपोर्ट के अनुसार यह बिल्डिंग लगभग 40-50 साल पुरानी है।जिसके बेसमेंट में मरम्मत का कार्य चल रहा था। उसी समय लगभग दोपहर 1:30 बजे इमारत ढह गई। इस इमारत में लगभग 15 कमरे है। हर एक कमरे में 2-3 स्टूडेंट्स रहते हैं और एक बेड का लगभग ₹1,2000 किराया है। यहां पर ज्यादातर केरल, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और यहां पर स्थित मोतीलाल नेहरू कॉलेज और श्री विश्वकर्मा कॉलेज के स्टूडेंट्स रहते हैं। इन मालिकों को भी पता है स्टूडेंट्स कहां जाएंगे और मनमाना किराया लेते हैं। सब स्टूडेंट्स तो कॉलेज हॉस्टल में रह नहीं सकते हैं।
जब कोई घटना हो जाती है और कई लोगों की जान चली जाती है। उसके बाद प्रशासन जागता। तब जांच के आदेश दिए जाते हैं और सारी एजेंसी एक्टिव होती है। यह कोई एक घटना नहीं है, चाहे लखनऊ हॉस्टल में आग लगे, नोएडा में लोग गड्ढे में गिरकर मर जायें या फिर दिल्ली में इमारत गिर जाये। क्या घटना होने का इंतजार किया जाता है। अब यही दिल्ली बिल्डिंग कॉलेप्स घटना के बाद हो रहा है। इमारत का ढांचा, लोकेशन और उसके मानकों की जांच की जा रही है जिसके आदेश पहले दिए जा चुके हैं। रिपोर्ट आएगी, नहीं भी आएगी कुछ समय के बाद प्रशासन और लोग भूल जाएंगे।
दिल्ली पुलिस ने हादसे के बाद भवन निर्माण की कथित लापरवाही के मामले में इमारत के मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। बिल्डिंग के मालिक हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया गया है और आगे जांच के आदेश दिये गए हैं। जांच यही तक सीमित नहीं है इसके बाद एमसीडी के कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है। जांच होने तक निलंबन जारी रहेगा।

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