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रविवार, 9 अगस्त 2026

भारत का स्वदेशी project kusha तैयार! दुश्मन के हवाई खतरों पर होगी पैनी नजर

Project kusha

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुश (Kusha) का किया गया सफल परीक्षण। भारत लगातार अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहा है। भारत ने ऐसा ब्रह्मास्त्र बनाया है जिसका लोहा पूरी दुनिया मान रही है। बहुत सारे देश इसे खरीदने के लिए कतार में खड़े हैं। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के बाद अब भारत अस्त्र बनाया है जो हवा से हवा में हमला करने के सक्षम है। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने 23 जुलाई 2026 को एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाने केलिए कुश सिस्टम के इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया गया है। प्रोजेक्ट कुश को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। जिसकी अलग अलग दूरी के इंटरसेप्टर है जिसमें 150 km, 250 km और 350 km की दूरी शामिल है। इसको DRDO ने बनाया है, यह इंटरसेप्टर मिसाइल long Range surface to air टारगेट करती है। इस मिसाइल का टारगेट ड्रोन, हवाई हमला,क्रूज मिसाइल और अन्य लक्ष्य हो सकते हैं।

  भारत ने अपने ही घर में तैयार किया लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली है जो धरती से जाकर आसमान में टारगेट को गिराने की क्षमता रखती है। प्रोजेक्ट कुश के परीक्षण के बाद दुनिया में इस प्रोजेक्ट की चर्चा तेज हो गई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल परीक्षण के बाद S 400 मिसाइल और इजराइल की बराक जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलों पर भारत की निर्भरता कम हुई है। चीनी मीडिया ने भी इसे कवर किया है। 23 जुलाई को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किये गए परीक्षण में कुश सिस्टम ने सिमुलेटेड हाई स्पीड और ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को इंटरसेप्ट किया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने कंट्रोल, कमांड, रडार और गाइडेंस सिस्टम को परखा गया। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइल है। ये मिसाइलें एयर स्पेस को सुरक्षा कवच देती हैं।

प्रोजेक्ट कुश क्रूज मिसाइल को करेगा ध्वस्त 

प्रोजेक्ट कुश को DRDO ने निजी और औद्योगिक क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य हमलों से देश को बचाएगा । यह प्रणाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मिशन सुदर्शन चक्र के तहत बहुस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा कवच प्रणाली में शामिल होगी। मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य 2035 तक रणनीतिक और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों, मिसाइलों, स्टील्थ फाइटर जेट  और प्रिसिजन गाइडेड जैसे वेपन्स के खतरों से बचने के बहुस्तरीय ढांचे को तैयार करने में, कुश को इसमें शामिल किया गया है जो इसकी सुरक्षा को और मजबूत करेगा और यह एक नई परत बनाकर देश की ताकत को बढ़ाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है प्रोजेक्ट कुश 

प्रोजेक्ट कुश भारत की सुरक्षा को मजबूत बनाएगा और आसमान में बाज की तरह पैनी नजर रखेगा। प्रोजेक्ट कुश में इसको बनाने की तीन तरह की प्लानिंग है। M 1 जिसकी स्पीड 150 km, M 2 जिसकी स्पीड 250 km और M 3 जिसकी स्पीड 350-400 km तक होगी। इसकी को खासियत है वही इसकी क्षमता को बढ़ाती है यह Long Range surface to air दुश्मन को निशाना बना सकती है। क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य लक्ष्यों को आसानी से इंटरसेप्ट कर सकती है। अब सुरक्षा हथियारों जैसे S 400 और बराक जैसी विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।

  भारत अपनी रणनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए लगातार डिफेंस क्षमता को मजबूत कर रहा। इसी क्रम भारत ने लगातार कई मिसाइलों का परीक्षण किया है  जिसमें अग्नि4 / agni-IV मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी क्षमता 4,000 km है।इसको कही भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मिसाइल को आसानी डिप्लॉय किया जा सकता है।


शनिवार, 8 अगस्त 2026

AI ने बनाया वायरस वैज्ञानिकों ने लैब में किया टेस्ट- क्या इंसानों के लिए होगा खतरा

 

AI virous related image

 AI ने अब वो कर दिखाया जो इससे पहले कभी किसी ने नहीं कर पाया। इससे AI की ताकत का अनुमान लगाया जा सकता और यह क्या कर सकता है।AI अब केवल चैट बोट, ऐप्स, वेबसाइट और आम कामों तक ही सीमित नहीं रहा। अब AI नए इनोवेशन में भी वैज्ञानिकों की सहायता कर रहा है। AI की ताकत से वैज्ञानिकों ने चमत्कार कर दिया है। अमेरिका की एक स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट में शोध कर रहे बैज्ञानिकों ने AI मॉडल की मदद से एक वायरस का DNA डिजाइन किया है। जो कभी प्रकृति में नहीं पाए गए हैं। बैज्ञानिकों ने ऐसा वायरस बनाया है जिसमें 16 बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता है। यह AI के क्षेत्र में बड़ी महान उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अच्छी बात यह है जो वायरस अभी वैज्ञानिकों ने AI की मदद से बनाया है वह वायरस इंसानों ,प्लांट और जानवरों को संक्रमित नहीं करेगा। यह रिसर्च बैक्टीरियोफेज पर आधारित है जो इंसानों को संक्रमित नहीं करता है।

किस तरह AI ने बनाया वायरस का DNA 

यदि हम इस रिसर्च के अनुसार बात करे तो इसमें वैज्ञानिकों ने Evo1 और Evo 2 नाम के दो AI मॉडल का प्रयोग किया गया। यह लगभग AI चैट बोट की तरह काम करता है। जैसे चैट gpt शब्द का अनुमान लगाता है ।इसी तरह Evo1 और Evo 2 मॉडल भी DNA की जेनेटिक संरचना का अनुमान लगाकर डिजाइन को तैयार करता है। इसी तरह वैज्ञानिकों ने पहले इस मॉडल को करोड़ों प्राकृतिक जीनोम तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया।ताकि हम इससे शुद्ध जीनोम तैयार कर सके। इसके बाद उन्हें &phi,'X174 और उससे जुड़े वायरस को देखा गया। आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस की मदद से हजारों संभावित बनाए गए डिजाइन बनाए गए जिसमें से केवल 300 डिजाइन को चुनकर लैब में DNA 🧬 बनाया गया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि पेट्री डिश में बैक्टीरिया के बीच क्लियर स्पॉट हैं यह एक संकेत है कि ये वायरस सक्रिय हैं और बैक्टीरिया को नष्ट कर रहे हैं।

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस से मेडिकल में होगी नई क्रांति 

वैज्ञानिकों की मदद से AI ने जो वायरस बनाया है इससे मेडिकल फील्ड में एक नई उपलब्धि मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है भविष्य में हम इन वायरस का इस्तेमाल उन बैक्टिरियल संक्रमण पर करेंगे जिस पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता है। अगर यह शोध सफल रहा तो दवा प्रतिरोधी संक्रमण के इलाज का नया रास्ता कुल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वायरस को इस तरह बनाया गया है जिससे इंसानों को कोई खतरा नहीं है। ऐसा कोई डेटा नहीं दिया गया है जिससे भविष्य मे कोई खतरा पैदा हो। भविष्य में आने वाली नई बीमारियों का इलाज किया जा सके और इनको रोका जा सके।

इस रिसर्च ने बढ़ाई इंसानो की चिंता 

इस रिसर्च ने एक नई बहस छेड़ दी है और इससे बायो सिक्योरिटी का खतरा बढ़ा है और इसका गलत प्रयोग होने की संभावना है।वैज्ञानिकों और आम लोगों का अलग अलग कहना है। इस रिसर्च ने मेडिकल फील्ड में एक महान उपलब्धि तो हासिल की है लेकिन भविष्य की चिंता बढ़ा दी है। जो AI इंसानों के मदद से वायरस बना सकता लेकिन भविष्य में इसी AI की मदद से ऐसे वायरस बनाए जा सकते हैं जो इंसानों, जानवरों और पेड़ों के लिए खतरा हो सकते हैं। कुछ सालों के बाद हमे सुनाई देगा इस वायरस से खतरनाक महामारी फैल रही है और इस देश की लैब में बनाया गया। अभी भी ऐसे वायरस लैब्स में महजूद है, सही समय आने पर इनका प्रयोग किया जाएगा और ऐसी रिसर्च सालों से चल रही हैं।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के अफसर छात्रों से संवाद करेंगे

   

परीक्षा पर चर्चा करेंगे योगी जी के अफसर

नीट यूजी पेपर लीक और जंतर मंतर पर आंदोलन होने के बाद अब मुख्यमंत्री योगी की सरकार छात्रों के लिए बड़ा दिल दिया है। योगी के अफसर छात्रों से मिलेंगे और उनसे संवाद करेंगे। सरकार की कोशिश है छात्रों के वर्ग को खुश किया जाय। सरकार का कहना है जब प्रशासनिक अधिकारी छात्रों से बात करेंगे तो इससे छात्रों को प्रेरणा मिल सकती है इसके साथ ही काउंसलिंग की जा सकती। इस संवाद में IAS, IPS और IFS अफसर छात्रों से मिलेंगे। मुख्य सचिव SP गोयल की तरफ से जारी पत्र में डीएम को आदेश दिया गया। इसमें डीएम युवा IAS, IPS और IFS के अफसरों के लिए एक महीने तक स्कूलों में आने जाने की व्यवस्था होगी। ये स्कूल सरकारी या प्राइवेट हो सकते हैं।

  ये अधिकारी स्कूल मैनेजमैंट से बात करके इसके बाद संवाद और प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया जाएगा। जिसमें छात्रों की काउंसलिंग करेंगे, दौरान यूपीएससी, नीट, आईपीएस, आईएस और जेईई मेन्स जैसे परीक्षाओं पर चर्चा होगी और राज्य सरकार की सभी योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। इस काम के लिए डीएम अपना एक समय निश्चित करेंगे और इसी समय पर सारी जानकारी प्रशासन को दी जाएगी। कौन अधिकारी कब क्या कर रहा है यह डीएम की जिम्मेदारी होगी वह आजाद है इसको और अच्छा बनाने में।

 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सरदार बल्लभ भाई पटेल औद्योगिक और रोजगार क्षेत्र की स्थापना में तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग को हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज पहुंचाने पर विचार करने और साथ खेल सुविधाओं को ध्यान रखने पर जोर दिया है। इससे युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने में मदद मिलेगी। यहां पर ऐसे कई बड़े सवाल उठ सकते हैं ये सब चुनाव आने के समय ही क्यों होता है।अगर यही इससे पहले होता तो कितना अच्छा रहता।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

क्या UPI से ट्रांजेक्शन करने पर लग सकता है चार्ज सरकार ने लोकसभा में पेश किया बिल

   


सरकार ने लोकसभा में ऐसा बिल पेश किया है जिसमें होने वाले यूपीआई के ट्रांजेक्शन सहित ई पेमेंट्स पर चार्ज लगाने के  संभवतः नए रास्ते खुल सकते हैं। यह चार्ज मर्चेंट डिस्काउंट रेट MDR के रूप में लगा सकेंगे। अभी UPI से MDR पेमेंट करने पर चर्चा नहीं लगता। अभी सरकार की तरफ साफ नहीं किया गया है कि MDR पेमेंट पर कितना चार्ज और कब लगेगा। अभी यह एक कानूनी प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया है। आने वाले समय में तय होगा किस पर कितना चार्ज लगेगा। UPI सहित किन डिजिटल MDR पेमेंट करने पर यह चार्ज लगेगा या नहीं अभी इसका न ही शुल्क तय हुआ है और न ही इसकी कोई तारीख तय हुई है। 

  बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली इकाइयां डिजिटल ट्रांजेक्शन के बदले में कारोबारियों से फीस लेती हैं उसे MDR कहते हैं। मर्चेट डिस्काउंट रेट MDR केवल डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगता है। UPI से ट्रांजेक्शन करने पर यह चार्ज नहीं लगता है।

लेकिन उपभोक्ता को नही देना होगा चार्ज 

     मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कारोबारी किसी कस्टमर से MDR नहीं ले सकता, इसलिए UPI पेमेंट पर MDR लगने पर भी कस्टमर से इसे नही लिया जा सकेगा। यह केवल कारोबारियों पर लगेगा। आने वाले समय में तय होगा कितना चार्ज और कब देना होगा। अभीतक रिपोर्ट के अनुसार यह साफ नहीं किया गया है कि यह किस प्रकार के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लगेगा या नहीं और आम लोगों के UPI ट्रांजेक्शन पर कोई बात नहीं की गई है।

MDR लागू हुआ तो क्या बदलेगा

 फिलहाल सरकार ने इस पर कोई ऐसी बात नहीं की है कि यह कब लागू होगा या नहीं।यह विधेयक केवल अभी लोकसभा में पेश किया है। इस बिल से भविष्य में डिजिटल ट्रांजेक्शन करने पर MDR लग सकता है।  सरकार अगर आगे तय करेगी है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन पर कारोबारियों को कितना बिल देना होगा।अभी यह बिल लागू नहीं है और न ही इसकी कोई तारीख तय है। मौजूदा नियमों के अनुसार यह चार्ज आम लोगों के लिए नही है। सरकार का कहना है इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप टिकाऊ बनाने में सहायता मिल सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह चार्ज बड़े कारोबारियों और उच्च संस्थानो के  2000 से ज्यादा लेनदेन पर लागू होगा। यही पर बात करे आम लोगों और आम कस्टमर, छोटे मोटे दुकानदारों को इस चार्ज से छूट मिलेगी। इनको 2000 से ज्यादा लेनदेन करने पर चार्ज नहीं लगेगा।

मोहन भागवत ने Gen Z से की बात , राहुल गांधी बोले हम छात्रों के साथ हैं आंदोलन किसी राज्य और किसी की सरकार में हो रहा हो।

   

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत मुम्बई में IIMUN के कार्यक्रम में Gen Z और Gen Alpha से संवाद किया। जिसमें आंदोलन से जुड़े विषयों पर बात हुई। पेपर लीक पर संवाद हुआ। छात्रों के सवालों पर मोहन भागवत ने शालीनतापूर्वक एक एक करके सवाल का उत्तर दिया। इन सारे सवालों के उत्तर एक एक करके समझेंगे।

  जब नीट पेपर लीक के विरोध में CJP ने आंदोलन शुरू किया जिसमें पूरे देश के युवा शामिल हुए थे। जिसपर सरकार में बैठे लोग इन्हीं छात्रों को दूसरे देशों का एजेंट, गुंडे और दहशतगर्द यहां तक गटर छाप कहा गया। यह अपने आप में बहुत शर्मनाक है और यह आरोप लगाया गया कि आंदोलन फॉरेन फंडिंग पर चल रहा है। इतने सारे आरोपों के बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

  जब मोहन भागवत ने छात्रों से बात किया और कहा जो हमारी Gen Z और Gen Alpha जेनरेशन है वह देश के  आम लोगों से ज्यादा जागरूक है। ये लोग किसी दूसरे देश के एजेंट नहीं हैं ये सब हमारी अपनी नई जेनरेशन है। ये अपने हको के लिए आंदोलन कर रहे हैं और ये इनका अधिकार है। हमें इनकी मांगो को समझना चाहिए न इन्हें अपना विरोधी ।

     उन्होंने ने बहुत महत्वपूर्ण बातें कही Gen Z और Gen Alpha को लेकर लेकिन जो सरकार में बैठे लोगों को समझ नहीं आ रही है। उन्होंने ने कहा ये अपनी  नई जेनरेशन के युवा हैं और इनमें इतनी समझ है क्या गलत और क्या सही है। ये कोई सरकार का विरोध नहीं कर रहे हैं ये खराब सिस्टम का विरोध कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा हम छात्रों के साथ हैं 

राहुल गांधी झारखंड में लोक सेवा आयोग JPSC परीक्षा और JSSC परीक्षा में हुए घोटाले और अनियमित भर्ती को लेकर बोले हम छात्रों के साथ हैं। हम शुरू से ही छात्रों के मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने ने कहा पेपर लीक कही भी और किसी की सरकार में हो चाहे वह सरकार कांग्रेस ,बीजेपी सपा, की हो हम छात्रों के साथ हैं। इसके बाद छात्रों से बात भी की। इससे पहले कुछ समय तक चुप रहने से लग रहा था कि राहुल गांधी इस पर क्यों नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने छात्रों के लिए लगातार आंदोलन किया है और लगातार छात्रों से बात कर रहे हैं।

Neet paper leak पर बड़ा खुलासा CBI ने दी 94 पन्नों की रिपोर्ट ।


    Neet paper leak 2026 देश और दुनिया में बहुत चर्चा में रही। जिसको लेकर छात्रों ने जंतर मंतर पर आंदोलन किया।भूख हड़ताल अनशन किया और लाठियां खाई लेकिन शांतिपूर्वक आंदोलन को सफल बनाया। नीट पेपर लीक देश का बड़ा मुद्दा बन चुका था। जिसकी वजह re neet exam हुआ और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

    अब वही बड़ा खुलासा हुआ है नीट यूजी पेपर लीक को लेकर जिसमें जांच कर रही टीम ने 94 पन्नों की चार्जशीट जारी किया है। जिसमें खुलासा हुआ है कि कैसे पेपर लीक हुआ। जांच कर रही टीम ने बताया ,पेपर लीक करने का तरीका बहुत साधारण है। जिसमें NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के एक्सपर्ट्स ने पेपर बनाया और उसके बाद याद करके एक पर्ची पर लिखने बाद NCRT की बुक में मार्क लगा दिया।

  सीबीआई के 94 पेजेस के डाक्यूमेंट में जानकारी दी गई है जिसमें तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने कथित तौर से पेपर लीक किया है। इसमें मुख्य रूप से तीन ही दोषी नहीं है इसके साथ और अन्य दोषी है जिसका चार्जशीट में जिक्र किया गया है।

  सीबीआई की जांच के बाद मुख्य रूप से पेपर लीक करने वाले तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के नाम सामने आए हैं। किमेस्ट्री सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स PV कुलकर्णी, बॉटनी सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स मनीष मंधारे और फिजिक्स सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स मनीषा हवलदार  शामिल हैं  सीबीआई के कहा ये तीन ही नहीं जो 13 गिरफ्तार हुए हैं उसमें से ये तीन हैं।

  सीबीआई की ओर से आरोप लगाया गया है ये तीनों सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स पेपर बनाए हुए प्रश्नों को याद किया। इसके बाद एक पर्ची में लिखा ।इसके बाद बुक चैप्टर में प्रश्नों से संबंधित पैराग्राफ में टिक लगाया। इसके बाद भरोसेमंद बिचवलियों और कोचिंग संस्थाओं को एग्जाम डेट से पहले पहुंचाया। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने कथित तौर पर पेपर लीक के दोषी है। इसी तरह इन लोगों ने कई सवालों को लीक किया।

JPSC विवाद में बड़ा एक्शन, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार

  झारखण्ड में अनियमित जेपीएससी परीक्षा भर्ती को लेकर लगातार छात्र आंदोलन बढ रहा था। आज 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने एलान कि...