छात्राें की गूंज का कार्यक्रम राहुल गांधी का एक बड़ा मिशन है। जो लगातार चल रहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी इस मंच पर छात्रों से सीधा संपर्क करते हैं। उनकी समस्यों को उठाते और सुनते हैं।
छात्रों की गूंज कार्यक्रम की शुरूवात 17 जून 2026 राजस्थान कोटा से हुई है। जिसका उद्देश्य छात्रों से मिलना, उनकी समस्यों को सुनना और उनकी आवाज को उठाना था। इस कार्यक्रम में छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इस कार्यक्रम के जरिए हजारों लाखों छात्र राहुल गांधी से जुड़े। शुरुवाती दौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम बहुत प्रभावी नहीं रहा, लेकिन बाद में धीरे धीरे छात्र इस कार्यक्रम से जुड़ने लगे। कार्यक्रम को पूरे देश के छात्रों तक पहुंचाना है और इसी क्रम में राहुल गांधी एक के बाद एक कार्यक्रम कर रहे हैं। राहुल गांधी लगातार छात्रों और उनके परिवारों से मिल रहे हैं। चाहे इंदौर हो या पुणे देश के अलग अलग राज्यों में छात्रों की गूंज कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहे हैं। देश हो या देश के बाहर छात्रों से मिल रहे हैं।
इससे पहले मैने नहीं देखा था कि राहुल गांधी इतना कभी एक्टिव रहे हो। राहुल गांधी इस कार्यक्रम में सरकार की नाकामियों की पोल खोल रहे हैं। शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य या देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर लगातार एक्टिव हैं। छात्र उनके पास अपनी परेशानियों को लेकर जाते हैं। नीट पेपर लीक, इकॉनमी और मेडिकल सेक्टर जैसे दूसरे क्षेत्रों में सवाल उठा रहे हैं। इस कार्यक्रम के जरिए राहुल गांधी बीजेपी पर लगातार हमलावर रहते हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार राहुल गांधी के कार्यक्रमों का विरोध किया जा रहा है।
क्या राहुल गांधी इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं के दिल में अपनी जगह बना पाएंगे। दिल्ली यूनिवर्सिटी में छात्र संघ का चुनाव हारने के बाद चारों तरफ से सवालों से घिर गए हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी संगठन ने 4 में से 3 केंद्रीय पद जीते, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार दीपांश शौकीन ने जीता।NSUI का एक भी कैंडिडेट कोई चुनाव नहीं जीता। इस चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा दीपांश शौकीन की हो रही है क्योंकि इससे पहले दीपांश शौकीन NSUI से जुड़े थे। क्या कन्हैया कुमार और कांग्रेस को पता नहीं था। जब कांग्रेस के पास ऐसे उम्मीदवार थे तो दूसरे को टिकट देने की क्या जरूरत थी।
राहुल गांधी छात्रों की गूंज कार्यक्रम तो लगातार कर रहे हैं। क्या वो इन कार्यक्रमों के जरिए जमीनी स्तर पर पकड़ बना पा रहे हैं। चुनाव में हार के बाद कही न कही कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। इस चुनाव को नजरंदाज भी नहीं किया जा सकता है। इस चुनाव से देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
हालांकि राहुल गांधी इस समय काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और सरकार के लिए लगातार मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। बीजेपी की तरफ से लगातार उनपर प्रहार किया जा रहा है, लेकिन राहुल गांधी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सरकार पर दबाव बना रहे हैं, जिससे कई जगह पर उनको कामयाबी भी मिली है।

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