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सोमवार, 10 अगस्त 2026

JPSC विवाद में बड़ा एक्शन, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार

  झारखण्ड में अनियमित जेपीएससी परीक्षा भर्ती को लेकर लगातार छात्र आंदोलन बढ रहा था। आज 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने एलान किया था। इसके छात्र लिए आगे बढ़ रहे थे। छात्र बैरिकेडिंग हटा कर आगे बढ़ने के कोशिश कर रहे थे तभी पुलिस छात्रों पर वाटर कैनन चलाया गया। टियर गैस और लाठीचार्ज भी किया गया। इसके बावजूद भी छात्र आगे बढ़ते रहे। छात्र दूसरे रास्तों से विधानसभा तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं और लगातार पुलिस बल का प्रयोग कर रही है। अच्छी बात यह कि जंतर मंतर जैसे हालात देखने को नहीं मिले। 

  छात्रों ने कहा है आंदोलन लगातार जारी रहेगा।जब तक सरकार हमारी मांगे नहीं सुनेगी। सरकार की कार्यवाही दिखाई दे रही है लेकिन छात्रों को भरोसा नहीं है। JPSC मामले चल रही सीआईडी जांच में बड़ा एक्शन लिया गया है।जिसमें जेपीएससी पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते को गिरफ्तार कर लिया है। छात्रों का कहना है इसकी जांच सीबीआई करे और 14वीं परीक्षा रद्द हो।

असम अरुणाचल सीमा पर फायरिंग से मचा हड़कंप, बढ़ाई गई बॉर्डर की सुरक्षा

    आज सुबह अरुणाचल प्रदेश के धेमाजी जिले में फायरिंग की गई जिसमें असम के 18 लोगों के घायल होने की खबर है और 4 गंभीर रूप से घायल है जिनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह मामला कथित तौर पर अतिक्रमण का है । जिसमें बाहर के कुछ लोग आकर मिगमंग बस्ती में अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें दुर्गेश्वर पाटिर, रोहित डोले, नागराज डोले, बिग्गेश्वर पाहिर, पामे पेगू, संजय त्यायोंग और जन डोले समेत अन्य लोग घायल हुए हैं। इस घटना के बाद इन लोगों गोगामुख ग्रामीण हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

 इस घटना के बाद सीमा की सुरक्षा बढ़ा दी गई और अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस इस घटना की जांच कर रही है और इसके पीछे की परिस्थिति को समझने की कोशिश कर रही है। हालांकि कथित तौर पर अतिक्रमण का मामला माना जा रहा है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है,इसके पीछे कौन लोग हैं और किन हथियारों का इस्तेमाल किया। फिलहाल सीमा के क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।

रविवार, 9 अगस्त 2026

कौन हैं देवेन्द्र नाथ महतो? JPSC - JSSC आंदोलन से चुनावी राजनीति तक पूरा सफर

JPSC और JSSC पेपर लीक और छात्रों का प्रदर्शन

 झारखंड में 14 वीं JPSC परीक्षा भर्ती में अनियमित रूप से हो घोटालों को लेकर लगातार आंदोलन चल रहा है। जिसका आज 17 वां दिन हो गया है छात्र आंदोलन और सरकार के बीच बात चीत चल रही है लेकिन अभी तक सरकार किसी निर्णायक मोड़ तक नहीं पहुंची है। आंदोलन लगातार बढ़ता जा रहा है और छात्र जुड़ते जा रहे हैं। छात्रों का कहना है जब तक सरकार हमारी मांगे को नहीं सुनती है हम यहां से उठने वाले नही हैं। सरकार के रवैए के बाद छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा का घेराव करने का, छात्रों से अपील किया है और आंदोलन को सफल बनाया जा सके। ऐसी हालत देश के हर एक राज्य में है। छात्रों का हाल बेहाल है, मगर नेताओं के कान पर जूं तक नहीं रेंगती है। जब शिक्षा बजट का सारा पैसा वोट खरीदने में लगा देंगे तो देश में छात्रों, कॉलेज और यूनिवर्सिटी का यही हाल होगा। छात्रों का कहना जब से झारखंड नया राज्य बना है तभी से भ्रष्टाचार, पेपर लीक घोटाला,  परीक्षा भर्ती घोटाला आज तक फलता फूलता रहा है।

देवेन्द्र नाथ महतो का बिगड़ता स्वास्थ्य 

आंदोलन लगातार पिछले 17 दिनों से चल रहा है। इस आंदोलन में भूख हड़ताल कर रहे देवेन्द्र नाथ महतो को 8 दिन पूरे हो गए हैं। सोनम वांगचुक के कहने पर इन्होंने पानी पिया। उनकी हालत लगातार गिरती जा रही है और डॉक्टर की टीम वाइटल चेक कर रही है। आठ दिनों मे लगभग 8-10 किलो वजन कम हो गया है। सुगर लेवल बढ़ गया है। हालत ज्यादा गंभीर होने पर डॉक्टर की जांच टीम पहुंची और उसके साथ सिटी SP, ADM और अन्य अधिकारी पहुंचे जिन्होंने उन्हें हॉस्पिटल भर्ती होने की सलाह दी। लेकिन देवेन्द्र नाथ महतो ने मना कर दिया। उन्होंने कहा 'इसी सफेद कफ़न से लिपट जाएंगे लेकिन यहां से नही उठेंगे' जब तक सरकार छात्रों की मांगे नहीं सुनेगी। सरकार द्वारा गठित की गई टीम के मंत्री सुदीब्य कुमार सोनू, मंत्री दीपिका पांडे, मंत्री चमरा लिंडा और मंत्री संजय प्रसाद यादव ने वीडियो कॉल पर बात की और देवेन्द्र नाथ महतो का हालचाल जाना और अनशन तोड़ने का आग्रह किया।

मीडिया के पूछे जाने पर देवेन्द्र नाथ महतो ने कहा सरकार द्वारा गठित की गई टीम और आंदोलनकारी छात्रों के बीच जो भी जेएसएससी और जेपीएससी पेपर भर्ती को लेकर बात चीत एक सकारात्मक दिशा में हुई है।

राजनीतिक शुरूवात 

देवेन्द्र नाथ महतो अपने राजनीतिक करियर की शुरूवात 2015 छात्र राजनीत से की थी। ये छात्रों और सामाजिक मुद्दों को लेकर ज्यादा एक्टिव रहते हैं। ये झारखण्ड के रांची जिले से आते हैं। इनका ग्रेजुएशन डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी रांची से हुआ है।झारखण्ड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) संगठन के केन्द्रीय वरीय उपाध्यक्ष है। 2024 में इन्होंने विधानसभा चुनाव JLKM के उम्मीदवार के रूप मे  सिल्ली विधानसभा से लड़ा और तीसरी स्थान पर रहे। इसके इन्होंने दोबारा रांची लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप चुनाव लड़ा मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1.32 लाख वोट मिले जिसमें ये तीसरे स्थान पर थे।


भारत का स्वदेशी project kusha तैयार! दुश्मन के हवाई खतरों पर होगी पैनी नजर

Project kusha

भारत के एयर डिफेंस सिस्टम प्रोजेक्ट कुश (Kusha) का किया गया सफल परीक्षण। भारत लगातार अपने डिफेंस सिस्टम को मजबूत कर रहा है। भारत ने ऐसा ब्रह्मास्त्र बनाया है जिसका लोहा पूरी दुनिया मान रही है। बहुत सारे देश इसे खरीदने के लिए कतार में खड़े हैं। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के बाद अब भारत अस्त्र बनाया है जो हवा से हवा में हमला करने के सक्षम है। भारत के रक्षा वैज्ञानिकों ने 23 जुलाई 2026 को एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत बनाने केलिए कुश सिस्टम के इंटरसेप्टर का सफल परीक्षण किया गया है। प्रोजेक्ट कुश को तीन कैटेगरी में बांटा गया है। जिसकी अलग अलग दूरी के इंटरसेप्टर है जिसमें 150 km, 250 km और 350 km की दूरी शामिल है। इसको DRDO ने बनाया है, यह इंटरसेप्टर मिसाइल long Range surface to air टारगेट करती है। इस मिसाइल का टारगेट ड्रोन, हवाई हमला,क्रूज मिसाइल और अन्य लक्ष्य हो सकते हैं।

  भारत ने अपने ही घर में तैयार किया लंबी दूरी की इंटरसेप्टर मिसाइल प्रणाली है जो धरती से जाकर आसमान में टारगेट को गिराने की क्षमता रखती है। प्रोजेक्ट कुश के परीक्षण के बाद दुनिया में इस प्रोजेक्ट की चर्चा तेज हो गई। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस सफल परीक्षण के बाद S 400 मिसाइल और इजराइल की बराक जैसी इंटरसेप्टर मिसाइलों पर भारत की निर्भरता कम हुई है। चीनी मीडिया ने भी इसे कवर किया है। 23 जुलाई को ओडिशा के एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किये गए परीक्षण में कुश सिस्टम ने सिमुलेटेड हाई स्पीड और ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को इंटरसेप्ट किया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने कंट्रोल, कमांड, रडार और गाइडेंस सिस्टम को परखा गया। भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है जिनके पास ऐसी इंटरसेप्टर मिसाइल है। ये मिसाइलें एयर स्पेस को सुरक्षा कवच देती हैं।

प्रोजेक्ट कुश क्रूज मिसाइल को करेगा ध्वस्त 

प्रोजेक्ट कुश को DRDO ने निजी और औद्योगिक क्षेत्र के सहयोग से विकसित किया है। इसका उद्देश क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य हमलों से देश को बचाएगा । यह प्रणाली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मिशन सुदर्शन चक्र के तहत बहुस्तरीय राष्ट्रीय सुरक्षा कवच प्रणाली में शामिल होगी। मिशन सुदर्शन चक्र का लक्ष्य 2035 तक रणनीतिक और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों, मिसाइलों, स्टील्थ फाइटर जेट  और प्रिसिजन गाइडेड जैसे वेपन्स के खतरों से बचने के बहुस्तरीय ढांचे को तैयार करने में, कुश को इसमें शामिल किया गया है जो इसकी सुरक्षा को और मजबूत करेगा और यह एक नई परत बनाकर देश की ताकत को बढ़ाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है प्रोजेक्ट कुश 

प्रोजेक्ट कुश भारत की सुरक्षा को मजबूत बनाएगा और आसमान में बाज की तरह पैनी नजर रखेगा। प्रोजेक्ट कुश में इसको बनाने की तीन तरह की प्लानिंग है। M 1 जिसकी स्पीड 150 km, M 2 जिसकी स्पीड 250 km और M 3 जिसकी स्पीड 350-400 km तक होगी। इसकी को खासियत है वही इसकी क्षमता को बढ़ाती है यह Long Range surface to air दुश्मन को निशाना बना सकती है। क्रूज मिसाइल, ड्रोन, हवाई हमला और अन्य लक्ष्यों को आसानी से इंटरसेप्ट कर सकती है। अब सुरक्षा हथियारों जैसे S 400 और बराक जैसी विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी।

  भारत अपनी रणनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए लगातार डिफेंस क्षमता को मजबूत कर रहा। इसी क्रम भारत ने लगातार कई मिसाइलों का परीक्षण किया है  जिसमें अग्नि4 / agni-IV मीडियम रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है जिसकी क्षमता 4,000 km है।इसको कही भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। इस मिसाइल को आसानी डिप्लॉय किया जा सकता है।


शनिवार, 8 अगस्त 2026

AI ने बनाया वायरस वैज्ञानिकों ने लैब में किया टेस्ट- क्या इंसानों के लिए होगा खतरा

 

AI virous related image

 AI ने अब वो कर दिखाया जो इससे पहले कभी किसी ने नहीं कर पाया। इससे AI की ताकत का अनुमान लगाया जा सकता और यह क्या कर सकता है।AI अब केवल चैट बोट, ऐप्स, वेबसाइट और आम कामों तक ही सीमित नहीं रहा। अब AI नए इनोवेशन में भी वैज्ञानिकों की सहायता कर रहा है। AI की ताकत से वैज्ञानिकों ने चमत्कार कर दिया है। अमेरिका की एक स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी और आर्क इंस्टीट्यूट में शोध कर रहे बैज्ञानिकों ने AI मॉडल की मदद से एक वायरस का DNA डिजाइन किया है। जो कभी प्रकृति में नहीं पाए गए हैं। बैज्ञानिकों ने ऐसा वायरस बनाया है जिसमें 16 बैक्टीरिया को नष्ट करने की क्षमता है। यह AI के क्षेत्र में बड़ी महान उपलब्धि माना जा रहा है। हालांकि अच्छी बात यह है जो वायरस अभी वैज्ञानिकों ने AI की मदद से बनाया है वह वायरस इंसानों ,प्लांट और जानवरों को संक्रमित नहीं करेगा। यह रिसर्च बैक्टीरियोफेज पर आधारित है जो इंसानों को संक्रमित नहीं करता है।

किस तरह AI ने बनाया वायरस का DNA 

यदि हम इस रिसर्च के अनुसार बात करे तो इसमें वैज्ञानिकों ने Evo1 और Evo 2 नाम के दो AI मॉडल का प्रयोग किया गया। यह लगभग AI चैट बोट की तरह काम करता है। जैसे चैट gpt शब्द का अनुमान लगाता है ।इसी तरह Evo1 और Evo 2 मॉडल भी DNA की जेनेटिक संरचना का अनुमान लगाकर डिजाइन को तैयार करता है। इसी तरह वैज्ञानिकों ने पहले इस मॉडल को करोड़ों प्राकृतिक जीनोम तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया।ताकि हम इससे शुद्ध जीनोम तैयार कर सके। इसके बाद उन्हें &phi,'X174 और उससे जुड़े वायरस को देखा गया। आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस की मदद से हजारों संभावित बनाए गए डिजाइन बनाए गए जिसमें से केवल 300 डिजाइन को चुनकर लैब में DNA 🧬 बनाया गया। परीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने देखा कि पेट्री डिश में बैक्टीरिया के बीच क्लियर स्पॉट हैं यह एक संकेत है कि ये वायरस सक्रिय हैं और बैक्टीरिया को नष्ट कर रहे हैं।

एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस से मेडिकल में होगी नई क्रांति 

वैज्ञानिकों की मदद से AI ने जो वायरस बनाया है इससे मेडिकल फील्ड में एक नई उपलब्धि मिली है। वैज्ञानिकों का कहना है भविष्य में हम इन वायरस का इस्तेमाल उन बैक्टिरियल संक्रमण पर करेंगे जिस पर एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता है। अगर यह शोध सफल रहा तो दवा प्रतिरोधी संक्रमण के इलाज का नया रास्ता कुल सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वायरस को इस तरह बनाया गया है जिससे इंसानों को कोई खतरा नहीं है। ऐसा कोई डेटा नहीं दिया गया है जिससे भविष्य मे कोई खतरा पैदा हो। भविष्य में आने वाली नई बीमारियों का इलाज किया जा सके और इनको रोका जा सके।

इस रिसर्च ने बढ़ाई इंसानो की चिंता 

इस रिसर्च ने एक नई बहस छेड़ दी है और इससे बायो सिक्योरिटी का खतरा बढ़ा है और इसका गलत प्रयोग होने की संभावना है।वैज्ञानिकों और आम लोगों का अलग अलग कहना है। इस रिसर्च ने मेडिकल फील्ड में एक महान उपलब्धि तो हासिल की है लेकिन भविष्य की चिंता बढ़ा दी है। जो AI इंसानों के मदद से वायरस बना सकता लेकिन भविष्य में इसी AI की मदद से ऐसे वायरस बनाए जा सकते हैं जो इंसानों, जानवरों और पेड़ों के लिए खतरा हो सकते हैं। कुछ सालों के बाद हमे सुनाई देगा इस वायरस से खतरनाक महामारी फैल रही है और इस देश की लैब में बनाया गया। अभी भी ऐसे वायरस लैब्स में महजूद है, सही समय आने पर इनका प्रयोग किया जाएगा और ऐसी रिसर्च सालों से चल रही हैं।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी के अफसर छात्रों से संवाद करेंगे

   

परीक्षा पर चर्चा करेंगे योगी जी के अफसर

नीट यूजी पेपर लीक और जंतर मंतर पर आंदोलन होने के बाद अब मुख्यमंत्री योगी की सरकार छात्रों के लिए बड़ा दिल दिया है। योगी के अफसर छात्रों से मिलेंगे और उनसे संवाद करेंगे। सरकार की कोशिश है छात्रों के वर्ग को खुश किया जाय। सरकार का कहना है जब प्रशासनिक अधिकारी छात्रों से बात करेंगे तो इससे छात्रों को प्रेरणा मिल सकती है इसके साथ ही काउंसलिंग की जा सकती। इस संवाद में IAS, IPS और IFS अफसर छात्रों से मिलेंगे। मुख्य सचिव SP गोयल की तरफ से जारी पत्र में डीएम को आदेश दिया गया। इसमें डीएम युवा IAS, IPS और IFS के अफसरों के लिए एक महीने तक स्कूलों में आने जाने की व्यवस्था होगी। ये स्कूल सरकारी या प्राइवेट हो सकते हैं।

  ये अधिकारी स्कूल मैनेजमैंट से बात करके इसके बाद संवाद और प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया जाएगा। जिसमें छात्रों की काउंसलिंग करेंगे, दौरान यूपीएससी, नीट, आईपीएस, आईएस और जेईई मेन्स जैसे परीक्षाओं पर चर्चा होगी और राज्य सरकार की सभी योजनाओं के बारे में बताया जाएगा। इस काम के लिए डीएम अपना एक समय निश्चित करेंगे और इसी समय पर सारी जानकारी प्रशासन को दी जाएगी। कौन अधिकारी कब क्या कर रहा है यह डीएम की जिम्मेदारी होगी वह आजाद है इसको और अच्छा बनाने में।

 मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सरदार बल्लभ भाई पटेल औद्योगिक और रोजगार क्षेत्र की स्थापना में तेजी लाने को कहा। मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग को हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज पहुंचाने पर विचार करने और साथ खेल सुविधाओं को ध्यान रखने पर जोर दिया है। इससे युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखने में मदद मिलेगी। यहां पर ऐसे कई बड़े सवाल उठ सकते हैं ये सब चुनाव आने के समय ही क्यों होता है।अगर यही इससे पहले होता तो कितना अच्छा रहता।

शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

क्या UPI से ट्रांजेक्शन करने पर लग सकता है चार्ज सरकार ने लोकसभा में पेश किया बिल

   


सरकार ने लोकसभा में ऐसा बिल पेश किया है जिसमें होने वाले यूपीआई के ट्रांजेक्शन सहित ई पेमेंट्स पर चार्ज लगाने के  संभवतः नए रास्ते खुल सकते हैं। यह चार्ज मर्चेंट डिस्काउंट रेट MDR के रूप में लगा सकेंगे। अभी UPI से MDR पेमेंट करने पर चर्चा नहीं लगता। अभी सरकार की तरफ साफ नहीं किया गया है कि MDR पेमेंट पर कितना चार्ज और कब लगेगा। अभी यह एक कानूनी प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया है। आने वाले समय में तय होगा किस पर कितना चार्ज लगेगा। UPI सहित किन डिजिटल MDR पेमेंट करने पर यह चार्ज लगेगा या नहीं अभी इसका न ही शुल्क तय हुआ है और न ही इसकी कोई तारीख तय हुई है। 

  बैंक और पेमेंट सर्विस देने वाली इकाइयां डिजिटल ट्रांजेक्शन के बदले में कारोबारियों से फीस लेती हैं उसे MDR कहते हैं। मर्चेट डिस्काउंट रेट MDR केवल डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगता है। UPI से ट्रांजेक्शन करने पर यह चार्ज नहीं लगता है।

लेकिन उपभोक्ता को नही देना होगा चार्ज 

     मौजूदा नियमों के तहत कोई भी कारोबारी किसी कस्टमर से MDR नहीं ले सकता, इसलिए UPI पेमेंट पर MDR लगने पर भी कस्टमर से इसे नही लिया जा सकेगा। यह केवल कारोबारियों पर लगेगा। आने वाले समय में तय होगा कितना चार्ज और कब देना होगा। अभीतक रिपोर्ट के अनुसार यह साफ नहीं किया गया है कि यह किस प्रकार के डिजिटल ट्रांजेक्शन पर लगेगा या नहीं और आम लोगों के UPI ट्रांजेक्शन पर कोई बात नहीं की गई है।

MDR लागू हुआ तो क्या बदलेगा

 फिलहाल सरकार ने इस पर कोई ऐसी बात नहीं की है कि यह कब लागू होगा या नहीं।यह विधेयक केवल अभी लोकसभा में पेश किया है। इस बिल से भविष्य में डिजिटल ट्रांजेक्शन करने पर MDR लग सकता है।  सरकार अगर आगे तय करेगी है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन पर कारोबारियों को कितना बिल देना होगा।अभी यह बिल लागू नहीं है और न ही इसकी कोई तारीख तय है। मौजूदा नियमों के अनुसार यह चार्ज आम लोगों के लिए नही है। सरकार का कहना है इससे डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप टिकाऊ बनाने में सहायता मिल सकती है।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह चार्ज बड़े कारोबारियों और उच्च संस्थानो के  2000 से ज्यादा लेनदेन पर लागू होगा। यही पर बात करे आम लोगों और आम कस्टमर, छोटे मोटे दुकानदारों को इस चार्ज से छूट मिलेगी। इनको 2000 से ज्यादा लेनदेन करने पर चार्ज नहीं लगेगा।

मोहन भागवत ने Gen Z से की बात , राहुल गांधी बोले हम छात्रों के साथ हैं आंदोलन किसी राज्य और किसी की सरकार में हो रहा हो।

   

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अध्यक्ष मोहन भागवत मुम्बई में IIMUN के कार्यक्रम में Gen Z और Gen Alpha से संवाद किया। जिसमें आंदोलन से जुड़े विषयों पर बात हुई। पेपर लीक पर संवाद हुआ। छात्रों के सवालों पर मोहन भागवत ने शालीनतापूर्वक एक एक करके सवाल का उत्तर दिया। इन सारे सवालों के उत्तर एक एक करके समझेंगे।

  जब नीट पेपर लीक के विरोध में CJP ने आंदोलन शुरू किया जिसमें पूरे देश के युवा शामिल हुए थे। जिसपर सरकार में बैठे लोग इन्हीं छात्रों को दूसरे देशों का एजेंट, गुंडे और दहशतगर्द यहां तक गटर छाप कहा गया। यह अपने आप में बहुत शर्मनाक है और यह आरोप लगाया गया कि आंदोलन फॉरेन फंडिंग पर चल रहा है। इतने सारे आरोपों के बावजूद शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

  जब मोहन भागवत ने छात्रों से बात किया और कहा जो हमारी Gen Z और Gen Alpha जेनरेशन है वह देश के  आम लोगों से ज्यादा जागरूक है। ये लोग किसी दूसरे देश के एजेंट नहीं हैं ये सब हमारी अपनी नई जेनरेशन है। ये अपने हको के लिए आंदोलन कर रहे हैं और ये इनका अधिकार है। हमें इनकी मांगो को समझना चाहिए न इन्हें अपना विरोधी ।

     उन्होंने ने बहुत महत्वपूर्ण बातें कही Gen Z और Gen Alpha को लेकर लेकिन जो सरकार में बैठे लोगों को समझ नहीं आ रही है। उन्होंने ने कहा ये अपनी  नई जेनरेशन के युवा हैं और इनमें इतनी समझ है क्या गलत और क्या सही है। ये कोई सरकार का विरोध नहीं कर रहे हैं ये खराब सिस्टम का विरोध कर रहे हैं।

राहुल गांधी ने कहा हम छात्रों के साथ हैं 

राहुल गांधी झारखंड में लोक सेवा आयोग JPSC परीक्षा और JSSC परीक्षा में हुए घोटाले और अनियमित भर्ती को लेकर बोले हम छात्रों के साथ हैं। हम शुरू से ही छात्रों के मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने ने कहा पेपर लीक कही भी और किसी की सरकार में हो चाहे वह सरकार कांग्रेस ,बीजेपी सपा, की हो हम छात्रों के साथ हैं। इसके बाद छात्रों से बात भी की। इससे पहले कुछ समय तक चुप रहने से लग रहा था कि राहुल गांधी इस पर क्यों नहीं बोल रहे हैं। उन्होंने छात्रों के लिए लगातार आंदोलन किया है और लगातार छात्रों से बात कर रहे हैं।

Neet paper leak पर बड़ा खुलासा CBI ने दी 94 पन्नों की रिपोर्ट ।


    Neet paper leak 2026 देश और दुनिया में बहुत चर्चा में रही। जिसको लेकर छात्रों ने जंतर मंतर पर आंदोलन किया।भूख हड़ताल अनशन किया और लाठियां खाई लेकिन शांतिपूर्वक आंदोलन को सफल बनाया। नीट पेपर लीक देश का बड़ा मुद्दा बन चुका था। जिसकी वजह re neet exam हुआ और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

    अब वही बड़ा खुलासा हुआ है नीट यूजी पेपर लीक को लेकर जिसमें जांच कर रही टीम ने 94 पन्नों की चार्जशीट जारी किया है। जिसमें खुलासा हुआ है कि कैसे पेपर लीक हुआ। जांच कर रही टीम ने बताया ,पेपर लीक करने का तरीका बहुत साधारण है। जिसमें NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) के एक्सपर्ट्स ने पेपर बनाया और उसके बाद याद करके एक पर्ची पर लिखने बाद NCRT की बुक में मार्क लगा दिया।

  सीबीआई के 94 पेजेस के डाक्यूमेंट में जानकारी दी गई है जिसमें तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने कथित तौर से पेपर लीक किया है। इसमें मुख्य रूप से तीन ही दोषी नहीं है इसके साथ और अन्य दोषी है जिसका चार्जशीट में जिक्र किया गया है।

  सीबीआई की जांच के बाद मुख्य रूप से पेपर लीक करने वाले तीन सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के नाम सामने आए हैं। किमेस्ट्री सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स PV कुलकर्णी, बॉटनी सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स मनीष मंधारे और फिजिक्स सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स मनीषा हवलदार  शामिल हैं  सीबीआई के कहा ये तीन ही नहीं जो 13 गिरफ्तार हुए हैं उसमें से ये तीन हैं।

  सीबीआई की ओर से आरोप लगाया गया है ये तीनों सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स पेपर बनाए हुए प्रश्नों को याद किया। इसके बाद एक पर्ची में लिखा ।इसके बाद बुक चैप्टर में प्रश्नों से संबंधित पैराग्राफ में टिक लगाया। इसके बाद भरोसेमंद बिचवलियों और कोचिंग संस्थाओं को एग्जाम डेट से पहले पहुंचाया। सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने कथित तौर पर पेपर लीक के दोषी है। इसी तरह इन लोगों ने कई सवालों को लीक किया।

गुरुवार, 6 अगस्त 2026

तुकाराम मुंडे की FDA की कार्यवाही पर Bombay High Court सख्त और अगले दिन कोर्ट की canteen पर लगा ताला


  यह मामला करीब 3 हफ्ते पहले का है। जब महाराष्ट्र के FDA (food and drugs administration)  department के IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे ने प्राइवेट बड़े बड़े होटलों ,रेस्टोरेंट और कैंटीनों में छापा मारा और बंद कर दिया। ये सारे होटल,  FASSI के मानक नियमों का पालन नहीं कर रहे थे। इस समय मुम्बई की पुलिस से ज्यादा FDA की चर्चा हो रही है और इन्हें महाराष्ट्र FDA का सिंघम कहा जा रहा है। FDA जो खाने का सामान और ड्रग्स की गुणवत्ता की देखभाल करता।

  देश में लगातार बढ़ रहे मिलावटी पनीर ,दूध से बने उत्पादों पर रोक लगाना। इसके अलावा रेस्टोरेंट, हॉटल, कैंटीन और बेकरी जो भी खाद्य सुरक्षा मानक नियमों का पालन नहीं कर रहा उसके लाइसेंस को रद्द किया जा रहा है इसी क्रम में उन्होंने ने मुम्बई के बड़े जाने माने कैंटीन,होटल और रेस्टोरेंट का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुम्बई में 6 होटेल्स, रेस्तरां , बेकरी और क्लब्स का लाइसेंस निलंबित कर दिया है इसी तरह अलग अलग जगहों पर छापा मारा और लाइसेंस निलंबित कर दिया। कुछ का तो कैंसिल ही कर दिया। स्कूल ,कॉलेज से दूर लगभग 50 मीटर दूरी पर गुटका पान मसाला की दुकान होनी चाहिए।

   कुछ लोग जिनके लाइसेंस बंद या निलंबित हुए कोर्ट पहुंच गए जिसकी सुनवाई 2 अगस्त को हुई।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि प्राईवेट होटल और रेस्टोरेंट को टारगेट करके बंद किया जा रहा है।कोर्ट का कहना था कि प्राइवेट और सरकारी रेस्टोरेंट और होटल के लिए अलग नियम है। कुछ लोगों की दलील है कि बिना नोटिस दिए रेस्टोरेंट को बंद कर दिया गया।इससे पहले सुधारने का मौका दिया जाना चाहिए।

    इसके अगले ही दिन IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे अपने आला ऑफिसरों के साथ बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे और वहां कैंटीन में छापा मारा और ये कैंटीन खाद्य सुरक्षा मानक नियमों पर खरे नहीं उतरे और उनको सील कर दिया। इसके लिए बड़ा जिगरा होना चाहिए। इसके पहले ये हेल्थ डिपार्टमेंट में थे वहां भी डॉक्टर और नर्स सब समय पर पहुंच जाते थे। ये जहां भी जाते अपनी छाप छोड़ देते हैं।

  ये 2005 बैच के IAS अधिकारी है जो महाराष्ट्र के कैडर जिले बीड से एक सामान्य किसान परिवार से आते हैं। इनकी UPSC all India rank 20 थी। ये अपने कार्यकाल 21 वर्षों में अब तक 25 बार ट्रांसफर (तबादला) हो चुका है। हो सकता ये अपने पूरे कार्यकाल में हॉफ सेंच्युरी पार कर दें। जाहिर सी बात है इनकी मंत्री मिनिस्टर से साठ गांठ नहीं होगी और अपने वसूलों के प्रति ईमानदार होंगे।तभी तो इतने ट्रांसफर हुए।

  इनके जैसे IAS अधिकारी देश के हर जिले में होते तो हमारा देश और भी तरक्की करता । 

झारखंड रांची में छात्रों द्वारा किया जा रहा आंदोलन क्या उनकी मांगे सरकार सुनने को तैयार

   


झारखण्ड रांची में JPSC और JSSC जैसे कई पेपर घोटालों और अनियमित भर्ती को लेकर लगातार छात्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है 14वे JPSC परीक्षा रद्द हो। CBI द्वारा या कोर्ट के सेटिंग जजों द्वारा इसकी  जाँच होनी चाहिए। झारखण्ड के सोनम वांगचुक कहे जाने वाले देवेन्द्र नाथ महतो कई दिनों से भूख हड़ताल अनशन पर हैं और छात्रों की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। 

 CJP के कुछ लोग इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं। जिस तरह उन्होंने जंतर मंतर पर जवाबदेही तय की और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। अब CJP की लोग झारखंड रांची में छात्रों के साथ मिलकर इस आंदोलन सफल बनाएंगे और सरकार की जवाबदेही तय करेंगे। शिक्षा व्यवस्था ये हाल है छात्र इन सब के सुधार के सड़क पर धरना दे रहा है।

  आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है यदि सरकार 10 तारीख तक हमारी मांगे पूरी नहीं करती है या बातचीत का रास्ता नहीं निकालती है। इसके बाद छात्र रांची से विधानसभा तक मार्च करेंगे। छात्रों में सरकार की खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है और हम मुख्यमंत्री का इस्तीफा मांगे इससे पहले सरकार को हमारी मांगे सुनना चाहिए। प्रदर्शन कर रहे छात्र अपने घरों को छोड़ कर दिन रात , धूप बारिश में सड़क पर बैठने को मजबूर हैं।

  आज मीडिया से बात करते हुए झारखंड के उच्च शिक्षा मंत्री Sudivya kumar ने बहुत सारी बातें कही JPSC परीक्षा भर्ती,रद्द और जांच को लेकर। उन्होंने ने कहा कि हेमंत सोरेन की सरकार तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है जो छात्रों से बात करने और उनकी मांगों को सुना जायेगा। CID जांच को लेकर भी कहा हमारी सरकार तेजी से कार्यवाही कर रही है जिसमें 19 लोगों से पूछताछ चल रही है।

  उन्होंने 14वे JPSC परीक्षा भर्ती को लेकर भी कई बातें कही, सरकार मान रही है कि परीक्षा में कुछ गड़बड़ी हुई है। इसके लिए जो भी दोषी होगा उसको कड़ी सजा मिलेगी और साथ में ये भी कहा इसके तार लखनऊ तक मिले हैं। उन्होंने ने भरोसा दिलाया कि छात्रों की मांगे पूरा करने के लिए सरकार हर संभव प्रयास करेगी। बातचीत के माध्यम से हम इसका समाधान निकलेंगे और जो भी छात्रों के हित में होगा सरकार करने की कोशिश करेगी।

शेख हसीना के भाषण से बांग्लादेश में हुआ बवाल,,शेख हसीना ने कहा मैं वापस अपने घर अपने लोगों के बीच आऊंगी।

   


बांग्लादेश में शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद बांग्लादेश में बवाल मच गया है। पूर्व क्रिकेट और आवामी लीग के पूर्व सांसद शकीब अल हसन के घर पर देर रात बुधवार को पेट्रोल बम फेंका गया। ये सब पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मीटिंग के बाद हुआ। यह हमला उनके पुस्तैनी घर मागुरा के केशवमोर इलाके में हुआ और घर पर तोड़ फोड़ भी की गई। यह सब दिल्ली में आयोजित दिल्ली के फॉरेन करेसपॉन्डेंट क्लब में मीटिंग के बाद हुआ।

   बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने शेख हसीना की बात पर नाराजगी जताई है और कहा है यह सब घरों को आग के हवाले करना है। यह सब मीटिंग में शामिल होने का नतीजा है, बांग्लादेश पर नव फासीवाद की झलक दिख रही है। आवामी लीग मान रही है कि बांग्लादेश में तानाशाही पनप रही है। सरकार आवामी लीग के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार कर रही है।

   शेख हसीना की प्रेस कॉन्फ्रेंस के पहले ही BNP,इस्लामी जमात, और NCP ने  इंटरनेशनल मीडिया आउटलेट्स को खुले आम धमकी दी थी और कहा प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई बातों को न ही छापे और न ही चलायें अगर इसके बावजूद ऐसा करते हैं तो हम कोर्ट जाएंगे और इससे जुड़े मामलों में मुकदमा दायर करेंगे। बयान में कहा गया, ये एक सोची समझी चाल हो सकती है और लोकतंत्र के बहाने आवामी लीग के सदस्यों पर नरसंहार और अत्याचार किया जा रहा है।

 प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शेख हसीना ने कहा हम अपने देश में दिसम्बर तक आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें पता है जेल में डाल दिया जाएगा और मार भी सकते। इसके बाद भी जान जोखिम में डाल कर मैं अपने देश अपने लोगों के पास आएंगे।हमारा उद्देश्य सरकार में वापस होना नहीं है। शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट होने के बाद 2024 से भारत में है और अब उनकी वापसी बांग्लादेश हो सकती है।


बुधवार, 5 अगस्त 2026

असम में बाढ़ का कहर लाखों लोगों का जीवन हुआ प्रभावित

 


असम में बाढ़ का कहर पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होने कारण,लाखों लोगों का  जन जीवन प्रभावित हुआ है। लोगों के खाने पीने का सामान तबाह हो गया है। गांव,घरों में पानी भर गया है और लोग छतों पर रह रहे हैं। बाढ़ के आने से बहुत कुछ नुकसान होने का डर रहता है। जानवरों को बह जाना, सांप कीड़ों का निकलना और जान मान का खतरा रहता है।फिलहाल अब बाढ़ का पानी धीरे धीरे कम हो रहा है।

  आंकड़ो के अनुसार असम में अब तक 89 से ज्यादा लोगों को बाढ़ के कारण जान गंवानी पड़ी है। यह कोई बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। इस बाढ़ के कारण लगभग 1.22 लाख लोग 10 जिलों में प्रभावित हुए हैं। राज्य और केंद्र सरकार की जो भी बचाव कार्य के लिए पुलिस होती है, NDRF और SDRF  लगातार बचाव अभियान चला रही हैं और लोगों को बचाया जा रहा है। इस बाढ़ से प्रभावित लगभग 1,53492 हैक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है और बाकी बची फसल पानी के साथ बह गई है। 

  सरकारी आंकड़े की बात करें तो 1.22 लाख में सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला जिला शिवसागर है जिसमें 55,200 इसके अलावा 34,050 चराईदेव और 20,200 लोग जोरहाट में प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है। बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों को राहत शिविर में लगभग 12000 लोगों को खाना पानी और दवाई आवश्यक सामग्री पहुंचाई जा रही है और 38 शिविर कैंप की स्थापना की गई है। हालांकि कई स्थानों पर राहत सामग्री की कमी के कारण लोगों ने शिकायत की है।

  इस बाढ़ के कारण लोगों का जीवन अस्त व्यस्त हो गया है इसकी साथ उनकी आजीविका बहुत प्रभावित हुई है। लोगों के घरों और छतों पर पानी पहुंच गया है। यह बाढ़ कोई इस साल नहीं पिछले कई सालों से हो रहा है और इसी तरह बचाव कार्य चलता आ रहा है। हर साल लोगों की मेहनत बाढ़ के पानी के साथ बह जाती है। वहां के छात्र संगठन का आरोप है कि सरकार कोई प्रभावी कदम नहीं उठती है। जिसके कारण बाढ़ नही रुकती है और हर साल तबाही का नया मंजर लाती है।

   सरकार की सहायता के साथ NGOs और फाउंडेशन भी असम बाढ़ में राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं। बहुत लोग इस बचाव राहत कार्य में सहयोग कर रहे हैं। हर साल यही बाढ़ का मंजर होता है। इसके बावजूद भी सरकार कोई प्रभावी कदम क्यों नहीं उठा रही है। यह केवल असम में ही नहीं पंजाब, बिहार के कुछ जिलों में हर साल यही मंजर होता है। सरकारें आई और बदल गई लेकिन यह मंजर नहीं रुका।

All India Paper Leak and Curruption, यह आरोप छात्रों द्वारा सरकार पर लगाए जा रहे और छात्र रो रहे हैं।

   


जब कहीं विकसित भारत की बात होती है तो सबसे पहले हमे अपनी शिक्षा व्यवस्था की हालत याद आती है। युवा छात्र पढ़ने के बजाय सड़को पर धरना दे रहे और रो रहे हैं। ये हाल देश के किसी एक राज्य में नहीं है और किसी एक पार्टी के शासन में नहीं है। ये पूरे देश में और सब पार्टियां इसमें शामिल हैं। बस ये लोग एक दूसरे पर आरोप लगाते रहते और काम तो करना नहीं है, कॉलेज में टीचर्स नहीं हैं। पेपर सही से करवा नहीं पा रहे हैं और अवैधानिक भर्तियां हो रही है। इसके बावजूद भी ये विकास की बात करते हैं। विकास कहां से होगा।

    अभी जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन सबने देखा कि कैसे युवा अपने मुद्दे और जिम्मेदारी समझ रहे हैं। लेकिन इन नेताओं की समझ से बाहर है कि युवाओं को अब पैसा नहीं अच्छी शिक्षा व्यवस्था चाहिए जो एक अच्छे राष्ट्र निर्माण की नींव होती है। कोई भी आगे तभी होता है जब वहां की शिक्षा व्यवस्था अच्छी होती है। जब जंतर मंतर पर प्रोटेस्ट हो रहा था तब पूरा विपक्ष छात्रों के साथ था और अपनी आवाज उठा रहा था। सभी की आवाज सुनी भी गई।

  इसी क्रम में हम देख रहे हैं, झारखंड रांची में JPSC, JSSC और अन्य पेपर लीक और भर्तियों बहुत बड़े पैमाने पर घोटाला हो रहा। बच्चों का कहना पैसे लेकर नौकरियां बांटी जा रही हैं।यह क्रम 2010 से लगातार चला आ रहा है। TDS जैसी बैकलिस्टेड कंपनी एक्जाम करवा रही है। जितने छात्रों हैं सबकी यही समस्याएं हैं। वहां के छात्र इस्तीफा भी नहीं मांग रहे हैं, वो तो बस जवाबदेही मांग रहे हैं। 

  झारखण्ड के सोनम वांगचुक कहे जाने वाले देवेन्द्र नाथ महतो ने भूख हड़ताल अनशन शुरू कर दिया,झारखंड में होने वाले परीक्षा में अनियमित भर्ती होने से इसका विरोध कर रहे हैं। झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महागठबंधन की सरकार है और हेमंत सोरेन शिक्षा मंत्री भी है। यहां पर विपक्ष में बीजेपी की सरकार है। लेकिन एक बात कुछ अजीब लग रही है ये यही राहुल गांधी है जो छात्रों के मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं और जनसभा कर रहे हैं। ऐसा क्या कारण है कि राहुल गांधी जी चुप हैं।

   यदि ये पार्टियां सच में लोगों के साथ है तो कही भी पेपर लीक हो,किसी राज्य में हो,  किसी की सरकार हो मुद्दे तो वही रहते हैं। युवा तो हर राज्य में सड़क पर है, उनकी कोई नहीं सुन रहा है। सारा विकास इनके भाषण में ही होता है। ये लोग छात्रों से बात करना नही चाहते हैं सुधार क्या करेंगे।

मंगलवार, 4 अगस्त 2026

Company ILGIM Electronic Chip Factory of a unit Gretor Noida में लगी भीषण आग और कई दमकल कर्मी हुए घायल

   


सोमवार देर रात ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-3 औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कंपनी ILGIM जो इलेक्ट्रॉनिक चिप बनाती है उसकी एक यूनिट PCB में भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां वहां पहुंची और बचाव कार्य में लग गए। छह दमकल की गाड़ियां समय पर पहुंची आग बहुत तेजी फैल रही थी लेकिन अचानक एक दीवार और लोहे का बीम गिर गया।

   पुलिस ने बताया दीवार और लोहे का बीम के गिरने से दो दमकल कर्मियों की जान चली गई है। जिसमें चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव। तीन दमकलकर्मी इसमें घायल हुए हैं चीफ कॉन्स्टेबल ड्राइवर राजपाल सिंह, फायरमैन मनीष कुमार और फायरमैन अमित कुमार गंभीर रूप से घायल है और हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

 पांच दमकल कर्मी घायल हुए और उनको जल्दबाजी में हॉस्पिटल पहुंचाया गया जहां डॉक्टर्स देखते  ही बता दिया दो लोग मर चुके हैं और तीन लोगों की हालत अब खतरे से बाहर है पुलिस ने कहा।

सोमवार, 3 अगस्त 2026

Illigal tariffs को लेकर America में trump को झटका 25 States ने किया Case

     


अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप पिछले कई सालों से अपनी मनमर्जी के मुताबिक illigal टैरिफ किसी भी देश पर लगा रहे हैं।अभी हाल के ही दिनों में चीन, भारत समेत और कई देश थे, जिनपर आयात टैरिफ 100% लगाया और इसके लिए बकायदा एक कानून भी पास करवा दिया। जो देश अपना उत्पाद अमेरिका भेज रहे थे और जिनपर पहले आयात टैरिफ 10 से 12% था। अब ट्रंप अपने ही देश में लोग ट्रंप को बेनकाब कर रहे हैं और इस टैरिफ को अवैध बता रहे हैं। अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के खिलाफ कोर्ट में केस दायर किया है। इन राज्यों में शामिल भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर लगे टैरिफ अवैध बताया गया है। इन राज्यों की मांग है कि टैरिफ को अभी रोका जाय और सारा अवैध टैरिफ का पैसा वापस किया जाय।

  राज्यों के अनुसार ट्रंप ने पिछले महीने में भारत समेत 59 यूरोपीय संघ देशों पर अपने मनमाने ढंग से टैरिफ लगाया था। जब से यह अपने दूसरे कार्यकाल में आया है तब से कुछ भी करता और बोलता रहता है।

  न्यूयॉर्क की एटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स समेत 25 राज्यों ने इस कदम को अवैध बताया है। उन्होंने ने कहा कि इससे अमेरिका में बिज़नेस परिवारों का बोझ बढ़ेगा। पिछले साल राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे डेफिसिट को राष्ट्रीय आपातकाल बताकर इस टैक्स को लगाया था। लेकिन बाद में विवाद होने पर कोर्ट ने ट्रंप से कहा था यह अधिकार तुमको किसने दिया है और अपने मनमाने ढंग से टैरिफ नही लगा सकते हालांकि बाद में पैसे भी वापस करने पड़े थे। अमेरिका में ऐसे टैरिफ वहां की कांग्रेस द्वारा लगाए जा सकते हैं।

   ट्रंप सरकार ने अपनी भरपाई पूरी करने के लिए ट्रेड एक्ट 1974, सेक्शन 301 का इस्तेमाल किया है। इसके तहत अनुचित व्यापार प्रथाओं  और जबरन श्रम को रोकने में असफल रहे देशों पर 10 से 12% टैरिफ लगाया गया। इस ट्रंप सरकार ने इसको वैध बताया और इस पर उन्होंने ने कहा यह अमेरिकी श्रमिकों और व्यापार बचाने के लिए जरूरी है।एक बात साफ है अमेरिका अपने फायदे के लिए कुछ भी करता है।

   

बांकीपुर से BJP पहली बार हारी चुनाव और ऐतिहासिक जीत प्रशांत किशोर की ,आगाज बदलाव का

   


BJP का गढ़ कहा जाने वाला बांकीपुर का किला जन स्वराज पार्टी,प्रशांत किशोर ने भेद दिया है। भारतीय जनता पार्टी आज पहली बार चुनाव हारा है और प्रशांत किशोर ने ऐतिहासिक जीत दर्ज  की है और एक बड़े मार्जिन से जीत हासिल की है।नितिन नवीन के राज्यसभा जाने पर बांकीपुर की विधानसभा सीट खाली हो गई थी और पर उपचुनाव में bJP के प्रत्याशी के तौर पर नीरज कुमार को उतारा गया था। जबकि जन स्वराज पार्टी की तरफ से प्रशांत किशोर लड़ रहे थे और RJD की तरफ से रेखा कुमारी सुनाव लड़ रही थी। पहले स्थान पर जन स्वराज दूसरे पर बीजेपी और तीसरे नंबर पर राजद है। बीजेपी और राजद अन्य दलों की मुश्किले बढ़ने वाली है  आगामी चुनाव में क्योंकि लोगों को अल्टरनेटिव नए विकल्प मिल रहे हैं। ये वहां के लोगों का कहना है कि दूसरे विकल्प न होने के कारण हम बीजेपी और राजद को वोट देते थे।

  अब बिहार ही नहीं पूरे देश में मुद्दे बदल रहे हैं और अल्टरनेटिव के तौर पर नए विकल्प लोगों को मिल रहे हैं। बिहार में बांकीपुर में प्रशांत किशोर के जीतने के कई बड़े कारण रहे हैं जिसमें शिक्षा व्यवस्था, बिहार के छठवीं पास  मुख्यमंत्री, और लोगों को एक नया अल्टरनेटिव विकल्प मिला। वहां की एक क्लिप बहुत वायरल हुई जिसमें कहा गया कि बीजेपी के तरफ से यहां कुत्ता बिल्ली भी चुनाव जीत जाएंगे जिसको लेकर जनता में भी नाराजगी देखी गयी। प्रशांत किशोर इन सब मुद्दों को उठाने में सफल रहे और सीजेपी आंदोलन भी एक बड़ा फैक्टर रहा। 

 पिछले समय से बिहार की पॉलिटिक्स में लगातार बदलाव देखने को मिला। विधानसभा में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने जिसके बाद उनको राज्यसभा में भेज दिया गया और सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बाद अब विधानसभा के उपचुनाव बांकीपुर से बीजेपी हार गई,एक तरह से देखा जाए तो नितिन नवीन की ही हार है हालांकि उनकी जगह पर उनका प्रत्याशी चुनाव लड़ रहा था। 

   लोगों का कहना है कि हमने नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री चुना था न की सम्राट चौधरी को।इसी तरह की बहुत सारी गलतियां सरकार ने की जिसका परिणाम सामने है। यदि हम वोटर्स परिपेक्ष में बात करे तो गढ़ और किला किसी का नहीं होता है। अब लोग देश के असल मुद्दों को समझ और उस पर बात भी कर रहे हैं और उनको नए विकल्प मिल रहे हैं जिनकी उनको तलाश है। जैसे कि तमिलनाडु हो या बांकीपुर में देखा गया है।

  देश की जो भी पुरानी पार्टियां है उनको समझना पड़ेगा कि अब  उनकी मनमानी चलने वाली नही है और न ही युवा को अब असल मुद्दों से भटकाया जा सकता है। सबसे बड़ी बात यह कि उनके पास अब नए विकल्प उपलब्ध हो रहे हैं। आने वाले समय में इन पार्टियों को बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़  सकता है यदि इन्होंने अपनी सोच को नही बदला। इन पार्टियों को जरूरत है अपनी रूढ़िवादी सोच को बदलना होगा। 1990 से चली आ रही सरकार के लिए लोगों का एक संदेश महज एक आगाज है। लोग इसे प्रधानमंत्री जी की हार बता रहे हैं क्योंकि प्रधानमंत्री जी के नाम पर ही वोट मिलता था।

JPSC and JSSC परीक्षा में विवाद, छात्र लगातार और अभिजीत दीपके ने किया समर्थन।प्रदर्शन कर रहे हैं।


 झारखंड में लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड में कर्मचारी चयन आयोग को लेकर भर्ती हो घोटाले से परेशान हो कर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं। छात्रों में इसका विरोध बढ़ता जा रहा है। छात्र सड़क पर बैठ गए हैं और भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। CJP पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों से बात की और इस आंदोलन का समर्थन किया है। सीजेपी संस्थापक ने कहा छात्रों की मांगे पूरी करनी चाहिए।परीक्षा भर्ती से संबंधित विषयों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता  सुनिश्चित करना चाहिए। दीपके ने छात्रों से कहा हम तुम्हारा साथ देंगे और साथ में सरकार को संकेत दिया कि हम छात्रों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार को छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना बंद करे और कहा आपकी जितनी डिमांड है उसको हम पूरा करेंगे।

 झारखंड में लोक सेवा आयोग में परीक्षा में हो रही गड़बड़ी को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।  इसी बीच रांची में छात्रों का सत्याग्रह नौवें दिन भी जारी रहा। इसी बीच आंदोलन में नया मोड़ आया जिसमें छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो ने अपनी मांग के समर्थन में अनिश्चितकाल तक के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दी।

धरनास्थल पर महजूद छात्रों का कहना है कि  परीक्षा प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों के प्रति जवाबदेही तय हो।  जो भी इन सब कार्यों में लिप्त है उस कार्यवाही हो और जो भी इसकी जांच है वह निष्पक्ष और ईमानदारी से होनी चाहिए। मांगे पूरी होने तक शांतिपूर्वक सत्याग्रह जारी रहेगा।

 छात्र नेता देवेन्द्र नाथ महतो का आरोप है सरकार इसको गंभीरता से नहीं ले रही है। छात्रों का कहना है 14वी लोक सेवा आयोग परीक्षा रद्द की जाय और नए सिरे से आयोजित किया जाना चाहिए।

देश के ज्यादातर राज्यों में पेपर लीक और भर्ती से जुड़ी गड़बड़ियां हो रही हैं। कही भी कोई सरकार इन समस्याओं को रोकने सक्षम नहीं है। जिन पार्टियों की जिस राज्य में सरकार है वहां भी पेपर लीक नहीं रुक रहा है। इन पार्टियों का अब एक ही काम बचा है एक दूसरे पर आरोप लगाना। गलतियां बताना, मुख्य विषयों से हटकर बात करना।

  

रविवार, 2 अगस्त 2026

साल 2026 में कब है नागपंचमी इसका क्या महत्व और पूजाविधि। हिंदुओं का प्रमुख त्योहार है।

   

नागपंचमी पर्व

 नागपंचमी हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है और नागों को देवता माना जाता है।जो पूरे भारत देश में बड़ी धूम धाम से सांस्कृतिक विरासत के रूप में मनाया जाता है। इस साल नागपंचमी 17 अगस्त  2026 दिन सोमवार को पड़ेगी। यह त्यौहार श्रवण मास शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। नागपंचमी का त्यौहार प्राचीन समय से मान्यताओं के अनुसार मनाया जा रहा है । लोग बड़ी श्रद्धा भाव से मनाते हैं।

धार्मिक महत्व 

हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं के यह त्यौहार श्रवण मास शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। जिसमें नाग देवता की पूजा की जाती है। भगवान शिव नागों को अपने गले में धारण करते हैं। भगवान विष्णु शेषनाग जी की सैया पर शयन करते हैं और नागपंचमी के दिन नाग देवता के रूप में पूजा की जाती है। नाग देवता की पूजा करने से परिवार सुखी और सुरक्षित रहता है।

पौराणिक कथा 

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कलिया नाग के आतंक से गोकुल वाशियो को बचाया था और और कलिया नाग को अपनी गलती का अहसास हुआ और भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त बन गया।

   महाभारत के राजा जनमेजय ने जनमेजय यज्ञ किया था और ऋषि आस्तिक ने सर्पो की रक्षा की थी ।इस कथा को भी नाग पंचमी से जोड़ा जाता है।

पूजा की विधि

स्नान आदि करके नए वस्त्र पहने और हल्दी ,अन्न ,जल भी अर्पित करें।

नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा की जाती है दूध और खीर पिलाया जाता।

भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग को दूध अभिषेक कराया जाता है और फूल चढ़ाए जाते हैं।

भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। अपनी श्रद्धा अनुसार दान करे। 

इस दिन कथ सुनने का भी विशेष महत्व है।

    इस त्यौहार का पर्यावरणीय रूप से भी महत्व क्योंकि प्रकृति का संरक्षक किया जाता है। जिसमें सर्पों को न मारकर उनके बचाने पर महत्व दिया गया है। वो भी प्रकृति का हिस्सा है और सबका कर्तव्य है किसी जीव को नुकसान न पहुंचाए।

   ये सारी जानकारी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर दी गई है।

शनिवार, 1 अगस्त 2026

J&K में एक बार फिर हुआ pahalgam जैसा Attack

Kulganv Attack

   जम्मू कश्मीर में एक बार फिर हुआ पहलगाम जैसा हमला जिसने इंसानियत को एक बार फिर से शर्मसार किया। देर शुक्रवार को आतंकियों ने जाति धर्म देख कर गोलियां चलाई।उसमें  दो प्रवासियों को अपने जाति धर्म के कारण जान गंवानी पड़ी। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद आतंकी वहां तक कैसे पहुंचे। 

    छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूर काम की तलाश में जम्मू कश्मीर पहुंचे थे, जहां पर साउथ कश्मीर के कुलगांव में ईंट भट्टे पर काम कर रहे थे। शुक्रवार रात को आतंकी उस भट्टे पर पहुंचे और नाम पूछ कर ताबड़तोड़ गोलियां चला दी। जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए लोग डरकर भागने लगे। लेकिन वही कुछ लोग मौजूदा स्थिति को समझते हुए तुरन्त घायल मजदूरों को नजदीकी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, Aanantang में भर्ती कराया गया। एक मजदूर की मृत्यु ले जाते वक्त रास्ते में हो गई, दूसरे का डाक्टर्स ने इलाज शुरू किया लेकिन बचा नहीं पाए और दोनों की मृत्यु हो गई। उन दोनों की पहचान दीपक और भूपेंद्र नाम से की गई है।

    इस घटना सूचना मिलते ही J&K पुलिस,NDRF और CRPF की टीमें सर्च ऑपरेशन में लग गई हैं।सुबह होने पर हेलिकाप्टर से भी सर्च अभियान चलाया गया और चारों तरफ से उस क्षेत्र को घेर लिया गया है।आतंकी जिस साजिश के तहत आए और घटना को अंजाम देकर गायब हो गए। 21 महीनों के बाद इस घटना से लोगों के घाव फिर ताजे हो गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर तो हो गया लेकिन पहलगाम के आरोपी अभी तक पकड़े नहीं गए।

      इस घटना की कड़ियां पहले हुई कई घटनाओं से जोड़ी जा जा रही हैं। अभी हाल की ही एक घटना है जिसमें  22 जुलाई को J&K पुलिस हेड कांस्टेबल आशिक़ हुसैन कुरैशी की अनंतनाग में लाल चौक पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।जो अमरनाथ यात्रा के दौरान वहां पर तैनात थे। कयास ये लगाये जा रहे हैं कि इस घटना को अंजाम लश्कर ए तैयबा ने दिया है  लेकिन अभी तक न ही कोई  सबूत मिला है और न ही किसी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी  ली है।सर्च अभियान जारी है।

   इसी क्रम मे कई घटनाएं हुई  क्या इसकी भनक हमारी एजेंसियों को नहीं लगी। इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ये सब वहां पर कैसे हो रहा है। इस कायराना हरकत को ऐसे ही लोग अंजाम दे सकते और आम लोगों को निशाना बनाया जिनका कोई दोष नहीं था जो अपनी रोजी रोटी कमाने आए थे। उन्हें क्या पता था कि हम वापस घर नहीं पहुंचेंगे।

    इस घटना की निंदा J &K के CM उमर अब्दुल्ला ने की और उन्होंने ने जिन परिवारों ने अपने परिजनों को खोया है उनको 10 लाख आर्थिक सहायता मिलेगी। इसी तरह बीजेपी स्पोक्सपर्सन अल्ताफ ठाकुर, पूर्व सीएम महमूबा मुफ्ती, और छत्तीसगढ़ सीएम ने कहा इन परिवारों को हर संभव मदद मिलेगी। पूरे देश में हर कोई इस घटना की निंदा कर रहा है।

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

Bihar Gen Alpha ने 4 km किया मार्च यह प्रदर्शन SDM's office के बाहर हुआ।

बिहार में Gen Alpha ने किया प्रदर्शन जिसमें लगभग 50 छात्र 6 से आठवीं कक्षा के छात्र थे। जिनकी SDM साहब से सामान्य मांगे हैं। मिड डे मील की गुणवक्ता अच्छी हो, साफ पीने का पानी , टॉयलेट, इलेक्ट्रिसिटी, क्लासरूम पंखा और यूनिफार्म से जुड़ी समस्या है। अगर आमतौर पर देखें तो पढ़ाई से संबंधित पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल है। नीट पेपर लीक से जुड़े और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर लहर की तरह पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन बिहार के सिनुरा मिडिल स्कूल ज्ञान जनपद के छात्रों ने स्वयं से मंगलवार को 4 Km  से मार्च निकाला टिकरी SDM के ऑफिस तक और सामान्य सुविधाओं के मुद्दे थे।

     इस प्रदर्शन के बढ़ने कारण कई बार नाम मात्र जांच हुई लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकला और उनकी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जब यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिससे दर्जनों छात्र जो सामान्यतः आठवीं कक्षा के छात्र हैं जो SDM ऑफिस के सामने बैठे हैं।

    टीकरी SDM Praveen Kundan protest पर संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जिसमें इन्क्वारी कम्पैरिजन असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर चौहान कुमार, एग्जिक्युटिव ऑफिसर रंजीत सिंह और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर योगेंद्र पासवान जो कि इस जांच को पूरा करेंगे और इसकी रिपोर्ट सौपेंगे।

    इसके बाद एक्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट SDM के कहने के बाद तुरंत 6 बच्चों से मिले जिसमें तीन लड़किया और लड़के टीचर्स की उपस्थिति में। छात्रों की सामान्य शिकायतें थी जैसे पानी , टॉयलेट, मिड डे मील, और यूनिफार्म।

  स्कूल के हेड मास्टर ने चेतावनी देते हुए कहा समस्या का समाधान 3 से 4 दिनों में पूरा हो जाए ।

      

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

Farmer's protest मध्यप्रदेश तय MSP मूल्य पर खरीदी जाय मूँग की दाल किसान अपनी मांग को लेकर उतरे सड़क पर

किसान की हर फसल की MSP  तय हो।

MSP तय हो

  मध्यप्रदेश में किसान पिछले 4 दिनों से अपनी मांग को लेकर सड़क पर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि हर फसल की एक तय सरकारी मूल्य होना चाहिए।  जिससे किसान फसल को उचित दरों पर बेंच सके। किसान अपने घर से खाने पीने का सामान लेकर सड़क पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम यही बैठे रहेंगे।

       इस प्रदर्शन की शुरूवात मार्च के रूप में नर्मदापुरम से लेकर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तक निकला है।यह मध्यप्रदेश सरकार के लिए सबसे बड़ा आंदोलन है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसमें पुलिस बल का प्रयोग नहीं किया गया है। हम शांतिपूर्वक उनको आगे बढ़ाने दिया।

      किसान फसल कटने तक खेत में संघर्ष करता है उसके बाद फसल की उचित दरों के लिए सड़क पर धरना करे। किसानों का कहना है कि  जैसे अन्य दलों के बराबर ही मूंग की दाल का भी एक तय MSP हो चाहिए ।जिससे  हम अच्छी कीमतों पर फसल को बेच सके।

    यहां पर मध्यप्रदेश सरकार का कहना की हमारी प्राइम सपोर्ट स्कीम के अनुसार राज्य का कुल उत्पादन का 25% ही सरकारी मूल्यों पर खरीद सकते हैं। मूंग के दाल का सरकारी मूल्य 8768 रुपए पर कुंतल है। उदाहरण के तौर पर मान लो कि पूरे प्रदेश 100 kg  फसल हुई उसमें से सरकार 25 kg ही सरकारी मूल्य पर खरीद सकती है। जिससे बची हुई फसल को कम कीमतों पर खुले बाजार में बेचना पड़ता है।

      दिल्ली की तरह ही मध्यप्रदेश में Gen Z ने किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे और किसानों की समस्या को समझ रहे हैं। जब किसान संघर्ष करके खुश नहीं रहेगा तो धरती पर हरियाली कैसे होगी।

बुधवार, 29 जुलाई 2026

Vande Mataram Bill पारित राज्यसभा से नियम का उल्लंघन करने पर होगी 3 साल तक सजा।

Vande Mataram Bill 2026


आज वंदे मातरम् बिल राज्यसभा यानी उच्च सदन से पारित हो गया है। इस बिल के तहत वंदे मातरम् के  अपमान को रोकने के लिए इस बिल को लाया गया है। वंदे मातरम् बिल 2026 के संशोधन के अनुसार यदि कोई वंदे मातरम् गान के समय जानबूझ कर अपमान करता है तो उसको 3 साल तक सजा का प्रावधान है। इसको सारा प्रोटोकाल जन गण मन की तरह ही दिया जाएगा।

    इस विधेयक के पारित होने पर गृहराज्य मंत्री नित्यानन्द रॉय ने कहा यह विधेयक हमारी राष्ट्रीय धरोहर, और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिलाता रहेगा । यह संशोधन एक बदलाव नहीं यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाता रहेगा।

     राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल की चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टी सदस्यों ने सदन वाकआउट किया था हालांकि बाद मे आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल,भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस के सदस्यों ने इस चर्चा हिस्सा लिया और बिल ध्वनिमत से पारित हो गया।

   लांच के बाद उपसभापति हरिवंश की कार्यसूची में शामिल राष्ट्र गौरव  अपमान निवारण बिल की चर्चा हुइ।इस बिल के तहत हमें अपनी राष्ट्रीय धरोहर सम्मान करना होगा। इसके बाद विपक्ष ने अमितशाह से जवाब मांगा और नारेबाजी शुरू कर दी। अमितशाह ने अभी तक कोई बात नहीं की है।

     इसी क्रम मे दूसरी ओर लोकसभा मे एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी मिल गई है।इस मानसून सत्र में लंबी चर्चा के बाद इस बिल को एकमत ध्वनि से पारित किया गया। इसी बीच पक्ष और विपक्ष में काफी नोकझोक हुई  लोकसभा राहुल गांधी के भाषण को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी हुई।

भारत, चीन पर US का लगेगा 100% टैरिफ रूस को आर्थिक रूप से घेरने की तैयारी।

US Russia sanction Bill 2026 


रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच US ने रसिया को घेरने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिसमें US ने रसिया के खिलाफ सैंक्शन बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनाने के बाद भारत ,चीन  स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान  से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।  इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जो रूस से तेल गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों का आयात करते हैं।डोलांड ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
      यह महत्वपूर्ण विधेयक US के दिवंगत सीनेट लिंडसे ग्राहम ने बनाया था। अमेरिका कैपिटल हिल जहां यह वोटिंग हो रही थी वहां जेलेंस्की भी महजूद रहे, यह एक दिलचस्प बात है। इस विधेयक के समर्थन में 86% सीनेटर्स  ने वोटिंग की जबकि इसके विरोध में 12%  वोट पड़े। इस विधेयक  का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना। जिससे  उन देशों को किसी तरह से रूस से दूर किया जा सके जिनके रूस की साथ अच्छे रिश्ते हैं।
    अमेरिका के 100% टैरिफ से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ है जबकि वही चीन पर 12.5% टैरिफ है। यदि 100% टैरिफ लग जाती है तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर दोगुनी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। इस विधेयक को डोलांड ट्रंप ने हरी झंडी दिखा दी है।
   विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय निर्यात में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।

   यह टैरिफ इस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और पहले से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मार्ग बाधित। जिससे तेल गैस की आवाजाही ठप हो गई है।

   पहले भारत अपने जरूरतों का 40% तेल गैस इन्हीं खड़ी देशों से पूरा करता था जब अंतर्राष्ट्रीय जलडमरू मध्य में आवाजाही बाधित है। जिसके कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है ।

   सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल  के अनुसार हालांकि इस विधेयक में कुछ राहत दी गई है।इसमें यह छूट उन देशों को मिलेगी जो देश रूस के कुल तेल का 15% खरीदेगा ।

       

Lucknow कानपुर elevated expressway 13 दिन के अंदर ही धसा उद्घाटन में पहुंचे थे बड़े मंत्री।

 धसा लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे 


हाल में ही लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे  का उद्घाटन जुलाई 2026 को हुआ था। जिसमें नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता महजूद रहे। इस प्रोजेक्ट का नाम लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे ग्रीन फील्ड है और अधिकारी इसकी मरम्मत करवाते नजर आये। यह लखनऊ  उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाता है।कमाल की बात यह है उद्घाटन के 13 दिन बाद ही यह एक्सप्रेसवे धस गया ।इसको बनने में लगभग 4 साल से भी ज्यादा का समय लगा और काफी मेहनत बाद बन पाया । बताया गया इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से यात्रा सुगम और समय की बचत होगी। इसको बनने में टोटल खर्च 4200 (42 हजार करोड़ ) रूपये लगे हैं।जिसको National   Highway Authority of India ने बनाया है।जिसकी पूरी लंबाई 63 किलोमीटर है।
    
  यह एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं लैस है,जिस पर AI कैमरा , हाई स्पीड, इमर्जेंसी सुविधाएं है। जो यात्राओं को आसान बनाती हैं
      इसी क्रम मे उत्तराखंड  के नंदा की चौकी प्रेम नगर में टांस नदी पर बना पुल से जुड़ी रोड के एक साइड का हिस्सा बारिश के कारण धस गया है। इसको बनाने में 16 करोड़ रुपए खर्च हुए । उद्घाटन के 16 दिन बाद ही पुल डिस्ट्रॉयड हो गया। हालांकि अधिकारियों ने बताया पुल सुरक्षित है। यह सड़क मुख्यमार्ग को जोड़ती है।भ्रष्टाचार और उद्घाटन ये दोनों शब्द एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। अगर जो उद्घाटन बंद हो गये तो भ्रष्टाचार अपने आप बंद हो जाएगा और भ्रष्टाचार होगा तो उद्घाटन भी होगा। पर एक बात नेता लोग को कोई फर्क नही पड़ता है।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 18 साल से कम उम्र प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करना होगा। ये मामला जंतर मंतर से जुड़ा है।।


20 जुलाई  को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में जिन छात्रों पर कार्यवाही की मांग की जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा है प्रदर्शन कारी छात्रों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई में कहा था कि लोकतंत्र में ऐसे प्रदर्शन होते रहते हैं । मामले की गंभीर और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

     Supreme कोर्ट का बड़ा आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ सुनाया है। नीट पेपर लीक में प्रदर्शन कर रहे छात्र जिनकी उम्र 18 साल से कम है उन पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह किसी भी राज्य जुड़ा हो। CCTV camera या ड्रोन की द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग या डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखे इसे किसी भी हाल सार्वजनिक नहीं क्या जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और 7 राज्यों को नोटिस जारी किया है।  कोर्ट ने कहा राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद  हाई लेवल कमेटी का गठन होगा। इस कमेटी के द्वारा हाल में घटित हुए मामलों की निष्पक्ष जांच कराएगा।

     कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है जिसने भी ज्यादती की है कानून उसके खिलाफ अपना काम करेगा। इस सब के खिलाफ पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक जांच का कोई मतलब नहीं है।

      CJI सूर्यकांत ने कहा इन सभी पिटीशन में एक आरोप कई बार लगाया गया है। जंतर मंतर दिल्ली के प्रदर्शन में पुलिस द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जिसमें कई लोगों चोटें आई हैं। एक 19 साल के लड़के की आँख रोशनी चली गई है। इलेक्ट्रॉनिक बैटन के कारण एक लड़की को ICU में भर्ती कराया गया है। एक और आरोप है जिसमे पुलिस के द्वारा कील वाली लाठी का प्रयोग जिसमें जान खतरा और एक आरोप  मीडियाकर्मी के घायल होने का भी मामला है। पुलिस वाले सिविल ड्रेस में, उनके पास बैचेस नहीं थे और पुलिस की हिंसा का मामला है।

  केन्द्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस हिंसा में 250 से ज्यादा पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार छात्रों पर बल का प्रयोग हल्के में नहीं ले रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुषार मेहता को टोकते हुए  कहा इसलिए हम चाहते हैं जांच हो ,इस तुषार मेहता ने कहा हम ये नहीं कहते हैं कि हिंसा छात्रों ने की लेकिन आंदोलन के दौरान इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुसे जिसके द्वारा यह हिंसा हुई जिसका हम डेटा पेश करेंगे। उन्होंने ने दावा किया इसमें वो लोग शामिल थे जो पहले से किसी आरोपो में शामिल हैं।

   इसमें जांच समिति को लेकर भी दलील हुई  दोनों लोगों का कहना है कि यदि हम अपनी  अपनी तरफ से रिटायर्ड जजो का चुनाव करेंगे तो हम पर आरोप लगेंगे न इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा हम खुद से इस समिट का गठन करेंगे।

     इसी बीच बिहार का भी मामला सामने आया जिसमें सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि हम मुकदमे वापस ले रहे हैं। लेकिन अभी 150 ज्यादा नाबालिक बच्चे पुलिस की कस्टडी में है। जिनको 48 घंटे के अंदर मजिस्टेट के सामने पेश किया जाय।

सोमवार, 27 जुलाई 2026

Bihar Violence पुलिस ने चलाई AK 47 , पुलिस एक अनोखा इतिहास बना रही है। और अलग अलग राज्यों छात्रों को अरेस्ट किया जा रहा है।

 


देश में हुए पेपर लीक के कारण देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। जिसमें कही कही हिंसा भी हुई जिसको लेकर पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। छात्रों को अलग अलग राज्यों से गिरफ्तार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस से लेकर और अलग अलग राज्यों की पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की है। मगर हद तो तब हो गई जब बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बिहार पुलिस ने AK 47 तानें नजर आई। कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस ने 4 राउंड फायरिंग की है। बाद में पुलिस बड़े अधिकारियों से पूछा गया तो बताया कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया। इसका आदेश किसने दिया क्या बिहार पुलिस को पता नहीं ये प्रदर्शनकारी कौन है। ये कौन सा तरीका बिहार पुलिस का है।

  हिंसा को कोई भी साथ नहीं देगा और हिंसा होनी भी नहीं चाहिए। इससे कुछ भी अच्छा नहीं होता है।बहुत सारे कैमरे लगे होते हैं रोड पर उनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तस्वीरों की पहचान करो और उन पर कार्यवाही करो।कई रिपोर्ट आ रही है कि पुलिस किसी बिना आरोप के लोगों उठा रही है और न ही उनके घर वालों को सूचना दी जा रही है। प्रशासन से पूछने पर बताया कि अभी ऐसी कोई बात नहीं सबकी हालत ठीक है।

    लोगों का क्या भरोसा शादी वर्दी में पुलिस वाले हैं या गुंडे जो भीड़ में मारपीट करते नजर आये। किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश भी नहीं कि जैस जंतर मंतर दिल्ली में देखा गया।आखिर सरकार इन सब पर कब कार्यवाही करेगी। कई लोगों को बुलेट लगी है।विपक्ष ने पत्र लिखकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है जिसको लेकर हर दिन संसद के दोनों सदनों में विपक्ष नारेबाजी कर रहा।

    विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा और ओम बिड़ला बोल रहे यह पेपर लीक को रोकने के लिए महत्वपूर्ण विधेयक लाया जा रहा है इस पक्ष और विपक्ष शांतिपूर्वक बात करे । इसके लिए हम उनको पर्याप्त समय देंगे । CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों का कहना है कि यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी पर खरी नहीं उतरती है तो हम फिर से आंदोलन कर सकते हैं।

Anti paper' leak Bill and Amendment

  Parliament मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे बीच सरकार ने आज यानी 27 जुलाई को Anti paper leak Bill और Amendment 2026 को संसद के दोनों सदन में संसदीय कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेन्द्र सिंह ने पेश किया। इसमें पेपर लीक curruption को रोकना और सजा के लिए कड़े  नियमों को बनाना और उनका पालन करना। Fast track courts जिसमें संवेदनशील मुद्दों के लिए कार्यवाही को कम समय में सुनवाई करना और फैसला सुनाना। जिससे सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके।

   


किसी भी पेपर लीक से जुड़ी समस्या को हल्के में न लिया जाए, उस पर तुरंत कार्यवाही हो और नियमित समय से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए । विपक्ष सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों पर लाठीचार्ज हुई और अमितशाह से जवाब की मांग करते हुए हंगामा कर रहे थे। संसद की कार्यवाही स्थगन होने के बाद दोबारा 12 बजे के बाद शुरू हुई और दुबारा विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच उन्होंने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया।

  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने TMC सहित कई सांसदों का नाम लिया और कहा कि क्या वे इस विधेयक को लेकर कुछ बोलना चाहते। इस पर विपक्ष कि तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ओम बिड़ला ने कहा यह महत्वपूर्ण विधेयक है इस पर देश की मंशा पर व्यापक चर्चा होगी। विपक्ष बहुत सारे लोग इस पर चर्चा करने की मांग कर रहे थे। यह सुधार का प्रथम चरण है। सबको इसे साथ देना चाहिए, हम इसके लिए पर्याप्त देंगे और यह बिल पास हो सके ताकि पेपर लीक रोकने का समुचित प्रावधान हो सके।

    सरकार के इस बिल में पेपर लीक और फ्रॉड करने वालों के लिए कड़े नियमों का प्रावधान है। जिसमें कानूनी प्रक्रिया को स्पीड देना ।किसी भी पेपर लीक खिलाफ दर्ज हुए मामलों में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करना होगा। 2 महीनों के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पेपर लीक या अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने पर 5 से 10 साल तक सजा होगी। इससे पहले 3 से 5 साल सजा का प्रावधान था। यदि जुर्माने की बात करें तो पहले 50 लाख ,और 10 करोड़ है। एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन होगा  और हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। पेपर लीक माफिया को पकड़ कर  कम समय में मामलों को सुलझाया जा सके।

FCRA Act and Amendment Bill 2026

 


संसद के इस मानसून सत्र में सरकार FCRA बिल पारित करने के लिए ला रही है। यह मानसून सत्र 20 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें 5 नए बिल है और दो पहले से ही संसद में लागू करने के लिए ,बहस चल रही है। इस सत्र में नीट पेपर लीक को लेकर संसद में काफी हंगामा हो रहा है और कई बार सदन की कार्यवाही को रोकना  पड़ा।

FCRA ( Foreign Countribution Regulation Act) Amendment Bill 2026

इस बिल को  28 मार्च 2026 को भारत सरकार ने लोकसभा में प्रस्तावित किया था।  यह बिल विदेश से आने वाली फंडिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए इसे लाया जा रहा है। कौन लोग और संस्थान है जो इस फंडिंग को प्राप्त कर रहे हैं। इसको खर्च किस पर किया जा रहा है। इन सब पर सरकार की नजर रहेगी।इसका मुख्य उद्देश्य है इसके गलत प्रयोग को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।  ऐसे कई खबरें आती रहती हैं कि फंडिंग का उपयोग गलत कार्यों में किया जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हितों को ध्यान रखते हुए सरकार ने इस बिल को लाया है यह बिल होम मिनिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा।

     देश दुनिया में बहुत सारे NGOs या संस्थान है जिनको विदेशों से फंडिंग आती है। जिसके द्वारा बहुत सारे प्रोग्राम चलाए जाते हैं जैसे हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए विदेशों से फंडिंग मिलती । यह फंड पॉलिटिकल पार्टी , सांसद, जज, सरकारी कर्मचारी और मीडिया संस्थानों को नही मिल सकता है।

     यदि FCRA किसी कारण से रद्द या ले लिया जाता है तो उस पर बने कानून के अनुसार FCRA  उस संपति को अपने प्रबंधन में ले लेगा । यदि पंजीकरण समाप्त होने पर सारी संपति प्रबंधन के पास जाएगी ,यदि NGOs का सर्टिफिकेट बहाल कर दिया जाता है तो सारी संपति वापस कर दी जाएगी।

  यदि पंजीकरण एक निश्चित समय तक जारी नहीं किया जाता तो सरकार सारी संपति जप्त कर लेगी और उसका उपयोग सार्वजनिक हितों के लिए किया जाएगा।

   यदि पंजीकरण कैंसिल कर दिया जाता है तो आप ऑथोरिटी विरोध कोर्ट में इसकी अपील कर सकते हैं।

    FCRA नियम के तहत अनुसार कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर सजा अधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1वर्ष तक घटने प्रावधान है।

    जितने भी राज्यों में NGOs  पंजीकरण है उन सभी को सरकार को अपने कार्यों के विषय में बताना होगा। जिससे सरकार सुनिश्चित करे पाए।

   सरकार का कहना है कि इसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है और हम देश में राष्ट्रीय सुरक्षा ,संप्रभुता और शांति को बनाए रख पाएं। बहुत सारे लोगों का कहना है कि सरकार इस पर अपना ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती। इसके परिणाम स्वरूप इसका प्रभाव पर देखा  लोगों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता। उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा जो विदेशों से NGOs की फंडिंग का  दुरूपयोग करते हैं और जो यह सब करवाते हैं। यह बिल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और संसद में इसकी बहस चल रही है। 

रविवार, 26 जुलाई 2026

शिक्षा मंत्रालय पद संभालते ही पहलाद जोशी ने अधिकारियों से अहम मुलाकात होंगे कुछ बड़े बदलाव

    नीट पेपर घोटाला में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, केंद्रीय मंत्री पहलाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्य भार । आज यानी रविवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों से की बातचीत।  हालांकि पहलाद जोशी के पास पहले से ही कई बड़े मंत्रालय हैं और उनके पास ही मौजूद रहेंगे। अभी उनके पास कई मंत्रालय हैं जैसे उपभोक्ता मामले, खाद्य और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। भारत सरकार ने उन पर भरोसा जताया है।

   पहलाद जोशी काफी लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उनकी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि संसद के बाहर हो या अंदर एक सक्रिय नेता के रूप में देखी जाती है। उन्होंने ने अपने जीवन की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ से की थी। कर्नाटक में उन्होंने ने संगठन के लिए जमीनी स्तर से जुड़कर काम किया है और उनकी अच्छी पहचान है अपने क्षेत्र में  और लगातार काम करते रहे हैं।

    अपना पहला चुनाव 2004 में लड़ा था और अब वह 22 साल से  लगातार संसद है।  लगातार 5 बार कर्नाटक से लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं। जिससे वो अपने क्षेत्र के प्रभावशाली नेता बन गए है।। समय समय पर उनको सरकार ने कई जिम्मेदारियां दी हैं।

  सरकार में रहते हुए कई बड़े पदों को संभाला है वर्ष 2012 कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 2014  के बाद लोकसभा में संसदीय समितियों की जिम्मेदारी मिली। 2019 में मोदी सरकार ने कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भार सौंपा गया है। अब उनके पास अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी आ गई है।

    उनके पास शिक्षा व्यवस्था को लेकर इस समय कई चुनौतियां हैं। चाहे नीट पेपर लीक को लेकर हो या नई शिक्षा नीति लागू करना हो। शिक्षा नीति में कई बदलाव सख्त जरूरत है। NTA हो या और शिक्षा से जुड़े संस्थान। अब युवाओं और उनके माता पिता का भरोसा नए शिक्षा मंत्री पहलाद जोशी पर टीका हैं। बहुत सारी पॉलिसीज बनानी और लागू होनी है।

GenZ ने बनाया इतिहास In new era 2026

   GenZ ने वह कर दिखाया जो इस इतिहास में पहली बार और पिछले 12 सालों में पहली बार हुआ ।  Gen Z ने इस आंदोलन को देश में खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चलाया था।  अंत में युवाओं की जीत हुई। यह जीत एक लोकतंत्र की जीत है। सरकार कहना था कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते हैं ये दूसरी सरकारों में होता है। युवाओं ने बता दिया कि ये सब लोकतंत्र में नही होता है। युवाओं का कहना था कि हम सिस्टम को चलाने के लिए इन लोगों को चुनते हैं, बाद में यही लोग हम पर शासन करने लगते हैं। सरकारें कभी शासन करने के लिए नहीं है, शासन जनता ही करती है। चाहे इतिहास हो या आने वाला समय , रिवोल्यूशन इसका सबूत है।

      सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन किसी ने सोचा नहीं था, धरातल पर जन आंदोलन का रूप ले लेगा। आन्दोलन में पूरे देश के युवाओं, बच्चे और बुजुर्गों ने इसको एक नई ऊर्जा दी और यह आंदोलन शांतिपूर्वक सफल हो पाया। यहां पर कोई जाति, नहीं समुदाय और पार्टी से हटकर देश के असल मुद्दों पर बात हो रही थी। युवाओं में डर खत्म हो गया था जहां बड़े बड़े लोग बोलने से डरते थे। ये लोकतंत्र है जहां हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य देश के लिए होते हैं।

   इस आंदोलन को देश के सभी वर्गों के लोगों ने साथ दिया। खासकर युवाओं ने जिससे यह आंदोलन जन आंदोलन बन गया।पर सरकार को पता नहीं किसी बात का अहंकार था। बहुत सारी छाप इस आंदोलन ने युवाओं के मन में जगह बना ली है।विपक्ष की सभी पार्टियों ने भी अपना पूरा साथ दिया, भले ही राजनीतिक लाभ से लेकिन दिया तो । अच्छे मुद्दों के लिए राजनीति क्यों नहीं हो सकती और कौन राजनीति नहीं करता। इसमें आप ज्यादा समझदार हैं। 

   युवाओं को क्या नहीं कहा गया इस आंदोलन में, चीन पाकिस्तान का एजेंट बताया गया। विदेशी फंडिंग से आंदोलन चल रहा है।  दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने क्रूरता की हद पार कर दी। बच्चों, युवाओं और लड़कियों, महिलाओं तक को नहीं छोड़ा। इसमें इसका साथ main stream media ने दिया और अपनी तरफ से पूरा आंदोलन दबाने की कोशिश की। मीडिया पूरी तरह से सरकार के चरणों मे लेटी हुई थी। मीडिया ने अपने पतन के रास्ते खुद से बनाए थे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को उठाया। मानता हूं ads और सरकार का दबाव होता है पर इतना भी नहीं होता है।

    GenZ ने साबित किया कर दिया कि सिस्टम में भ्रष्टाचार है और हम आतंकवादी नही है। सरकार में सब मंत्री संत्री करप्ट नहीं हैं अच्छे भी हैं। सरकार की आलोचना का सबसे बड़ा कारण मीडिया है,क्योंकि इसने युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचने नहीं दिया। युवाओं को जगाने में CJI सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और युवा उनको धन्यवाद दे रहे थे। युवा एक नए भारत की कल्पना कर रहे थे,जिसमें सबकुछ अच्छा हो । युवाओं ने जबरन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा छीन लिया। सच में यही लोकतंत्र की ताकत है।

    युवा अभी जाग रहा है, अब देश में मनमाने ढंग से कुछ भी नहीं चल सकता। सबकी अलग अलग बाते थी और मुद्दे थे लेकिन आवाज एक थी। सिस्टम में सुधार होना चाहिए। सरकार और जनता के बीच संवाद होना चाहिए। भारत का एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह सब जानना जरूरी है। पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री जी के बीच और जनता के बीच कोई बात ही नहीं हुई। यही सब कारण थे, जिसमें GenZ युवाओं ने इतिहास लिखा। 

शनिवार, 25 जुलाई 2026

Zen G जीत गए, सरकार को झुकना पड़ा।

    काकोरोच जनता पार्टी का आंदोलन करीब एक महीने से ज्यादा चला , सरकार को झुकना पड़ा। आज उन सभी युवाओं की जीत हुई, जो खराब शिक्षा व्यवस्था खिलाफ लड़ रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। इन युवाओं ने बता दिया कि देश हमारा है, और हम अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। जंतर मंतर का ऐसा नजारा था, कि शब्दों में बताना संभव नहीं है। उनकी  अलग ही खुशी थी ,ऐसा लग रहा था कि उन्हें सबकुछ मिल गया हो , आंखों में खुशी के आंसु थे। सरकार  का अहंकार टूट गया था।

Cacooroch protest 2026

     इन युवाओं के कोई ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिसमें राजनीति हो सके । इनके सीधे सवाल सरकार से थे , शिक्षा व्यवस्था को लेकर,   खराब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये कोई सत्ता नहीं मांग रहे थे। इसमें भी सुनने में सरकार एक महीने से ज्यादा का समय ले लिया। शायद इनकी भाषा सरकार को समझ नहीं आ रही थी, हालांकि बाद मे समझ आ गई। युवाओं की अच्छी बात यह थी कि वह किसी पार्टी, जाति समुदाय और वर्ग का न होकर आम मुद्दों की बात कर रहे थे। जो सरकार को समझ नहीं आ रहा था। 

      ये नए जमाने के GenZ सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले , इनको सोशल मीडिया से हटकर देश मुद्दों की भी समझ है। ये कहना गलत है कि इन्हें कुछ पता नहीं है। ये लोग अब जाति, धर्म, हिन्दू, मुस्लिम और मंदिर, मस्जिद से हटकर भी सोच रहे हैं। अब इनको देश के असल मुद्दों से भटकाया नही जा सकता और डर नाम की जगह इनके अंदर नही है। चाहे कितनी  सिविल ड्रेस और बिना बैचेस के पुलिस उतार दो ।इनके सीधे सवाल सरकार से होते हैं। 

      GenZ का मानना है कि, देश इन सबसे बढ़कर कही उपर है। पार्टियां बनती बिगड़ती रहती हैं, लेकिन देश नही। सरकार के प्रचार तंत्र ने आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विदेशों से फंडिंग आ रही है, पाकिस्तान के एजेंट है, चीन के एजेंट है, गुंडे और दहशतगर्द क्या नही बोला गया इन युवाओं को, जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लाठियां खाई , आशु गैस के गोले चले और कैनन वाटर की गाड़ियां आई, सबकुछ हुआ जो एक आंदोलन मसलने के लिए किया जाता है। ये लोग फिर भी शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे और अपनी आवाज को उठाते रहे।

     आंदोलन में जुड़ने वाले सबसे ज्यादा युवा थे। जो इस आंदोलन से नही जुड़ पाए उन्होंने घर से ही चाय और खाना भेजा ।  यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत  बन गई और आंदोलन देश अलग कोनों में होने लगे। Main stream media ने इसे कोई कवरेज नहीं दिया, जिससे मीडिया के भी नाकामी के नारे लगे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को अपने मंच पर जगह दिया। इस आंदोलन ने अपना एक इतिहास बना लिया। जिसमें मीडिया और सरकार इसके खिलाफ थी और इतिहास भी शांतिपूर्वक ऐसे ही बनता है। युवाओं ने भी इस नए समय में नई पहचान बनाई।

Dharmendra प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। नीट paper leek

      जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन अब एक नया मोड़ ले लिया है। छात्रों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।  और अब उनकी मांगे समय के अनुसार बदलती जा रही हैं। प्रधानमंत्री रील बनाते जा रहे हैं। वो  कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की ,जिसमें आरोपी को दस साल तक सजा और दस करोड़ जुर्माने के लिए बिल पास करने की बात कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री जी की रील को लेकर युवाओं में नाराजगी देखी गई है।  आंदोलन का बड़ा होने का कारण सरकार है और अब तक उनकी मांगे मान ली  जाती।

   

Dharmendra Pradhan

   बहुत सारी अटकलों के चलते हुए इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को दे दिया है। इसी बीच उन्होंने बहुत सारी बातें का जिक्र किया।  उन्होंने ने कहा हम दो दशक से शिक्षा मंत्री के रूप में भारत की सेवा कर रहे थे। हम युवाओं की भावनाओं को मानते हैं। नीट यूजी में हुए  पेपर लीक के चलते अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।

   इसी बीच उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकते इसका लाभ उठाएं और ये हमारी जिम्मेदारी थी। हम इससे पीछे नहीं हट सकते हैं।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।


लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन 26 दिन के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह रहे महजूद। छात्र बोले जारी रहेगा आंदोलन।

 

मेदांता hospital sonam wangchuk 

पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने कल अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि  अगर सरकार के कुछ केंद्रीय मंत्री आए और हमें भरोसा दे कि बच्चों पर कोई कार्यवाह न हो और जवाबदेही तय हो तो मैं अनशन को तोड़ सकता हूं।

जंतर मंतर दिल्ली में हो रहे आन्दोलन में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया था।यह सब संसद तक मार्च होने के दो दिन पहले हुआ था। जिससे युवाओं में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया। अब यह एक विशाल जनांदोलन का रूप ले चुका है।नीट पेपर लीक को लेकर देश के अलग अलग कोनों में आंदोलन शुरू हो गए। अब ऐसी खबरें आ रही है कि कई जगह पर युवाओं और पुलिस में झड़प हो गई है। यह आंदोलन युवाओं के जागरूक  होने की याद दिला रहा है।

आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल जहां सोनम वांगचुक का इलाज चला रहा है।इससे पहले उनका शब्दरगंज हॉस्पिटल में चला रहा था।कोर्ट के आदेश पर ,सोनम वांगचुक की पत्नी और उनके घर वाले वहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। जोकि बाद फिर कोर्ट ने आदेश दिया और वहां से रेफर करके मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया। मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर और  कई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन 26 दिन के बाद तोड़ दिया।

    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी युवाओं का कहना की, जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन शांतिपूर्वक देश के अलग अलग कोनों में चलता रहेगा। अब यह आंदोलन एक विशेष व्यक्ति का न होकर, जनांदोलन बन गया है, जिसमे स्वतः लोग जुड़ रहे हैं। अभीतक सरकार तक ने अपनी गलती को नही माना और न जवाब देही तय की है।

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बुधवार, 22 जुलाई 2026

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