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मंगलवार, 22 सितंबर 2026

Bihar जिले के जमुई में नाबालिक लड़की के साथ, कुछ मनचलो ने किया छेड़छाड़ पुलिस ने किया गिरफ्तार , कुछ नेता इसे छोटी मोटी घटना बता रहे हैं जिस पर सियासी पारा चढ़ा

 

कुछ मनचलो ने किया नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी

 बिहार में 19 सितंबर को जमुई जिले में एक घटना सामने आई है। जिसमें कुछ मनचले लड़के नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी करते नजर आये।

बिहार में एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। यह घटना बिहार जिले के माडवा की है। जिसमें एक नाबालिक लड़की अपने दोस्त के साथ मड़वा पहाड़ी की ओर जा रहे थे। यह रास्ता सुनसान रहता है। जहां पर कुछ मनचलो ने लड़की के साथ उसके दोस्त को भी पीटा। जिसके बाद मनचलों ने लड़की के साथ छेड़छाड़ और बदसलूकी करते नजर आये। जिसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और मामला सामने आया। जो एक बार फिर महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं।

मामला सामने आने पर पुलिस ने FIR दर्ज किया और एक SIT (Special Investigation Team)टीम का गठन किया। पुलिस के अनुसार SIT टीम का गठन SDPO दीप्ति मोनाली की अगुवाई में किया गया। जिसका उद्देश्य मामले की जांच करना, आरोपियों की पहचान करना और डिजिटल डेटा को सुरक्षित करना है। प्रारंभिक कार्यवाही में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद एक मुख्य आरोपी नंदन यादव और एक अन्य को गिरफ्तार किया गया। पुलिस की मुठभेड़ में नंदन यादव के पैर में गोली लगी। जिसके बाद उसको हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। मुठभेड़ से जुड़े अन्य मामलों की जांच की जा रही है।

पुलिस के अनुसार POCSO Act और BNS की धाराओं में FIR दर्ज किया गया है। POCSO Act का उद्देश्य बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराधों को रोकना है। ऐसे होने वाले अपराधों की कानूनी कार्यवाही के लिए विशेष प्रावधान उपलब्ध कराना है। इस मामले में जांच एजेंसियां वीडियो, और इससे जुड़े दूसरे साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।

ऐसे वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करने को लेकर भी      पुलिस उन सोशल अकाउंट के खिलाफ FIR दर्ज कर रही है। ऐसे वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पीड़िता को अतिरिक्त मानहानि का नुकसान हो सकता है। उसकी पहचान सार्वजनिक हो सकती है। जिससे उसकी सुरक्षा का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे वीडियो पोस्ट करने पर पुलिस कार्यवाही कर सकती है।

जेडीयू के उमेश कुशवाहा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष हैं और  श्रावण कुमार बिहार सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री हैं। इसके बयानों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इनका कहना है ऐसी छिटपुट घटनाएं होती रहती हैं। छिटपुट घटनाएं होती रही हैं। दुनिया अपराधों से मुक्त नहीं है। कभी कभार ऐसी घटनाएं होती रही हैं। जिसके बाद दोषियों को सजा देने की बात कही। बिहार की मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने वीडियो दिखाए जा रहे हैं, जिसमें वो महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर बड़ी बड़ी बाते कर रहे हैं। लेकिन इसके उल्टा बिहार में मनचले एक नाबालिक लड़की के साथ बदसलूकी कर रहे हैं।

सोमवार, 21 सितंबर 2026

दिल्ली SIR जिसमें ECI ने वीवीआईपी लोगों को SIR जरिए भेजा नोटिस, क्या ECI इसके जरिए अपनी पारदर्शिता और निष्पक्षता को साबित रहा है

 

वीवीआईपी लोगों के नाम SIR जरिए भेजा गया नोटिस

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने कई वीवीआईपी के नामों को मतदाता सूची से बाहर किया। जिसमें देश की बड़ी हस्तियों के नाम शामिल हैं।

इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के दौरान देश की बड़ी हस्तियों के नाम मतदाता सूची से बाहर कर उनको नोटिस भेजा है। जिसमें पूर्व चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण, पूर्व राष्ट्रपति जगदीप धनकड़, सांसद बासुरी स्वराज, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेशमंत्री जयशंकर प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल, एडवोकेट कपिल सिब्बल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सहित कई और लोग शामिल हैं। इसमें से कई लोग बीजेपी और दूसरी पार्टियों के हैं जिनके नाम SIR में काटे गए हैं।

दिल्ली में 2002 के SIR और मौजूदा सूची के अनुसार करीब 1.45 करोड़ वोटर्स थे। घर घर जाकर फॉर्म भरवाया गया था। इसमें से 97.7 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त किए गए हैं और उनको डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित किया गया है।जिसमें से 47.7 लाख तक वोटर्स के नाम काटे गए हैं। 33 लाख मतदाताओं के फॉर्म में गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजा गया है। जिसमें नाम, पता और बेसिक जानकारी में गड़बड़ी पाई गई है। 

ECI एक अलग फॉर्मेट में SIR कर रहा है। जिसमें देश के वीवीआईपी लोगों को SIR के चलते गड़बड़ियों को लेकर नोटिस भेजा रहा है। जिसमें कुछ देश के बड़े लोग शामिल हैं। इन लोगों के नाम तो आसानी जुड़ जायेंगे, लेकिन उन 33 लाख मतदाताओं का क्या होगा। क्या वो समय पर अपना जुड़वां पाएंगे और समय पर आवश्यक दस्तावेज दे पाएंगे। क्या ये लोकतंत्र का मजाक उड़ाया जा रहा है। 

ECI को नहीं पता मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, विदेशमंत्री जयशंकर प्रसाद, पूर्व मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल और अन्य वीवीआईपी लोग कौन हैं। इन सबका नाम मतदाता सूची में न होने के बावजूद ये लोग चुनाव कैसे लड़े और देश के संवेदनशील पदों पर पहुंच गए। क्या इन वीवीआईपी नमो के पीछे कोई राजनीत हो रही है। ECI इन नामों को दिखाकर अपनी जिम्मेदारी और पारदर्शिता दिखा रहा है। इसके पीछे लाखों करोड़ों मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के जरिए कटा जा रहा है।

जिन 33 लाख मतदाताओं को नोटिस भेजा गया है, उनमें से 14 लाख मतदाताओं का डेटा 2002 के SIR से लिंक नहीं किया जा सका है। जिसके लिए आवश्यक दस्तावेजों को मांग गया है। जिसमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, जाति प्रमाण पत्र और स्थानीय निवास प्रमाण पत्र है। जो मतदान करने के पात्र हैं वो लोगों 30 सितंबर तक फॉर्म 6 के माध्यम से अपना नाम दुबारा आवश्यक दस्तावेजों के साथ दर्ज करवा सकते हैं।

दिल्ली में SIR की पारदर्शिता से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। Indian express की रिपोर्ट के अनुसार 22 सितंबर को इसकी सुनवाई है। 33 लाख याचिकाकर्ताओं की तरफ से कहा गया कि, मतदाताओं को नोटिस जारी करने का कारण सार्वजनिक किया जाय। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि लॉजिकल गलतियों और अन मैपिंग के आधार पर किस तरह मतदाताओं को जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। ECI का कहना है मौजूदा रिकॉर्ड की जांच और जानकारी सटीक बनाना है।



रविवार, 20 सितंबर 2026

Chatron ki goonj कार्यक्रम राहुल गांधी का एक मिशन, छात्रों का मंच

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी चुनाव

छात्राें की गूंज का कार्यक्रम राहुल गांधी का एक बड़ा मिशन है। जो लगातार चल रहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी इस मंच पर छात्रों से सीधा संपर्क करते हैं। उनकी समस्यों को उठाते और सुनते हैं। 

छात्रों की गूंज कार्यक्रम की शुरूवात 17 जून 2026 राजस्थान कोटा से हुई है। जिसका उद्देश्य छात्रों से मिलना, उनकी समस्यों को सुनना और उनकी आवाज को उठाना था। इस कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के जरिए हजारों लाखों छात्र राहुल गांधी से जुड़े। शुरुवाती दौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम बहुत प्रभावी नहीं रहा, लेकिन बाद में धीरे धीरे छात्र इस कार्यक्रम से जुड़ने लगे। कार्यक्रम को पूरे देश के छात्रों तक पहुंचाना है और इसी क्रम में राहुल गांधी एक के बाद एक कार्यक्रम कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार छात्रों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं। चाहे इंदौर हो या पुणे देश के अलग अलग राज्यों में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। देश हो या देश के बाहर छात्रों से मिल रहे हैं।

इससे पहले मैने नहीं देखा था कि राहुल गांधी इतना  कभी एक्टिव रहे हो।  राहुल गांधी इस कार्यक्रम में सरकार की नाकामियों की पोल खोल रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य या देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार एक्टिव हैं। छात्र उनके पास अपनी परेशानियों को लेकर जाते हैं। नीट पेपर लीक, इकॉनमी और मेडिकल सेक्टर जैसे दूसरे क्षेत्रों में सवाल उठा रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार हमलावर रहते हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार राहुल गांधी के कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है।

क्या राहुल गांधी इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं के दिल में अपनी जगह बना पाएंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव हारने के बाद चारों तरफ से सवालों से घिर गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी संगठन ने 4 में से 3 केंद्रीय पद जीते, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार दीपांश शौकीन ने जीता।NSUI का एक भी कैंडिडेट कोई चुनाव नहीं जीता। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा दीपांश शौकीन की हो रही है क्योंकि इससे पहले दीपांश शौकीन NSUI से जुड़े थे। क्या कन्हैया कुमार और कांग्रेस को पता नहीं था। जब कांग्रेस के पास ऐसे उम्मीदवार थे तो दूसरे को टिकट देने की क्या जरूरत थी। 

राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम तो लगातार कर रहे हैं। क्या वो इन कार्यक्रमों के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ बना पा रहे  हैं। चुनाव में हार के बाद कही न कही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है। इस चुनाव से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 

हालांकि राहुल गांधी इस समय काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और सरकार के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार उनपर प्रहार किया जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जिससे कई जगह पर उनको कामयाबी भी मिली है। 





शनिवार, 25 जुलाई 2026

Dharmendra प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। नीट paper leek

      जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन अब एक नया मोड़ ले लिया है। छात्रों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।  और अब उनकी मांगे समय के अनुसार बदलती जा रही हैं। प्रधानमंत्री रील बनाते जा रहे हैं। वो  कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की ,जिसमें आरोपी को दस साल तक सजा और दस करोड़ जुर्माने के लिए बिल पास करने की बात कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री जी की रील को लेकर युवाओं में नाराजगी देखी गई है।  आंदोलन का बड़ा होने का कारण सरकार है और अब तक उनकी मांगे मान ली  जाती।

   

Dharmendra Pradhan

   बहुत सारी अटकलों के चलते हुए इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को दे दिया है। इसी बीच उन्होंने बहुत सारी बातें का जिक्र किया।  उन्होंने ने कहा हम दो दशक से शिक्षा मंत्री के रूप में भारत की सेवा कर रहे थे। हम युवाओं की भावनाओं को मानते हैं। नीट यूजी में हुए  पेपर लीक के चलते अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।

   इसी बीच उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकते इसका लाभ उठाएं और ये हमारी जिम्मेदारी थी। हम इससे पीछे नहीं हट सकते हैं।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।

जंतर मंतर पर उमड़ी छात्रों की भीड़

लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

शनिवार, 23 मई 2026

Cacokroach News

सीजेपी आंदोलन जंतर मंतर पर छात्र जवाबदेही तय कर रहे हैं।

Cacokroach Janta party  यह कोई रियल पार्टी नहीं है।
इसका नाम GenZ या किसी दूसरे ने नही दिया है।यह नाम हमारे देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने दिया है। इतने बड़े पद पर होते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए कोकरोच शब्द का इस्तेमाल किया।  उनका दोष यह था कि, वो रोजगार मांग रहे थे, भ्रष्टचार,  VIP culture, neet paper leek,  ssc , scam , इन सबके खिलाफ अपनी आवाज ,अपनी मांगो को रख रहे हैं और शांतिपूर्वक, तो इसमें गलत क्या है। क्या एक लोकतांत्रिक देश में यही सब होता है, सरकार की खिलाफ बोलने पर  आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है।क्या ये लोकतांत्रिक देश के सरकारों के अधिकार होते हैं। 

एक ऑनलाइन वर्चुअल कैंपेन से डर गई। इससे आप मुद्दों को रोक नही सकते है,बल्कि लोगों का और ज्यादा आक्रोश बढ़ता है। आपको उनकी मांगों को सुनना चाहिए।इसके बजाय आप उन पर आप लाठियां बरसाते हो।ये कहां का न्याय है।भाई साहब ऐसा कौन करता है। सबका साथ सबका विकास बोलने वाले। जिन्हें NCERT का full form नही पता उन्हें एजूकेशन मिनिस्टर बना दिया जाता है।  जब तक लोगों को रोजगार नही दोगे तब तक देश कैसे आगे बढ़ेगा। आज भारत IMF की रैंकिंग में वर्ल्ड में 4th  से 6th नम्बर पर आ गया है। बात करते हैं हम विश्व गुरु बनने की। जाती धर्म, मंदिर मस्जिद, मुद्दों से
 हटकर बात करने वाले ये नेता देश को कभी आगे नहीं ले जा सकते हैं।  स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल ये सब बनाने का क्या फायदा , उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते।उनको हॉस्पिटल की जरूरत नहीं, उन्हें तो विदेशों में इलाज करवाना है।भाई तुम्हारे से फर्क पड़ता है और नहीं भी।  आज देख लो ऐसी कोई खाने वाली चीज नहीं बची है जिसमें मिलावट न हो, इन्ही चीजों को खाने से गंभीर बीमारियां हो रही है। किसी को कोई फर्क ही नही पड़ता है,FSSAI  (Food safety and standards Authority of India) आराम से सो रहा है। इन सब मुद्दों पर बात करने वाला देश द्रोही है। कितना ज्यादा खुलेआम कलर ग्रेडिएंट, एडेड शुगर और हानिकारक केमिकल को बेचा जा रहा है और हम खा भी रहे हैं। यह सब जिम्मेदारी किसकी है। और हम किससे पूछेंगे हमारे देश में बैठे सिस्टम के लोगों से या अमेरिका ,चीन  में बैठे सिस्टम के लोगों से।
 

ECI में SIR को लेकर मतभेद, दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीने में 14 बार दर्ज कराई औपचारिक आपत्तियां फिर भी नहीं हुई कोई कार्यवाही

    इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) में, मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार के काले कारनामों का खुलासा The Indian Express की रिपोर्ट में हुआ है। ज...