हाल में ही दिल्ली पुलिस के कारनामों का डंका पूरे देश और दुनिया बजा है। चाहे सीजेपी आंदोलन के दौरान हो या 4PM न्यूज नेटवर्क की महिला पत्रकारों के साथ मारपीट को लेकर और आंदोलन के दौरान 25 संदिग्ध आरोपियों का आंदोलन परिसर में उनका पहुंचना हो। सवाल तो उठना स्वाभाविक है।सवाल तो दिल्ली पुलिस और गृहमंत्री अमित शाह जी ही पूछे जायेंगे।
सीजेपी आंदोलन के दौरान जंतर मंतर दिल्ली में एक दलित लड़की निशु आजाद के पिता संजय कुमार का सिर झड़प के दौरान स्वतंत्र भरद्वाज नाम के गुंडे, मवाली ने कड़े से वार करके सिर फोड़ दिया था। यह मामला सामने तब आया जब आरोपी खुले आम घूम रहा है और टीवी चैनल्स पर इंटरव्यू दे रहा था। रेप करने की धमकी दे रहा है। आरोपी बोला रहा था, मैने कड़े से निशु के पिता का सिर फोड़ दिया। उनके सिर पर 7 टांके लगे हैं। मेरे उपर mudered to attempt के तहत 307 सेक्शन लगना चाहिए और मैं खुला आराम से घूम रहा हूं। केंद्रीय मंत्री चिराग़ पासवान, माेदी जी और बीजेपी के बड़े नेताओं को अपना भाई बता रहा था। मुझे कोई पकड़ नहीं सकता है। पुलिस के बूट और पुलिस लाठी मेरे पास है। उसके फोटो भी कई बड़े बीजेपी नेताओं के साथ है। फोटो होना आज समय में कोई बड़ी बात नहीं।
जिस तरह से आरोपी एक विशेष वर्ग और समुदाय के प्रति अभद्र भाषा प्रयोग कर रहा था। ऐसे लोगों को मोटिवेशन कहां से मिलता है। ऐसे लोग एक अच्छे समाज के लिए नासूर से कम नहीं होते हैं। इसके बावजूद ऐसे गुंडे, मवाली खुला घूम रहे हैं। दिल्ली पुलिस सो रही है। FIR तक नहीं हो रही है। सीजेपी और विपक्ष के सांसदों को FIR के लिए थानों को जाना पड़ रहा है। इसके बाद FIR और उसकी बुलंदशहर में गिरफ्तारी होती है। ऐसे लोगों को कौन संरक्षण दे रहा है। इससे पहले दिल्ली पुलिस सिर की चोट को माइनर इंजरी बता रही थी।
दक्षिण दिल्ली के साकेत में 3 सितंबर को एक मैक्स स्मार्ट सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल की एक विंग का उद्घाटन करने दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता और गृहमंत्री अमित शाह पहुंचे थे।जिसको कवर करने के लिए 4PM न्यूज नेटवर्क की दो महिला पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान कार्यक्रम में पहुंची थी । साहिन खान का आरोप है कि पुलिस ने उनको रोका और उसके बाद थाने ले आई। एक वीडियो में उन्होंने कहा पुलिस ने नाम पूछा और उनके साथ मारपीट की क्योंकि उनके नाम खान था। जाति समुदाय और धार्मिक पहचान के आधार पर प्रताड़ित किया गया। बॉडी पर मारपीट के निशान भी दिखाई दे रहे थे।
दिल्ली पुलिस डीसीपी अनंत मित्तल का जवाब था कि वीवीआइपी प्रोटोकॉल का ये लड़कियां उल्लंघन कर रही थी। जिसके लिए इनको थाने ले आया गया और पूछताछ की गई।जो भी ये आरोप लगाए जा रहे हैं वो भ्रामक, गलत और निराधार बताया है। पुलिस ने अज्ञात नाम से FIR दर्ज किया। जबकि साहिन खान का कहना है, हम उस पुलिस को पहचानते हैं। मीडिया संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। FIR और जांच करने की मांग की है।
Indian express ने सीजेपी आंदोलन जंतर मंतर दिल्ली पर एक रिपोर्ट छापी है। जिसमें उन्होंने कहा है सीजेपी प्रोटेस्ट में फेस रिकॉगनेशन सिस्टम ने 25 ऐसे संदिग्ध लोगों की पहचान की है। जो पहले से किडनैपिंग, रेप, हत्या की साजिश और muder जैसे संगीन अपराधों में सजा काट रहे थे। ये कौन लोग हैं और कैसे जंतर मंतर पहुंचे क्या दिल्ली पुलिस के पास इसका कोई जवाब है? इन सारे मामलों में एक बार फिर दिल्ली पुलिस सवालों के घेरे में है और शायद दिल्ली पुलिस पास कोई इन सवालों का जवाब नहीं है।
इस रिपोर्ट से कुछ प्वाइंट बिल्कुल क्लियर हैं जिस फेस रिकॉगनेशन सिस्टम की बात हो रही है। जिससे देश भर में आरोपियों को पहचाना जा रहा। या तो यह सिस्टम खराब है। या फिर दिल्ली पुलिस और सरकार झूठ बोल रही है।

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