काकोरोच जनता पार्टी का आंदोलन करीब एक महीने से ज्यादा चला , सरकार को झुकना पड़ा। आज उन सभी युवाओं की जीत हुई, जो खराब शिक्षा व्यवस्था खिलाफ लड़ रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। इन युवाओं ने बता दिया कि देश हमारा है, और हम अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। जंतर मंतर का ऐसा नजारा था, कि शब्दों में बताना संभव नहीं है। उनकी अलग ही खुशी थी ,ऐसा लग रहा था कि उन्हें सबकुछ मिल गया हो , आंखों में खुशी के आंसु थे। सरकार का अहंकार टूट गया था।
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| Cacooroch protest 2026 |
इन युवाओं के कोई ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिसमें राजनीति हो सके । इनके सीधे सवाल सरकार से थे , शिक्षा व्यवस्था को लेकर, खराब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये कोई सत्ता नहीं मांग रहे थे। इसमें भी सुनने में सरकार एक महीने से ज्यादा का समय ले लिया। शायद इनकी भाषा सरकार को समझ नहीं आ रही थी, हालांकि बाद मे समझ आ गई। युवाओं की अच्छी बात यह थी कि वह किसी पार्टी, जाति समुदाय और वर्ग का न होकर आम मुद्दों की बात कर रहे थे। जो सरकार को समझ नहीं आ रहा था।
ये नए जमाने के GenZ सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले , इनको सोशल मीडिया से हटकर देश मुद्दों की भी समझ है। ये कहना गलत है कि इन्हें कुछ पता नहीं है। ये लोग अब जाति, धर्म, हिन्दू, मुस्लिम और मंदिर, मस्जिद से हटकर भी सोच रहे हैं। अब इनको देश के असल मुद्दों से भटकाया नही जा सकता और डर नाम की जगह इनके अंदर नही है। चाहे कितनी सिविल ड्रेस और बिना बैचेस के पुलिस उतार दो ।इनके सीधे सवाल सरकार से होते हैं।
GenZ का मानना है कि, देश इन सबसे बढ़कर कही उपर है। पार्टियां बनती बिगड़ती रहती हैं, लेकिन देश नही। सरकार के प्रचार तंत्र ने आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विदेशों से फंडिंग आ रही है, पाकिस्तान के एजेंट है, चीन के एजेंट है, गुंडे और दहशतगर्द क्या नही बोला गया इन युवाओं को, जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लाठियां खाई , आशु गैस के गोले चले और कैनन वाटर की गाड़ियां आई, सबकुछ हुआ जो एक आंदोलन मसलने के लिए किया जाता है। ये लोग फिर भी शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे और अपनी आवाज को उठाते रहे।
आंदोलन में जुड़ने वाले सबसे ज्यादा युवा थे। जो इस आंदोलन से नही जुड़ पाए उन्होंने घर से ही चाय और खाना भेजा । यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत बन गई और आंदोलन देश अलग कोनों में होने लगे। Main stream media ने इसे कोई कवरेज नहीं दिया, जिससे मीडिया के भी नाकामी के नारे लगे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को अपने मंच पर जगह दिया। इस आंदोलन ने अपना एक इतिहास बना लिया। जिसमें मीडिया और सरकार इसके खिलाफ थी और इतिहास भी शांतिपूर्वक ऐसे ही बनता है। युवाओं ने भी इस नए समय में नई पहचान बनाई।

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