The Public Pahuch

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।


लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

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