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गुरुवार, 6 अगस्त 2026

शेख हसीना के भाषण से बांग्लादेश में हुआ बवाल,,शेख हसीना ने कहा मैं वापस अपने घर अपने लोगों के बीच आऊंगी।

   


बांग्लादेश में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में बवाल मच गया है। पूर्व क्रिकेट और आवामी लीग के पूर्व सांसद शकीब अल हसन के घर पर देर रात बुधवार को पेट्रोल बम फेंका गया। ये सब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मीटिंग के बाद हुआ। यह हमला उनके पुस्तैनी घर मागुरा के केशवमोर इलाके में हुआ और घर पर तोड़ फोड़ भी की गई। यह सब दिल्ली में आयोजित दिल्ली के फॉरेन करेसपॉन्डेंट क्लब में मीटिंग के बाद हुआ।

   बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना की बात पर नाराजगी जताई है और कहा है यह सब घरों को आग के हवाले करना है। यह सब मीटिंग में शामिल होने का नतीजा है, बांग्लादेश पर नव फासीवाद की झलक दिख रही है। आवामी लीग मान रही है कि बांग्लादेश में तानाशाही पनप रही है। सरकार आवामी लीग के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार कर रही है।

   शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के पहले ही BNP,इस्लामी जमात, और NCP ने  इंटरनेशनल मीडिया आउटलेट्स को खुले आम धमकी दी थी और कहा प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई बातों को न ही छापे और न ही चलायें अगर इसके बावजूद ऐसा करते हैं तो हम कोर्ट जाएंगे और इससे जुड़े मामलों में मुकदमा दायर करेंगे। बयान में कहा गया, ये एक सोची समझी चाल हो सकती है और लोकतंत्र के बहाने आवामी लीग के सदस्यों पर नरसंहार और अत्याचार किया जा रहा है।

 प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने कहा हम अपने देश में दिसम्बर तक आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें पता है जेल में डाल दिया जाएगा और मार भी सकते। इसके बाद भी जान जोखिम में डाल कर मैं अपने देश अपने लोगों के पास आएंगे।हमारा उद्देश्य सरकार में वापस होना नहीं है। शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट होने के बाद 2024 से भारत में है और अब उनकी वापसी बांग्लादेश हो सकती है।


सोमवार, 3 अगस्त 2026

Illigal tariffs को लेकर America में trump को झटका 25 States ने किया Case

     


अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई सालों से अपनी मनमर्जी के मुताबिक illigal टैरिफ किसी भी देश पर लगा रहे हैं।अभी हाल के ही दिनों में चीन, भारत समेत और कई देश थे, जिनपर आयात टैरिफ 100% लगाया और इसके लिए बकायदा एक कानून भी पास करवा दिया। जो देश अपना उत्पाद अमेरिका भेज रहे थे और जिनपर पहले आयात टैरिफ 10 से 12% था। अब ट्रंप अपने ही देश में लोग ट्रंप को बेनकाब कर रहे हैं और इस टैरिफ को अवैध बता रहे हैं। अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। इन राज्यों में शामिल भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर लगे टैरिफ अवैध बताया गया है। इन राज्यों की मांग है कि टैरिफ को अभी रोका जाय और सारा अवैध टैरिफ का पैसा वापस किया जाय।

  राज्यों के अनुसार ट्रंप ने पिछले महीने में भारत समेत 59 यूरोपीय संघ देशों पर अपने मनमाने ढंग से टैरिफ लगाया था। जब से यह अपने दूसरे कार्यकाल में आया है तब से कुछ भी करता और बोलता रहता है।

  न्यूयॉर्क की एटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को अवैध बताया है। उन्होंने ने कहा कि इससे अमेरिका में बिज़नेस परिवारों का बोझ बढ़ेगा। पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर इस टैक्स को लगाया था। लेकिन बाद में विवाद होने पर कोर्ट ने ट्रंप से कहा था यह अधिकार तुमको किसने दिया है और अपने मनमाने ढंग से टैरिफ नही लगा सकते हालांकि बाद में पैसे भी वापस करने पड़े थे। अमेरिका में ऐसे टैरिफ वहां की कांग्रेस द्वारा लगाए जा सकते हैं।

   ट्रंप सरकार ने अपनी भरपाई पूरी करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974, सेक्शन 301 का इस्तेमाल किया है। इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं  और जबरन श्रम को रोकने में असफल रहे देशों पर 10 से 12% टैरिफ लगाया गया। इस ट्रंप सरकार ने इसको वैध बताया और इस पर उन्होंने ने कहा यह अमेरिकी श्रमिकों और व्यापार बचाने के लिए जरूरी है।एक बात साफ है अमेरिका अपने फायदे के लिए कुछ भी करता है।

   

बांकीपुर से BJP पहली बार हारी चुनाव और ऐतिहासिक जीत प्रशांत किशोर की ,आगाज बदलाव का

   

बांकीपुर से प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत

BJP का गढ़ कहा जाने वाला बांकीपुर का किला जन स्वराज पार्टी,प्रशांत किशोर ने भेद दिया है। भारतीय जनता पार्टी आज पहली बार चुनाव हारा है और प्रशांत किशोर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज  की है और एक बड़े मार्जिन से जीत हासिल की है।नितिन नवीन के राज्यसभा जाने पर बांकीपुर की विधानसभा सीट खाली हो गई थी और पर उपचुनाव में bJP के प्रत्याशी के तौर पर नीरज कुमार को उतारा गया था। जबकि जन स्वराज पार्टी की तरफ से प्रशांत किशोर लड़ रहे थे और RJD की तरफ से रेखा कुमारी सुनाव लड़ रही थी। पहले स्थान पर जन स्वराज दूसरे पर बीजेपी और तीसरे नंबर पर राजद है। बीजेपी और राजद अन्य दलों की मुश्किले बढ़ने वाली है  आगामी चुनाव में क्योंकि लोगों को अल्टरनेटिव नए विकल्प मिल रहे हैं। ये वहां के लोगों का कहना है कि दूसरे विकल्प न होने के कारण हम बीजेपी और राजद को वोट देते थे।

  अब बिहार ही नहीं पूरे देश में मुद्दे बदल रहे हैं और अल्टरनेटिव के तौर पर नए विकल्प लोगों को मिल रहे हैं। बिहार में बांकीपुर में प्रशांत किशोर के जीतने के कई बड़े कारण रहे हैं जिसमें शिक्षा व्यवस्था, बिहार के छठवीं पास  मुख्यमंत्री, और लोगों को एक नया अल्टरनेटिव विकल्प मिला। वहां की एक क्लिप बहुत वायरल हुई जिसमें कहा गया कि बीजेपी के तरफ से यहां कुत्ता बिल्ली भी चुनाव जीत जाएंगे जिसको लेकर जनता में भी नाराजगी देखी गयी। प्रशांत किशोर इन सब मुद्दों को उठाने में सफल रहे और सीजेपी आंदोलन भी एक बड़ा फैक्टर रहा। 

 पिछले समय से बिहार की पॉलिटिक्स में लगातार बदलाव देखने को मिला। विधानसभा में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने जिसके बाद उनको राज्यसभा में भेज दिया गया और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद अब विधानसभा के उपचुनाव बांकीपुर से बीजेपी हार गई,एक तरह से देखा जाए तो नितिन नवीन की ही हार है हालांकि उनकी जगह पर उनका प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा था। 

   लोगों का कहना है कि हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चुना था न की सम्राट चौधरी को।इसी तरह की बहुत सारी गलतियां सरकार ने की जिसका परिणाम सामने है। यदि हम वोटर्स परिपेक्ष में बात करे तो गढ़ और किला किसी का नहीं होता है। अब लोग देश के असल मुद्दों को समझ और उस पर बात भी कर रहे हैं और उनको नए विकल्प मिल रहे हैं जिनकी उनको तलाश है। जैसे कि तमिलनाडु हो या बांकीपुर में देखा गया है।

  देश की जो भी पुरानी पार्टियां है उनको समझना पड़ेगा कि अब  उनकी मनमानी चलने वाली नही है और न ही युवा को अब असल मुद्दों से भटकाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि उनके पास अब नए विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। आने वाले समय में इन पार्टियों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़  सकता है यदि इन्होंने अपनी सोच को नही बदला। इन पार्टियों को जरूरत है अपनी रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। 1990 से चली आ रही सरकार के लिए लोगों का एक संदेश महज एक आगाज है। लोग इसे प्रधानमंत्री जी की हार बता रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री जी के नाम पर ही वोट मिलता था।

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

Farmer's protest मध्यप्रदेश तय MSP मूल्य पर खरीदी जाय मूँग की दाल किसान अपनी मांग को लेकर उतरे सड़क पर

किसान की हर फसल की MSP  तय हो।

MSP तय हो

  मध्यप्रदेश में किसान पिछले 4 दिनों से अपनी मांग को लेकर सड़क पर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि हर फसल की एक तय सरकारी मूल्य होना चाहिए।  जिससे किसान फसल को उचित दरों पर बेंच सके। किसान अपने घर से खाने पीने का सामान लेकर सड़क पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम यही बैठे रहेंगे।

       इस प्रदर्शन की शुरूवात मार्च के रूप में नर्मदापुरम से लेकर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तक निकला है।यह मध्यप्रदेश सरकार के लिए सबसे बड़ा आंदोलन है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसमें पुलिस बल का प्रयोग नहीं किया गया है। हम शांतिपूर्वक उनको आगे बढ़ाने दिया।

      किसान फसल कटने तक खेत में संघर्ष करता है उसके बाद फसल की उचित दरों के लिए सड़क पर धरना करे। किसानों का कहना है कि  जैसे अन्य दलों के बराबर ही मूंग की दाल का भी एक तय MSP हो चाहिए ।जिससे  हम अच्छी कीमतों पर फसल को बेच सके।

    यहां पर मध्यप्रदेश सरकार का कहना की हमारी प्राइम सपोर्ट स्कीम के अनुसार राज्य का कुल उत्पादन का 25% ही सरकारी मूल्यों पर खरीद सकते हैं। मूंग के दाल का सरकारी मूल्य 8768 रुपए पर कुंतल है। उदाहरण के तौर पर मान लो कि पूरे प्रदेश 100 kg  फसल हुई उसमें से सरकार 25 kg ही सरकारी मूल्य पर खरीद सकती है। जिससे बची हुई फसल को कम कीमतों पर खुले बाजार में बेचना पड़ता है।

      दिल्ली की तरह ही मध्यप्रदेश में Gen Z ने किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे और किसानों की समस्या को समझ रहे हैं। जब किसान संघर्ष करके खुश नहीं रहेगा तो धरती पर हरियाली कैसे होगी।

बुधवार, 29 जुलाई 2026

Vande Mataram Bill पारित राज्यसभा से नियम का उल्लंघन करने पर होगी 3 साल तक सजा।

Vande Mataram Bill 2026


आज वंदे मातरम् बिल राज्यसभा यानी उच्च सदन से पारित हो गया है। इस बिल के तहत वंदे मातरम् के  अपमान को रोकने के लिए इस बिल को लाया गया है। वंदे मातरम् बिल 2026 के संशोधन के अनुसार यदि कोई वंदे मातरम् गान के समय जानबूझ कर अपमान करता है तो उसको 3 साल तक सजा का प्रावधान है। इसको सारा प्रोटोकाल जन गण मन की तरह ही दिया जाएगा।

    इस विधेयक के पारित होने पर गृहराज्य मंत्री नित्यानन्द रॉय ने कहा यह विधेयक हमारी राष्ट्रीय धरोहर, और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिलाता रहेगा । यह संशोधन एक बदलाव नहीं यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाता रहेगा।

     राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल की चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टी सदस्यों ने सदन वाकआउट किया था हालांकि बाद मे आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल,भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस के सदस्यों ने इस चर्चा हिस्सा लिया और बिल ध्वनिमत से पारित हो गया।

   लांच के बाद उपसभापति हरिवंश की कार्यसूची में शामिल राष्ट्र गौरव  अपमान निवारण बिल की चर्चा हुइ।इस बिल के तहत हमें अपनी राष्ट्रीय धरोहर सम्मान करना होगा। इसके बाद विपक्ष ने अमितशाह से जवाब मांगा और नारेबाजी शुरू कर दी। अमितशाह ने अभी तक कोई बात नहीं की है।

     इसी क्रम मे दूसरी ओर लोकसभा मे एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी मिल गई है।इस मानसून सत्र में लंबी चर्चा के बाद इस बिल को एकमत ध्वनि से पारित किया गया। इसी बीच पक्ष और विपक्ष में काफी नोकझोक हुई  लोकसभा राहुल गांधी के भाषण को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी हुई।

भारत, चीन पर US का लगेगा 100% टैरिफ रूस को आर्थिक रूप से घेरने की तैयारी।

US Russia sanction Bill 2026 


रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच US ने रसिया को घेरने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिसमें US ने रसिया के खिलाफ सैंक्शन बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनाने के बाद भारत ,चीन  स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान  से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।  इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जो रूस से तेल गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों का आयात करते हैं।डोलांड ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
      यह महत्वपूर्ण विधेयक US के दिवंगत सीनेट लिंडसे ग्राहम ने बनाया था। अमेरिका कैपिटल हिल जहां यह वोटिंग हो रही थी वहां जेलेंस्की भी महजूद रहे, यह एक दिलचस्प बात है। इस विधेयक के समर्थन में 86% सीनेटर्स  ने वोटिंग की जबकि इसके विरोध में 12%  वोट पड़े। इस विधेयक  का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना। जिससे  उन देशों को किसी तरह से रूस से दूर किया जा सके जिनके रूस की साथ अच्छे रिश्ते हैं।
    अमेरिका के 100% टैरिफ से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ है जबकि वही चीन पर 12.5% टैरिफ है। यदि 100% टैरिफ लग जाती है तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर दोगुनी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। इस विधेयक को डोलांड ट्रंप ने हरी झंडी दिखा दी है।
   विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय निर्यात में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।

   यह टैरिफ इस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और पहले से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मार्ग बाधित। जिससे तेल गैस की आवाजाही ठप हो गई है।

   पहले भारत अपने जरूरतों का 40% तेल गैस इन्हीं खड़ी देशों से पूरा करता था जब अंतर्राष्ट्रीय जलडमरू मध्य में आवाजाही बाधित है। जिसके कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है ।

   सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल  के अनुसार हालांकि इस विधेयक में कुछ राहत दी गई है।इसमें यह छूट उन देशों को मिलेगी जो देश रूस के कुल तेल का 15% खरीदेगा ।

       

सोमवार, 27 जुलाई 2026

FCRA Act and Amendment Bill 2026

 


संसद के इस मानसून सत्र में सरकार FCRA बिल पारित करने के लिए ला रही है। यह मानसून सत्र 20 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें 5 नए बिल है और दो पहले से ही संसद में लागू करने के लिए ,बहस चल रही है। इस सत्र में नीट पेपर लीक को लेकर संसद में काफी हंगामा हो रहा है और कई बार सदन की कार्यवाही को रोकना  पड़ा।

FCRA ( Foreign Countribution Regulation Act) Amendment Bill 2026

इस बिल को  28 मार्च 2026 को भारत सरकार ने लोकसभा में प्रस्तावित किया था।  यह बिल विदेश से आने वाली फंडिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए इसे लाया जा रहा है। कौन लोग और संस्थान है जो इस फंडिंग को प्राप्त कर रहे हैं। इसको खर्च किस पर किया जा रहा है। इन सब पर सरकार की नजर रहेगी।इसका मुख्य उद्देश्य है इसके गलत प्रयोग को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।  ऐसे कई खबरें आती रहती हैं कि फंडिंग का उपयोग गलत कार्यों में किया जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हितों को ध्यान रखते हुए सरकार ने इस बिल को लाया है यह बिल होम मिनिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा।

     देश दुनिया में बहुत सारे NGOs या संस्थान है जिनको विदेशों से फंडिंग आती है। जिसके द्वारा बहुत सारे प्रोग्राम चलाए जाते हैं जैसे हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए विदेशों से फंडिंग मिलती । यह फंड पॉलिटिकल पार्टी , सांसद, जज, सरकारी कर्मचारी और मीडिया संस्थानों को नही मिल सकता है।

     यदि FCRA किसी कारण से रद्द या ले लिया जाता है तो उस पर बने कानून के अनुसार FCRA  उस संपति को अपने प्रबंधन में ले लेगा । यदि पंजीकरण समाप्त होने पर सारी संपति प्रबंधन के पास जाएगी ,यदि NGOs का सर्टिफिकेट बहाल कर दिया जाता है तो सारी संपति वापस कर दी जाएगी।

  यदि पंजीकरण एक निश्चित समय तक जारी नहीं किया जाता तो सरकार सारी संपति जप्त कर लेगी और उसका उपयोग सार्वजनिक हितों के लिए किया जाएगा।

   यदि पंजीकरण कैंसिल कर दिया जाता है तो आप ऑथोरिटी विरोध कोर्ट में इसकी अपील कर सकते हैं।

    FCRA नियम के तहत अनुसार कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर सजा अधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1वर्ष तक घटने प्रावधान है।

    जितने भी राज्यों में NGOs  पंजीकरण है उन सभी को सरकार को अपने कार्यों के विषय में बताना होगा। जिससे सरकार सुनिश्चित करे पाए।

   सरकार का कहना है कि इसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है और हम देश में राष्ट्रीय सुरक्षा ,संप्रभुता और शांति को बनाए रख पाएं। बहुत सारे लोगों का कहना है कि सरकार इस पर अपना ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती। इसके परिणाम स्वरूप इसका प्रभाव पर देखा  लोगों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता। उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा जो विदेशों से NGOs की फंडिंग का  दुरूपयोग करते हैं और जो यह सब करवाते हैं। यह बिल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और संसद में इसकी बहस चल रही है। 

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन 26 दिन के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह रहे महजूद। छात्र बोले जारी रहेगा आंदोलन।

 

जंतर मंतर आंदोलन
मेदांता hospital sonam wangchuk 

पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने कल अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि  अगर सरकार के कुछ केंद्रीय मंत्री आए और हमें भरोसा दे कि बच्चों पर कोई कार्यवाह न हो और जवाबदेही तय हो तो मैं अनशन को तोड़ सकता हूं।

जंतर मंतर दिल्ली में हो रहे आन्दोलन में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया था।यह सब संसद तक मार्च होने के दो दिन पहले हुआ था। जिससे युवाओं में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया। अब यह एक विशाल जनांदोलन का रूप ले चुका है।नीट पेपर लीक को लेकर देश के अलग अलग कोनों में आंदोलन शुरू हो गए। अब ऐसी खबरें आ रही है कि कई जगह पर युवाओं और पुलिस में झड़प हो गई है। यह आंदोलन युवाओं के जागरूक  होने की याद दिला रहा है।

आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल जहां सोनम वांगचुक का इलाज चला रहा है।इससे पहले उनका शब्दरगंज हॉस्पिटल में चला रहा था।कोर्ट के आदेश पर ,सोनम वांगचुक की पत्नी और उनके घर वाले वहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। जोकि बाद फिर कोर्ट ने आदेश दिया और वहां से रेफर करके मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया। मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर और  कई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन 26 दिन के बाद तोड़ दिया।

    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी युवाओं का कहना की, जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन शांतिपूर्वक देश के अलग अलग कोनों में चलता रहेगा। अब यह आंदोलन एक विशेष व्यक्ति का न होकर, जनांदोलन बन गया है, जिसमे स्वतः लोग जुड़ रहे हैं। अभीतक सरकार तक ने अपनी गलती को नही माना और न जवाब देही तय की है।

शनिवार, 23 मई 2026

नेता आते जाते रहेंगे,देश का क्या होगा

 कितनी सरकारें आई गयी , कुछ ने काम किया कुछ ने नही।देश कभी तेजी से आगे बढ़ा,कभी रुक सा गया। सभी सरकारों ने अपने अपने दावे किये , कभी पूरे हुए कभी नहीं।यही सिलसिला चलता रहा,शायद आगे भी चलता रहेगा। पर आम लोगों की जिन्दगी जैसी तब थी, वैसी ही शायद आज है।कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला आम लोगों के लिए। अमीर, अमीर होते चले गए ,गरीब मध्यम वर्ग में तो आ गए पर उनकी स्थिति गरीब से भी खराब है। वे लोग न तो अमीर बन पाए और न ही गरीब, शुरु से लेकर आजतक बीच में ही पिसते रहे। कहने को तो कागज पर बहुत काम हुआ पर जमीन पर कुछ नहीं।

 हॉस्पिटल्स, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटी बनते रहे हैं लेकिन ये सब नेताओं और अमीरों के लिए और उनके बेटों के लिए क्वालिटी नहीं दे पाएं। ये लोग अपने बेटों को पढ़ाने के लिए विदेश भेजते हैं और खुद बीमार हो जाएं तो विदेशों में इलाज करवाते हैं। जो नेता संसद में खड़े होकर समोसा चाय पानी रिचार्ज और युवाओ के मुद्दों को उठाते थे। ईमानदारी का डंका बजाते थे। आज वही नीट ,SSC जैसे युवाओं के मुद्दों पर चुप हैं। बाबू भैया सब रुपयों और  सत्ता का खेल है ।फिर वही पुराना सवाल आम लोगों का क्या। आम लोगों ने तो बनवाया नहीं एजुकेशन और हेल्थ संस्थानों को। जो उनकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। देश को चलने वाले जितने भी लोग हो चाहे नेता ,उद्योगपति या आला अफसर,इन सभी का हाथ है देश के बड़े संस्थानों को बनाने में।

 इन सब करप्ट और भ्रष्ट लोगों को पता है।जो भी हमने देश में बनाया है, वह अच्छा नहीं।इसी कारण ये लोग विदेश जाते हैं, चाहे पढ़ाई करना हो या इलाज करवाना हो। यही विकास का सबसे बड़ा सबूत है।

  देश के सब लोग  करप्ट और भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन जो है वो बहुत कुछ कंट्रोल करते हैं। आज आप देख लो कोई अपनी समस्याओं को लेकर धरना नही कर सकता है। जबकि यह हमारा अधिकार है।हम शांतिपूर्वक किसी का भी विरोध कर सकते हैं यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। लोगों को जाति धर्म और मंदिर मस्जिद नहीं,उनको स्किल्स सिखाओ, रोजगार दो जिससे देश का विकास होगा। देश का विकास तो हो रहा है पर आम लोगों का नहीं , नेताओं का और कुछ बड़े आला अफसरों का। सारा विकास का रुपया इन्हीं सब के पास है।अब मैं देख पा रहा हूं कि नया यूथ इन सब बातों को समझ पा रहा है लेकिन इसमें देश के भविष्य के हित विषयों पर बात होनी चाहिए। देश हमेशा रहेगा, लेकिन ये लोग नहीं रहेंगे।

 देश किसी के भी हाथ में रहे । वह देश का सेवक बनकर काम करे ,भगवान बनकर नहीं।  देश की अर्थव्यवस्था 4th से 6th नम्बर पर आ गई है। हालात कैसे भी हो आम जनता को सच बताना चाहिए, और जनहित के मुद्दों पर बात होनी चाहिए। कोई पक्ष और विपक्ष आम लोगों के मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता है। समय एक सा नही रहता है। बदलाव ही प्रकृति का नियम है।इसका कारण कुछ भी हो सकता है,और शुरूवात कही से भी।

CJP ने 48 घंटे का दिया Altimatem CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे! राहुल गांधी लगातार हमलावर बीजेपी और चुनाव आयोग पर

    चुनाव आयोग की सच्चाई सामने आने के बाद देश भर में राजनीतिक पारा बढ़ गया है। विपक्ष पूरी तरह से बीजेपी और चुनाव आयोग पर हमलावर हो गया है।...