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बुधवार, 2 सितंबर 2026

नेपाल में फ्लैश फ्लड की तबाही के बीच भारत की बड़ी मदद, 🇮🇳🇳🇵5 वां राहत विमान 5.5 टन दवाइयों के साथ रवाना

 

भारत का 5वां विमान 5.5 टन दवाइयों के साथ पहुंचा नेपाल

  नेपाल में 26 अगस्त को आए विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने नेपाल को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया है। लगातार बचाव अभियान चलाए जा रहे हैं। इसी बीच भारत ने नेपाल को राहत मदद सामग्री  और 5.5 टन दवाइयां भेजी हैं।

भारत की तरफ से लगातार नेपाल को राहत मदद सामग्री पहुंचाई जा रही है। 2 सितंबर को भारत का 5 वां  विमान रवाना हुआ। जिसने 11 सदस्यीय रेस्क्यु टीम स्पेशल इक्यूपमेंट के साथ और 5.5 टन दवाइयां पहुंचाई गई। एक्टरनल अफेयर्स मिनिस्टर जयशंकर प्रसाद ने यह जानकारी साझा की। इसके साथ ही नेपाल को अभी तक 68 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। भारत ,नेपाल को हर संभव मदद करने की कोशिश करता है। जब भी नेपाल किसी मुश्किल समय में होता है तो भारत अपनी तरफ से मदद भेजता है।

नेपाल इस समय अपने सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। लगातार जान मान की हानि हो रही है। मरने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। 2 सितंबर बुधवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है। जिसमें कम से कम 348 से ज्यादा लोगों के शवों को चितवन से, पूर्व नवलपरासी से 217, पश्चिम नवलपरासी से 190 और नवाकोट से 155 शवों को बरामद किया गया था। ठीक इसी प्रकार गोरखा से 66 शव, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहु से 38 शवों को बरामद किया गया था।

नेपाल पुलिस के अनुसार, अब तक फ्लैश फ्लूड में मरने वाले 1,113 लोगों के शवों को पोस्टमार्टम और जांच सारी प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। जिसमें 95 लोगों के शवों को उनके परिजनों को सौंपा गया है। अभी ऐसे 911 शव हैं जिनकी पहचान नहीं हो पाई है और नेपाल पुलिस के द्वारा इन लोगों की जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध कराई है जिससे उनके परिजनों को पहचानने में मदद मिल सके।

नेपाल की सिक्योरिटी फोर्सेस के द्वारा 6, 541लोगों को रेस्क्यु किया गया है। यह ओपरेशन लगातार चलाए जा रहे हैं और लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। पुलिस ने बताया अभी भी 4,858 लोग लापता हैं जिनकी तलाश की जा रही है। नेपाल पुलिस और रेस्क्यु टीम मिलकर ऑपरेशन चला रही हैं। नेपाल फ्लैश फ्लड में ऐसी ख़ौफनाक तस्वीरें सामने आ रही जो हर किसी के दिल को झकझोर दे रही हैं। 

भारत और नेपाल के सदियों पुराने और पारंपरिक रिश्ते रहे हैं। भारत और नेपाल सीमाएं खुली रहतीं हैं लोगों का जन संपर्क एक दूसरे से रहता है। इसके साथ ही सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक अच्छा संबंध रहा है। जून 2026 में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत का दौरा किया जिसमें उन्होंने भारत और नेपाल के विकास को लेकर समीक्षा की जिसमें ऊर्जा व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति जताई।


रविवार, 9 अगस्त 2026

भारत का स्वदेशी project kusha तैयार! दुश्मन के हवाई खतरों पर होगी पैनी नजर

Project kusha

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुश (Kusha) का किया गया सफल परीक्षण। भारत लगातार अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहा है। भारत ने ऐसा ब्रह्मास्त्र बनाया है जिसका लोहा पूरी दुनिया मान रही है। बहुत सारे देश इसे खरीदने के लिए कतार में खड़े हैं। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के बाद अब भारत अस्त्र बनाया है जो हवा से हवा में हमला करने के सक्षम है। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने 23 जुलाई 2026 को एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाने केलिए कुश सिस्टम के इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया गया है। प्रोजेक्ट कुश को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। जिसकी अलग अलग दूरी के इंटरसेप्टर है जिसमें 150 km, 250 km और 350 km की दूरी शामिल है। इसको DRDO ने बनाया है, यह इंटरसेप्टर मिसाइल long Range surface to air टारगेट करती है। इस मिसाइल का टारगेट ड्रोन, हवाई हमला,क्रूज मिसाइल और अन्य लक्ष्य हो सकते हैं।

  भारत ने अपने ही घर में तैयार किया लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली है जो धरती से जाकर आसमान में टारगेट को गिराने की क्षमता रखती है। प्रोजेक्ट कुश के परीक्षण के बाद दुनिया में इस प्रोजेक्ट की चर्चा तेज हो गई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल परीक्षण के बाद S 400 मिसाइल और इजराइल की बराक जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलों पर भारत की निर्भरता कम हुई है। चीनी मीडिया ने भी इसे कवर किया है। 23 जुलाई को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किये गए परीक्षण में कुश सिस्टम ने सिमुलेटेड हाई स्पीड और ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को इंटरसेप्ट किया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने कंट्रोल, कमांड, रडार और गाइडेंस सिस्टम को परखा गया। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइल है। ये मिसाइलें एयर स्पेस को सुरक्षा कवच देती हैं।

प्रोजेक्ट कुश क्रूज मिसाइल को करेगा ध्वस्त 

प्रोजेक्ट कुश को DRDO ने निजी और औद्योगिक क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य हमलों से देश को बचाएगा । यह प्रणाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मिशन सुदर्शन चक्र के तहत बहुस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा कवच प्रणाली में शामिल होगी। मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य 2035 तक रणनीतिक और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों, मिसाइलों, स्टील्थ फाइटर जेट  और प्रिसिजन गाइडेड जैसे वेपन्स के खतरों से बचने के बहुस्तरीय ढांचे को तैयार करने में, कुश को इसमें शामिल किया गया है जो इसकी सुरक्षा को और मजबूत करेगा और यह एक नई परत बनाकर देश की ताकत को बढ़ाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है प्रोजेक्ट कुश 

प्रोजेक्ट कुश भारत की सुरक्षा को मजबूत बनाएगा और आसमान में बाज की तरह पैनी नजर रखेगा। प्रोजेक्ट कुश में इसको बनाने की तीन तरह की प्लानिंग है। M 1 जिसकी स्पीड 150 km, M 2 जिसकी स्पीड 250 km और M 3 जिसकी स्पीड 350-400 km तक होगी। इसकी को खासियत है वही इसकी क्षमता को बढ़ाती है यह Long Range surface to air दुश्मन को निशाना बना सकती है। क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य लक्ष्यों को आसानी से इंटरसेप्ट कर सकती है। अब सुरक्षा हथियारों जैसे S 400 और बराक जैसी विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।

  भारत अपनी रणनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए लगातार डिफेंस क्षमता को मजबूत कर रहा। इसी क्रम भारत ने लगातार कई मिसाइलों का परीक्षण किया है  जिसमें अग्नि4 / agni-IV मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी क्षमता 4,000 km है।इसको कही भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मिसाइल को आसानी डिप्लॉय किया जा सकता है।


शनिवार, 8 अगस्त 2026

AI ने बनाया वायरस वैज्ञानिकों ने लैब में किया टेस्ट- क्या इंसानों के लिए होगा खतरा

 

AI virous related image

 AI ने अब वो कर दिखाया जो इससे पहले कभी किसी ने नहीं कर पाया। इससे AI की ताकत का अनुमान लगाया जा सकता और यह क्या कर सकता है।AI अब केवल चैट बोट, ऐप्स, वेबसाइट और आम कामों तक ही सीमित नहीं रहा। अब AI नए इनोवेशन में भी वैज्ञानिकों की सहायता कर रहा है। AI की ताकत से वैज्ञानिकों ने चमत्कार कर दिया है। अमेरिका की एक स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट में शोध कर रहे बैज्ञानिकों ने AI मॉडल की मदद से एक वायरस का DNA डिजाइन किया है। जो कभी प्रकृति में नहीं पाए गए हैं। बैज्ञानिकों ने ऐसा वायरस बनाया है जिसमें 16 बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता है। यह AI के क्षेत्र में बड़ी महान उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अच्छी बात यह है जो वायरस अभी वैज्ञानिकों ने AI की मदद से बनाया है वह वायरस इंसानों ,प्लांट और जानवरों को संक्रमित नहीं करेगा। यह रिसर्च बैक्टीरियोफेज पर आधारित है जो इंसानों को संक्रमित नहीं करता है।

किस तरह AI ने बनाया वायरस का DNA 

यदि हम इस रिसर्च के अनुसार बात करे तो इसमें वैज्ञानिकों ने Evo1 और Evo 2 नाम के दो AI मॉडल का प्रयोग किया गया। यह लगभग AI चैट बोट की तरह काम करता है। जैसे चैट gpt शब्द का अनुमान लगाता है ।इसी तरह Evo1 और Evo 2 मॉडल भी DNA की जेनेटिक संरचना का अनुमान लगाकर डिजाइन को तैयार करता है। इसी तरह वैज्ञानिकों ने पहले इस मॉडल को करोड़ों प्राकृतिक जीनोम तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया।ताकि हम इससे शुद्ध जीनोम तैयार कर सके। इसके बाद उन्हें &phi,'X174 और उससे जुड़े वायरस को देखा गया। आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस की मदद से हजारों संभावित बनाए गए डिजाइन बनाए गए जिसमें से केवल 300 डिजाइन को चुनकर लैब में DNA 🧬 बनाया गया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि पेट्री डिश में बैक्टीरिया के बीच क्लियर स्पॉट हैं यह एक संकेत है कि ये वायरस सक्रिय हैं और बैक्टीरिया को नष्ट कर रहे हैं।

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस से मेडिकल में होगी नई क्रांति 

वैज्ञानिकों की मदद से AI ने जो वायरस बनाया है इससे मेडिकल फील्ड में एक नई उपलब्धि मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है भविष्य में हम इन वायरस का इस्तेमाल उन बैक्टिरियल संक्रमण पर करेंगे जिस पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता है। अगर यह शोध सफल रहा तो दवा प्रतिरोधी संक्रमण के इलाज का नया रास्ता कुल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वायरस को इस तरह बनाया गया है जिससे इंसानों को कोई खतरा नहीं है। ऐसा कोई डेटा नहीं दिया गया है जिससे भविष्य मे कोई खतरा पैदा हो। भविष्य में आने वाली नई बीमारियों का इलाज किया जा सके और इनको रोका जा सके।

इस रिसर्च ने बढ़ाई इंसानो की चिंता 

इस रिसर्च ने एक नई बहस छेड़ दी है और इससे बायो सिक्योरिटी का खतरा बढ़ा है और इसका गलत प्रयोग होने की संभावना है।वैज्ञानिकों और आम लोगों का अलग अलग कहना है। इस रिसर्च ने मेडिकल फील्ड में एक महान उपलब्धि तो हासिल की है लेकिन भविष्य की चिंता बढ़ा दी है। जो AI इंसानों के मदद से वायरस बना सकता लेकिन भविष्य में इसी AI की मदद से ऐसे वायरस बनाए जा सकते हैं जो इंसानों, जानवरों और पेड़ों के लिए खतरा हो सकते हैं। कुछ सालों के बाद हमे सुनाई देगा इस वायरस से खतरनाक महामारी फैल रही है और इस देश की लैब में बनाया गया। अभी भी ऐसे वायरस लैब्स में महजूद है, सही समय आने पर इनका प्रयोग किया जाएगा और ऐसी रिसर्च सालों से चल रही हैं।

CJP ने 48 घंटे का दिया Altimatem CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे! राहुल गांधी लगातार हमलावर बीजेपी और चुनाव आयोग पर

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