The Public Pahuch

शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

Bihar Gen Alpha ने 4 km किया मार्च यह प्रदर्शन SDM's office के बाहर हुआ।

बिहार में Gen Alpha ने किया प्रदर्शन जिसमें लगभग 50 छात्र 6 से आठवीं कक्षा के छात्र थे। जिनकी SDM साहब से सामान्य मांगे हैं। मिड डे मील की गुणवक्ता अच्छी हो, साफ पीने का पानी , टॉयलेट, इलेक्ट्रिसिटी, क्लासरूम पंखा और यूनिफार्म से जुड़ी समस्या है। अगर आमतौर पर देखें तो पढ़ाई से संबंधित पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल है। नीट पेपर लीक से जुड़े और शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को लेकर लहर की तरह पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। यह प्रदर्शन बिहार के सिनुरा मिडिल स्कूल ज्ञान जनपद के छात्रों ने स्वयं से मंगलवार को 4 Km  से मार्च निकाला टिकरी SDM के ऑफिस तक और सामान्य सुविधाओं के मुद्दे थे।

     इस प्रदर्शन के बढ़ने कारण कई बार नाम मात्र जांच हुई लेकिन उनका कोई परिणाम नहीं निकला और उनकी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जब यह विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया जिससे दर्जनों छात्र जो सामान्यतः आठवीं कक्षा के छात्र हैं जो SDM ऑफिस के सामने बैठे हैं।

    टीकरी SDM Praveen Kundan protest पर संज्ञान लेते हुए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जिसमें इन्क्वारी कम्पैरिजन असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट सप्लाई ऑफिसर चौहान कुमार, एग्जिक्युटिव ऑफिसर रंजीत सिंह और ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर योगेंद्र पासवान जो कि इस जांच को पूरा करेंगे और इसकी रिपोर्ट सौपेंगे।

    इसके बाद एक्जिक्यूटिव मैजिस्ट्रेट SDM के कहने के बाद तुरंत 6 बच्चों से मिले जिसमें तीन लड़किया और लड़के टीचर्स की उपस्थिति में। छात्रों की सामान्य शिकायतें थी जैसे पानी , टॉयलेट, मिड डे मील, और यूनिफार्म।

  स्कूल के हेड मास्टर ने चेतावनी देते हुए कहा समस्या का समाधान 3 से 4 दिनों में पूरा हो जाए ।

      

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

Farmer's protest मध्यप्रदेश तय MSP मूल्य पर खरीदी जाय मूँग की दाल किसान अपनी मांग को लेकर उतरे सड़क पर

किसान की हर फसल की MSP  तय हो।

MSP तय हो

  मध्यप्रदेश में किसान पिछले 4 दिनों से अपनी मांग को लेकर सड़क पर धरना दे रहे हैं। उनका कहना है कि हर फसल की एक तय सरकारी मूल्य होना चाहिए।  जिससे किसान फसल को उचित दरों पर बेंच सके। किसान अपने घर से खाने पीने का सामान लेकर सड़क पर बैठ गए हैं। उनका कहना है कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम यही बैठे रहेंगे।

       इस प्रदर्शन की शुरूवात मार्च के रूप में नर्मदापुरम से लेकर मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल तक निकला है।यह मध्यप्रदेश सरकार के लिए सबसे बड़ा आंदोलन है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसमें पुलिस बल का प्रयोग नहीं किया गया है। हम शांतिपूर्वक उनको आगे बढ़ाने दिया।

      किसान फसल कटने तक खेत में संघर्ष करता है उसके बाद फसल की उचित दरों के लिए सड़क पर धरना करे। किसानों का कहना है कि  जैसे अन्य दलों के बराबर ही मूंग की दाल का भी एक तय MSP हो चाहिए ।जिससे  हम अच्छी कीमतों पर फसल को बेच सके।

    यहां पर मध्यप्रदेश सरकार का कहना की हमारी प्राइम सपोर्ट स्कीम के अनुसार राज्य का कुल उत्पादन का 25% ही सरकारी मूल्यों पर खरीद सकते हैं। मूंग के दाल का सरकारी मूल्य 8768 रुपए पर कुंतल है। उदाहरण के तौर पर मान लो कि पूरे प्रदेश 100 kg  फसल हुई उसमें से सरकार 25 kg ही सरकारी मूल्य पर खरीद सकती है। जिससे बची हुई फसल को कम कीमतों पर खुले बाजार में बेचना पड़ता है।

      दिल्ली की तरह ही मध्यप्रदेश में Gen Z ने किसानों के साथ मिलकर प्रदर्शन कर रहे और किसानों की समस्या को समझ रहे हैं। जब किसान संघर्ष करके खुश नहीं रहेगा तो धरती पर हरियाली कैसे होगी।

बुधवार, 29 जुलाई 2026

Vande Mataram Bill पारित राज्यसभा से नियम का उल्लंघन करने पर होगी 3 साल तक सजा।

Vande Mataram Bill 2026


आज वंदे मातरम् बिल राज्यसभा यानी उच्च सदन से पारित हो गया है। इस बिल के तहत वंदे मातरम् के  अपमान को रोकने के लिए इस बिल को लाया गया है। वंदे मातरम् बिल 2026 के संशोधन के अनुसार यदि कोई वंदे मातरम् गान के समय जानबूझ कर अपमान करता है तो उसको 3 साल तक सजा का प्रावधान है। इसको सारा प्रोटोकाल जन गण मन की तरह ही दिया जाएगा।

    इस विधेयक के पारित होने पर गृहराज्य मंत्री नित्यानन्द रॉय ने कहा यह विधेयक हमारी राष्ट्रीय धरोहर, और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान दिलाता रहेगा । यह संशोधन एक बदलाव नहीं यह हमारी सांस्कृतिक विरासत को बचाता रहेगा।

     राज्यसभा में वंदे मातरम् बिल की चर्चा के दौरान विपक्षी पार्टी सदस्यों ने सदन वाकआउट किया था हालांकि बाद मे आम आदमी पार्टी, बीजू जनता दल,भारत राष्ट्र समिति और कांग्रेस के सदस्यों ने इस चर्चा हिस्सा लिया और बिल ध्वनिमत से पारित हो गया।

   लांच के बाद उपसभापति हरिवंश की कार्यसूची में शामिल राष्ट्र गौरव  अपमान निवारण बिल की चर्चा हुइ।इस बिल के तहत हमें अपनी राष्ट्रीय धरोहर सम्मान करना होगा। इसके बाद विपक्ष ने अमितशाह से जवाब मांगा और नारेबाजी शुरू कर दी। अमितशाह ने अभी तक कोई बात नहीं की है।

     इसी क्रम मे दूसरी ओर लोकसभा मे एंटी पेपर लीक बिल को मंजूरी मिल गई है।इस मानसून सत्र में लंबी चर्चा के बाद इस बिल को एकमत ध्वनि से पारित किया गया। इसी बीच पक्ष और विपक्ष में काफी नोकझोक हुई  लोकसभा राहुल गांधी के भाषण को लेकर दोनों पक्षों में तनातनी हुई।

भारत, चीन पर US का लगेगा 100% टैरिफ रूस को आर्थिक रूप से घेरने की तैयारी।

US Russia sanction Bill 2026 


रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच US ने रसिया को घेरने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिसमें US ने रसिया के खिलाफ सैंक्शन बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनाने के बाद भारत ,चीन  स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान  से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।  इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जो रूस से तेल गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों का आयात करते हैं।डोलांड ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
      यह महत्वपूर्ण विधेयक US के दिवंगत सीनेट लिंडसे ग्राहम ने बनाया था। अमेरिका कैपिटल हिल जहां यह वोटिंग हो रही थी वहां जेलेंस्की भी महजूद रहे, यह एक दिलचस्प बात है। इस विधेयक के समर्थन में 86% सीनेटर्स  ने वोटिंग की जबकि इसके विरोध में 12%  वोट पड़े। इस विधेयक  का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना। जिससे  उन देशों को किसी तरह से रूस से दूर किया जा सके जिनके रूस की साथ अच्छे रिश्ते हैं।
    अमेरिका के 100% टैरिफ से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ है जबकि वही चीन पर 12.5% टैरिफ है। यदि 100% टैरिफ लग जाती है तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर दोगुनी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। इस विधेयक को डोलांड ट्रंप ने हरी झंडी दिखा दी है।
   विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय निर्यात में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।

   यह टैरिफ इस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और पहले से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मार्ग बाधित। जिससे तेल गैस की आवाजाही ठप हो गई है।

   पहले भारत अपने जरूरतों का 40% तेल गैस इन्हीं खड़ी देशों से पूरा करता था जब अंतर्राष्ट्रीय जलडमरू मध्य में आवाजाही बाधित है। जिसके कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है ।

   सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल  के अनुसार हालांकि इस विधेयक में कुछ राहत दी गई है।इसमें यह छूट उन देशों को मिलेगी जो देश रूस के कुल तेल का 15% खरीदेगा ।

       

Lucknow कानपुर elevated expressway 13 दिन के अंदर ही धसा उद्घाटन में पहुंचे थे बड़े मंत्री।

 धसा लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे 


हाल में ही लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे  का उद्घाटन जुलाई 2026 को हुआ था। जिसमें नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता महजूद रहे। इस प्रोजेक्ट का नाम लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे ग्रीन फील्ड है और अधिकारी इसकी मरम्मत करवाते नजर आये। यह लखनऊ  उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाता है।कमाल की बात यह है उद्घाटन के 13 दिन बाद ही यह एक्सप्रेसवे धस गया ।इसको बनने में लगभग 4 साल से भी ज्यादा का समय लगा और काफी मेहनत बाद बन पाया । बताया गया इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से यात्रा सुगम और समय की बचत होगी। इसको बनने में टोटल खर्च 4200 (42 हजार करोड़ ) रूपये लगे हैं।जिसको National   Highway Authority of India ने बनाया है।जिसकी पूरी लंबाई 63 किलोमीटर है।
    
  यह एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं लैस है,जिस पर AI कैमरा , हाई स्पीड, इमर्जेंसी सुविधाएं है। जो यात्राओं को आसान बनाती हैं
      इसी क्रम मे उत्तराखंड  के नंदा की चौकी प्रेम नगर में टांस नदी पर बना पुल से जुड़ी रोड के एक साइड का हिस्सा बारिश के कारण धस गया है। इसको बनाने में 16 करोड़ रुपए खर्च हुए । उद्घाटन के 16 दिन बाद ही पुल डिस्ट्रॉयड हो गया। हालांकि अधिकारियों ने बताया पुल सुरक्षित है। यह सड़क मुख्यमार्ग को जोड़ती है।भ्रष्टाचार और उद्घाटन ये दोनों शब्द एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। अगर जो उद्घाटन बंद हो गये तो भ्रष्टाचार अपने आप बंद हो जाएगा और भ्रष्टाचार होगा तो उद्घाटन भी होगा। पर एक बात नेता लोग को कोई फर्क नही पड़ता है।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 18 साल से कम उम्र प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करना होगा। ये मामला जंतर मंतर से जुड़ा है।।


20 जुलाई  को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में जिन छात्रों पर कार्यवाही की मांग की जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा है प्रदर्शन कारी छात्रों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई में कहा था कि लोकतंत्र में ऐसे प्रदर्शन होते रहते हैं । मामले की गंभीर और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

     Supreme कोर्ट का बड़ा आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ सुनाया है। नीट पेपर लीक में प्रदर्शन कर रहे छात्र जिनकी उम्र 18 साल से कम है उन पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह किसी भी राज्य जुड़ा हो। CCTV camera या ड्रोन की द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग या डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखे इसे किसी भी हाल सार्वजनिक नहीं क्या जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और 7 राज्यों को नोटिस जारी किया है।  कोर्ट ने कहा राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद  हाई लेवल कमेटी का गठन होगा। इस कमेटी के द्वारा हाल में घटित हुए मामलों की निष्पक्ष जांच कराएगा।

     कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है जिसने भी ज्यादती की है कानून उसके खिलाफ अपना काम करेगा। इस सब के खिलाफ पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक जांच का कोई मतलब नहीं है।

      CJI सूर्यकांत ने कहा इन सभी पिटीशन में एक आरोप कई बार लगाया गया है। जंतर मंतर दिल्ली के प्रदर्शन में पुलिस द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जिसमें कई लोगों चोटें आई हैं। एक 19 साल के लड़के की आँख रोशनी चली गई है। इलेक्ट्रॉनिक बैटन के कारण एक लड़की को ICU में भर्ती कराया गया है। एक और आरोप है जिसमे पुलिस के द्वारा कील वाली लाठी का प्रयोग जिसमें जान खतरा और एक आरोप  मीडियाकर्मी के घायल होने का भी मामला है। पुलिस वाले सिविल ड्रेस में, उनके पास बैचेस नहीं थे और पुलिस की हिंसा का मामला है।

  केन्द्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस हिंसा में 250 से ज्यादा पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार छात्रों पर बल का प्रयोग हल्के में नहीं ले रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुषार मेहता को टोकते हुए  कहा इसलिए हम चाहते हैं जांच हो ,इस तुषार मेहता ने कहा हम ये नहीं कहते हैं कि हिंसा छात्रों ने की लेकिन आंदोलन के दौरान इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुसे जिसके द्वारा यह हिंसा हुई जिसका हम डेटा पेश करेंगे। उन्होंने ने दावा किया इसमें वो लोग शामिल थे जो पहले से किसी आरोपो में शामिल हैं।

   इसमें जांच समिति को लेकर भी दलील हुई  दोनों लोगों का कहना है कि यदि हम अपनी  अपनी तरफ से रिटायर्ड जजो का चुनाव करेंगे तो हम पर आरोप लगेंगे न इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा हम खुद से इस समिट का गठन करेंगे।

     इसी बीच बिहार का भी मामला सामने आया जिसमें सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि हम मुकदमे वापस ले रहे हैं। लेकिन अभी 150 ज्यादा नाबालिक बच्चे पुलिस की कस्टडी में है। जिनको 48 घंटे के अंदर मजिस्टेट के सामने पेश किया जाय।

सोमवार, 27 जुलाई 2026

Bihar Violence पुलिस ने चलाई AK 47 , पुलिस एक अनोखा इतिहास बना रही है। और अलग अलग राज्यों छात्रों को अरेस्ट किया जा रहा है।

 


देश में हुए पेपर लीक के कारण देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। जिसमें कही कही हिंसा भी हुई जिसको लेकर पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। छात्रों को अलग अलग राज्यों से गिरफ्तार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस से लेकर और अलग अलग राज्यों की पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की है। मगर हद तो तब हो गई जब बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बिहार पुलिस ने AK 47 तानें नजर आई। कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस ने 4 राउंड फायरिंग की है। बाद में पुलिस बड़े अधिकारियों से पूछा गया तो बताया कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया। इसका आदेश किसने दिया क्या बिहार पुलिस को पता नहीं ये प्रदर्शनकारी कौन है। ये कौन सा तरीका बिहार पुलिस का है।

  हिंसा को कोई भी साथ नहीं देगा और हिंसा होनी भी नहीं चाहिए। इससे कुछ भी अच्छा नहीं होता है।बहुत सारे कैमरे लगे होते हैं रोड पर उनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तस्वीरों की पहचान करो और उन पर कार्यवाही करो।कई रिपोर्ट आ रही है कि पुलिस किसी बिना आरोप के लोगों उठा रही है और न ही उनके घर वालों को सूचना दी जा रही है। प्रशासन से पूछने पर बताया कि अभी ऐसी कोई बात नहीं सबकी हालत ठीक है।

    लोगों का क्या भरोसा शादी वर्दी में पुलिस वाले हैं या गुंडे जो भीड़ में मारपीट करते नजर आये। किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश भी नहीं कि जैस जंतर मंतर दिल्ली में देखा गया।आखिर सरकार इन सब पर कब कार्यवाही करेगी। कई लोगों को बुलेट लगी है।विपक्ष ने पत्र लिखकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है जिसको लेकर हर दिन संसद के दोनों सदनों में विपक्ष नारेबाजी कर रहा।

    विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा और ओम बिड़ला बोल रहे यह पेपर लीक को रोकने के लिए महत्वपूर्ण विधेयक लाया जा रहा है इस पक्ष और विपक्ष शांतिपूर्वक बात करे । इसके लिए हम उनको पर्याप्त समय देंगे । CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों का कहना है कि यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी पर खरी नहीं उतरती है तो हम फिर से आंदोलन कर सकते हैं।

Anti paper' leak Bill and Amendment

  Parliament मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे बीच सरकार ने आज यानी 27 जुलाई को Anti paper leak Bill और Amendment 2026 को संसद के दोनों सदन में संसदीय कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेन्द्र सिंह ने पेश किया। इसमें पेपर लीक curruption को रोकना और सजा के लिए कड़े  नियमों को बनाना और उनका पालन करना। Fast track courts जिसमें संवेदनशील मुद्दों के लिए कार्यवाही को कम समय में सुनवाई करना और फैसला सुनाना। जिससे सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके।

   


किसी भी पेपर लीक से जुड़ी समस्या को हल्के में न लिया जाए, उस पर तुरंत कार्यवाही हो और नियमित समय से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए । विपक्ष सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों पर लाठीचार्ज हुई और अमितशाह से जवाब की मांग करते हुए हंगामा कर रहे थे। संसद की कार्यवाही स्थगन होने के बाद दोबारा 12 बजे के बाद शुरू हुई और दुबारा विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच उन्होंने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया।

  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने TMC सहित कई सांसदों का नाम लिया और कहा कि क्या वे इस विधेयक को लेकर कुछ बोलना चाहते। इस पर विपक्ष कि तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ओम बिड़ला ने कहा यह महत्वपूर्ण विधेयक है इस पर देश की मंशा पर व्यापक चर्चा होगी। विपक्ष बहुत सारे लोग इस पर चर्चा करने की मांग कर रहे थे। यह सुधार का प्रथम चरण है। सबको इसे साथ देना चाहिए, हम इसके लिए पर्याप्त देंगे और यह बिल पास हो सके ताकि पेपर लीक रोकने का समुचित प्रावधान हो सके।

    सरकार के इस बिल में पेपर लीक और फ्रॉड करने वालों के लिए कड़े नियमों का प्रावधान है। जिसमें कानूनी प्रक्रिया को स्पीड देना ।किसी भी पेपर लीक खिलाफ दर्ज हुए मामलों में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करना होगा। 2 महीनों के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पेपर लीक या अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने पर 5 से 10 साल तक सजा होगी। इससे पहले 3 से 5 साल सजा का प्रावधान था। यदि जुर्माने की बात करें तो पहले 50 लाख ,और 10 करोड़ है। एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन होगा  और हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। पेपर लीक माफिया को पकड़ कर  कम समय में मामलों को सुलझाया जा सके।

FCRA Act and Amendment Bill 2026

 


संसद के इस मानसून सत्र में सरकार FCRA बिल पारित करने के लिए ला रही है। यह मानसून सत्र 20 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें 5 नए बिल है और दो पहले से ही संसद में लागू करने के लिए ,बहस चल रही है। इस सत्र में नीट पेपर लीक को लेकर संसद में काफी हंगामा हो रहा है और कई बार सदन की कार्यवाही को रोकना  पड़ा।

FCRA ( Foreign Countribution Regulation Act) Amendment Bill 2026

इस बिल को  28 मार्च 2026 को भारत सरकार ने लोकसभा में प्रस्तावित किया था।  यह बिल विदेश से आने वाली फंडिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए इसे लाया जा रहा है। कौन लोग और संस्थान है जो इस फंडिंग को प्राप्त कर रहे हैं। इसको खर्च किस पर किया जा रहा है। इन सब पर सरकार की नजर रहेगी।इसका मुख्य उद्देश्य है इसके गलत प्रयोग को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।  ऐसे कई खबरें आती रहती हैं कि फंडिंग का उपयोग गलत कार्यों में किया जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हितों को ध्यान रखते हुए सरकार ने इस बिल को लाया है यह बिल होम मिनिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा।

     देश दुनिया में बहुत सारे NGOs या संस्थान है जिनको विदेशों से फंडिंग आती है। जिसके द्वारा बहुत सारे प्रोग्राम चलाए जाते हैं जैसे हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए विदेशों से फंडिंग मिलती । यह फंड पॉलिटिकल पार्टी , सांसद, जज, सरकारी कर्मचारी और मीडिया संस्थानों को नही मिल सकता है।

     यदि FCRA किसी कारण से रद्द या ले लिया जाता है तो उस पर बने कानून के अनुसार FCRA  उस संपति को अपने प्रबंधन में ले लेगा । यदि पंजीकरण समाप्त होने पर सारी संपति प्रबंधन के पास जाएगी ,यदि NGOs का सर्टिफिकेट बहाल कर दिया जाता है तो सारी संपति वापस कर दी जाएगी।

  यदि पंजीकरण एक निश्चित समय तक जारी नहीं किया जाता तो सरकार सारी संपति जप्त कर लेगी और उसका उपयोग सार्वजनिक हितों के लिए किया जाएगा।

   यदि पंजीकरण कैंसिल कर दिया जाता है तो आप ऑथोरिटी विरोध कोर्ट में इसकी अपील कर सकते हैं।

    FCRA नियम के तहत अनुसार कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर सजा अधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1वर्ष तक घटने प्रावधान है।

    जितने भी राज्यों में NGOs  पंजीकरण है उन सभी को सरकार को अपने कार्यों के विषय में बताना होगा। जिससे सरकार सुनिश्चित करे पाए।

   सरकार का कहना है कि इसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है और हम देश में राष्ट्रीय सुरक्षा ,संप्रभुता और शांति को बनाए रख पाएं। बहुत सारे लोगों का कहना है कि सरकार इस पर अपना ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती। इसके परिणाम स्वरूप इसका प्रभाव पर देखा  लोगों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता। उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा जो विदेशों से NGOs की फंडिंग का  दुरूपयोग करते हैं और जो यह सब करवाते हैं। यह बिल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और संसद में इसकी बहस चल रही है। 

रविवार, 26 जुलाई 2026

शिक्षा मंत्रालय पद संभालते ही पहलाद जोशी ने अधिकारियों से अहम मुलाकात होंगे कुछ बड़े बदलाव

    नीट पेपर घोटाला में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, केंद्रीय मंत्री पहलाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्य भार । आज यानी रविवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों से की बातचीत।  हालांकि पहलाद जोशी के पास पहले से ही कई बड़े मंत्रालय हैं और उनके पास ही मौजूद रहेंगे। अभी उनके पास कई मंत्रालय हैं जैसे उपभोक्ता मामले, खाद्य और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। भारत सरकार ने उन पर भरोसा जताया है।

   पहलाद जोशी काफी लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उनकी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि संसद के बाहर हो या अंदर एक सक्रिय नेता के रूप में देखी जाती है। उन्होंने ने अपने जीवन की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ से की थी। कर्नाटक में उन्होंने ने संगठन के लिए जमीनी स्तर से जुड़कर काम किया है और उनकी अच्छी पहचान है अपने क्षेत्र में  और लगातार काम करते रहे हैं।

    अपना पहला चुनाव 2004 में लड़ा था और अब वह 22 साल से  लगातार संसद है।  लगातार 5 बार कर्नाटक से लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं। जिससे वो अपने क्षेत्र के प्रभावशाली नेता बन गए है।। समय समय पर उनको सरकार ने कई जिम्मेदारियां दी हैं।

  सरकार में रहते हुए कई बड़े पदों को संभाला है वर्ष 2012 कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 2014  के बाद लोकसभा में संसदीय समितियों की जिम्मेदारी मिली। 2019 में मोदी सरकार ने कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भार सौंपा गया है। अब उनके पास अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी आ गई है।

    उनके पास शिक्षा व्यवस्था को लेकर इस समय कई चुनौतियां हैं। चाहे नीट पेपर लीक को लेकर हो या नई शिक्षा नीति लागू करना हो। शिक्षा नीति में कई बदलाव सख्त जरूरत है। NTA हो या और शिक्षा से जुड़े संस्थान। अब युवाओं और उनके माता पिता का भरोसा नए शिक्षा मंत्री पहलाद जोशी पर टीका हैं। बहुत सारी पॉलिसीज बनानी और लागू होनी है।

GenZ ने बनाया इतिहास In new era 2026

   GenZ ने वह कर दिखाया जो इस इतिहास में पहली बार और पिछले 12 सालों में पहली बार हुआ ।  Gen Z ने इस आंदोलन को देश में खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चलाया था।  अंत में युवाओं की जीत हुई। यह जीत एक लोकतंत्र की जीत है। सरकार कहना था कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते हैं ये दूसरी सरकारों में होता है। युवाओं ने बता दिया कि ये सब लोकतंत्र में नही होता है। युवाओं का कहना था कि हम सिस्टम को चलाने के लिए इन लोगों को चुनते हैं, बाद में यही लोग हम पर शासन करने लगते हैं। सरकारें कभी शासन करने के लिए नहीं है, शासन जनता ही करती है। चाहे इतिहास हो या आने वाला समय , रिवोल्यूशन इसका सबूत है।

      सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन किसी ने सोचा नहीं था, धरातल पर जन आंदोलन का रूप ले लेगा। आन्दोलन में पूरे देश के युवाओं, बच्चे और बुजुर्गों ने इसको एक नई ऊर्जा दी और यह आंदोलन शांतिपूर्वक सफल हो पाया। यहां पर कोई जाति, नहीं समुदाय और पार्टी से हटकर देश के असल मुद्दों पर बात हो रही थी। युवाओं में डर खत्म हो गया था जहां बड़े बड़े लोग बोलने से डरते थे। ये लोकतंत्र है जहां हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य देश के लिए होते हैं।

   इस आंदोलन को देश के सभी वर्गों के लोगों ने साथ दिया। खासकर युवाओं ने जिससे यह आंदोलन जन आंदोलन बन गया।पर सरकार को पता नहीं किसी बात का अहंकार था। बहुत सारी छाप इस आंदोलन ने युवाओं के मन में जगह बना ली है।विपक्ष की सभी पार्टियों ने भी अपना पूरा साथ दिया, भले ही राजनीतिक लाभ से लेकिन दिया तो । अच्छे मुद्दों के लिए राजनीति क्यों नहीं हो सकती और कौन राजनीति नहीं करता। इसमें आप ज्यादा समझदार हैं। 

   युवाओं को क्या नहीं कहा गया इस आंदोलन में, चीन पाकिस्तान का एजेंट बताया गया। विदेशी फंडिंग से आंदोलन चल रहा है।  दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने क्रूरता की हद पार कर दी। बच्चों, युवाओं और लड़कियों, महिलाओं तक को नहीं छोड़ा। इसमें इसका साथ main stream media ने दिया और अपनी तरफ से पूरा आंदोलन दबाने की कोशिश की। मीडिया पूरी तरह से सरकार के चरणों मे लेटी हुई थी। मीडिया ने अपने पतन के रास्ते खुद से बनाए थे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को उठाया। मानता हूं ads और सरकार का दबाव होता है पर इतना भी नहीं होता है।

    GenZ ने साबित किया कर दिया कि सिस्टम में भ्रष्टाचार है और हम आतंकवादी नही है। सरकार में सब मंत्री संत्री करप्ट नहीं हैं अच्छे भी हैं। सरकार की आलोचना का सबसे बड़ा कारण मीडिया है,क्योंकि इसने युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचने नहीं दिया। युवाओं को जगाने में CJI सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और युवा उनको धन्यवाद दे रहे थे। युवा एक नए भारत की कल्पना कर रहे थे,जिसमें सबकुछ अच्छा हो । युवाओं ने जबरन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा छीन लिया। सच में यही लोकतंत्र की ताकत है।

    युवा अभी जाग रहा है, अब देश में मनमाने ढंग से कुछ भी नहीं चल सकता। सबकी अलग अलग बाते थी और मुद्दे थे लेकिन आवाज एक थी। सिस्टम में सुधार होना चाहिए। सरकार और जनता के बीच संवाद होना चाहिए। भारत का एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह सब जानना जरूरी है। पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री जी के बीच और जनता के बीच कोई बात ही नहीं हुई। यही सब कारण थे, जिसमें GenZ युवाओं ने इतिहास लिखा। 

शनिवार, 25 जुलाई 2026

Zen G जीत गए, सरकार को झुकना पड़ा।

    काकोरोच जनता पार्टी का आंदोलन करीब एक महीने से ज्यादा चला , सरकार को झुकना पड़ा। आज उन सभी युवाओं की जीत हुई, जो खराब शिक्षा व्यवस्था खिलाफ लड़ रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। इन युवाओं ने बता दिया कि देश हमारा है, और हम अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। जंतर मंतर का ऐसा नजारा था, कि शब्दों में बताना संभव नहीं है। उनकी  अलग ही खुशी थी ,ऐसा लग रहा था कि उन्हें सबकुछ मिल गया हो , आंखों में खुशी के आंसु थे। सरकार  का अहंकार टूट गया था।

Cacooroch protest 2026

     इन युवाओं के कोई ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिसमें राजनीति हो सके । इनके सीधे सवाल सरकार से थे , शिक्षा व्यवस्था को लेकर,   खराब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये कोई सत्ता नहीं मांग रहे थे। इसमें भी सुनने में सरकार एक महीने से ज्यादा का समय ले लिया। शायद इनकी भाषा सरकार को समझ नहीं आ रही थी, हालांकि बाद मे समझ आ गई। युवाओं की अच्छी बात यह थी कि वह किसी पार्टी, जाति समुदाय और वर्ग का न होकर आम मुद्दों की बात कर रहे थे। जो सरकार को समझ नहीं आ रहा था। 

      ये नए जमाने के GenZ सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले , इनको सोशल मीडिया से हटकर देश मुद्दों की भी समझ है। ये कहना गलत है कि इन्हें कुछ पता नहीं है। ये लोग अब जाति, धर्म, हिन्दू, मुस्लिम और मंदिर, मस्जिद से हटकर भी सोच रहे हैं। अब इनको देश के असल मुद्दों से भटकाया नही जा सकता और डर नाम की जगह इनके अंदर नही है। चाहे कितनी  सिविल ड्रेस और बिना बैचेस के पुलिस उतार दो ।इनके सीधे सवाल सरकार से होते हैं। 

      GenZ का मानना है कि, देश इन सबसे बढ़कर कही उपर है। पार्टियां बनती बिगड़ती रहती हैं, लेकिन देश नही। सरकार के प्रचार तंत्र ने आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विदेशों से फंडिंग आ रही है, पाकिस्तान के एजेंट है, चीन के एजेंट है, गुंडे और दहशतगर्द क्या नही बोला गया इन युवाओं को, जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लाठियां खाई , आशु गैस के गोले चले और कैनन वाटर की गाड़ियां आई, सबकुछ हुआ जो एक आंदोलन मसलने के लिए किया जाता है। ये लोग फिर भी शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे और अपनी आवाज को उठाते रहे।

     आंदोलन में जुड़ने वाले सबसे ज्यादा युवा थे। जो इस आंदोलन से नही जुड़ पाए उन्होंने घर से ही चाय और खाना भेजा ।  यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत  बन गई और आंदोलन देश अलग कोनों में होने लगे। Main stream media ने इसे कोई कवरेज नहीं दिया, जिससे मीडिया के भी नाकामी के नारे लगे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को अपने मंच पर जगह दिया। इस आंदोलन ने अपना एक इतिहास बना लिया। जिसमें मीडिया और सरकार इसके खिलाफ थी और इतिहास भी शांतिपूर्वक ऐसे ही बनता है। युवाओं ने भी इस नए समय में नई पहचान बनाई।

Dharmendra प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। नीट paper leek

      जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन अब एक नया मोड़ ले लिया है। छात्रों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।  और अब उनकी मांगे समय के अनुसार बदलती जा रही हैं। प्रधानमंत्री रील बनाते जा रहे हैं। वो  कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की ,जिसमें आरोपी को दस साल तक सजा और दस करोड़ जुर्माने के लिए बिल पास करने की बात कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री जी की रील को लेकर युवाओं में नाराजगी देखी गई है।  आंदोलन का बड़ा होने का कारण सरकार है और अब तक उनकी मांगे मान ली  जाती।

   

Dharmendra Pradhan

   बहुत सारी अटकलों के चलते हुए इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को दे दिया है। इसी बीच उन्होंने बहुत सारी बातें का जिक्र किया।  उन्होंने ने कहा हम दो दशक से शिक्षा मंत्री के रूप में भारत की सेवा कर रहे थे। हम युवाओं की भावनाओं को मानते हैं। नीट यूजी में हुए  पेपर लीक के चलते अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।

   इसी बीच उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकते इसका लाभ उठाएं और ये हमारी जिम्मेदारी थी। हम इससे पीछे नहीं हट सकते हैं।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।


लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन 26 दिन के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह रहे महजूद। छात्र बोले जारी रहेगा आंदोलन।

 

मेदांता hospital sonam wangchuk 

पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने कल अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि  अगर सरकार के कुछ केंद्रीय मंत्री आए और हमें भरोसा दे कि बच्चों पर कोई कार्यवाह न हो और जवाबदेही तय हो तो मैं अनशन को तोड़ सकता हूं।

जंतर मंतर दिल्ली में हो रहे आन्दोलन में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया था।यह सब संसद तक मार्च होने के दो दिन पहले हुआ था। जिससे युवाओं में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया। अब यह एक विशाल जनांदोलन का रूप ले चुका है।नीट पेपर लीक को लेकर देश के अलग अलग कोनों में आंदोलन शुरू हो गए। अब ऐसी खबरें आ रही है कि कई जगह पर युवाओं और पुलिस में झड़प हो गई है। यह आंदोलन युवाओं के जागरूक  होने की याद दिला रहा है।

आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल जहां सोनम वांगचुक का इलाज चला रहा है।इससे पहले उनका शब्दरगंज हॉस्पिटल में चला रहा था।कोर्ट के आदेश पर ,सोनम वांगचुक की पत्नी और उनके घर वाले वहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। जोकि बाद फिर कोर्ट ने आदेश दिया और वहां से रेफर करके मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया। मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर और  कई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन 26 दिन के बाद तोड़ दिया।

    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी युवाओं का कहना की, जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन शांतिपूर्वक देश के अलग अलग कोनों में चलता रहेगा। अब यह आंदोलन एक विशेष व्यक्ति का न होकर, जनांदोलन बन गया है, जिसमे स्वतः लोग जुड़ रहे हैं। अभीतक सरकार तक ने अपनी गलती को नही माना और न जवाब देही तय की है।

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बुधवार, 22 जुलाई 2026

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मंगलवार, 21 जुलाई 2026

Black Day of Education 2026

Paper leek


शिक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन मेरे इतिहास का पहला और सबसे बड़ा आंदोलन है। जिसको मैने अपनी आर्टिफीशियल (कैमरा) आंखों से देखा है, ये आंखे शायद कभी झूठ नहीं देखती हैं।  इस आंदोलन की शुरुआत के कई कारण रहे,  लेकिन जिसमे शिक्षा व्यवस्था इसका मुख्य कारण था। सोशल मीडिया से शुरू हो कर एक विशाल युवा जन आंदोलन का रूप ले लिया।लगातार हो रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार। पेपर्स में जानकर गलत प्रश्नों को डालना और इससे पैसा कमाना। ऐसे आरोप लगातार शिक्षा मंत्री की एजेसिंयों पर लगते रहे हैं। पेपर की तैयारी करो, गलत प्रश्न खोजों और उसे सरकार को बताओ ।एक गलत प्रश्न का शुल्क 200-300 रूपये तक है, जिसको तुम्हे ही भरना है।27000 से भी ज्यादा सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया। हजारों बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। पिछले 5 साल में 65 से 70 से ज्यादा पेपर 19 राज्यों में लीक हुए हैं। इसी प्रकार से चल रहा था पेपर लीक उद्योग ,जिसका शिकार  देश के पढ़ने वाले बच्चे हो रहे थे। पेपर लीक की समस्या से 20-22 बच्चों ने आत्महत्या कर ली जिसकी जवाबदेही या जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं था।

         इस आंदोलन की शुरूवात कुछ यूं ही मजाकिया अंदाज में 6 जून 2026 को हुई थी। इस आंदोलन को चलाने वाली पार्टी जिसका कोई अपना नाम नहीं । इसके नाम की भी एक दिलचस्प कहानी है। सबकुछ हमारी शिक्षा व्यवस्था से ही जुड़ा है। दरअसल 15 मई 2026 को अदालत में एक सुनवाई के दौरान , न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने काकोरोच शब्द का प्रयोग युवाओं के लिए किया था।  युवाओं ने इसे एक प्रतीक के रूप में लिया और अभिजीत दीपके के द्वारा काकोरोच जनता पार्टी की स्थापना की गई। इसके बाद यह पार्टी एक आंदोलन का रूप ले लिया। सोनम वांगचुक और कई स्टूडेंट्स ने भूख हड़ताल को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का रास्ता अपनाया और बताया हम गांधी जी और भगत सिंह के आदर्शों पर चलने वाले हैं। यहां पर हर एक धर्म, जाति,समुदाय और देश के लोग अलग अलग कोनों से आए और एक दूसरे का ध्यान भी रखा।

    आंदोलन की सबसे अच्छी बात यह है कि, इस आंदोलन में जुड़ने के लिए देश के अलग अलग कोनों से लोग इसमें उपस्थिति दर्ज कराई है। इस आंदोलन में लोग स्वतः अपने हक के लिए,अपने मन से जुड़ रहे थे। इसमें जुड़ने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी और यह कोई पैसे देकर बुलाई गयी भीड़ नहीं थी। युवा  बिना बताए अपने घर से, पॉकेट मनी पर और ट्रेन से भर कर आ रहे थे। यहां उनकी उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही थी।इन लोगों की कोई बहुत बड़ी मांगे नहीं थी ,ये जवाबदेही और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे थे। पेपर की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए एक करोड़ रुपए की मांग कर रहे थे।सरकार इनकी बातों का कोई जवाब नहीं दे रही थी, हद तो तब हो गई जब सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया। शायद यह आंदोलन के बड़ा होने का एक सबसे बड़ा कारण रहा हो।

   इसके बाद से यहां बड़ी संख्या में लोग स्वतः आने लगे 20 जुलाई को होने वाले मार्च में शामिल होने के लिए। यह मार्च जंतर मंतर दिल्ली से संसद तक होना था।  दिल्ली की  पूरी सड़के जनसैलाब से भरी थी। ऐसा युवाओं का जनसैलाब मैने पहले कभी नहीं देखा, केवल शिक्षा के लिए। बहुत सारे जवाब और सवाल थे। दिल्ली की चाक चौबंद देखकर ऐसा लग रहा था कि यहां कोई दहशतगर्द और आतंकी प्रदर्शन करने वाले हैं। हमारी सरकार का बच्चों के लिए ऐसा रवैया था। चारों तरफ बैरिकेडिंग लगी थी। पुलिस बच्चों को आगे पीछे खदेड़ रही थी, हालांकि बच्चों ने अपने धैर्य को बनाए रखा।यह आंदोलन 4 बजे शाम तक एकदम शांतिपूर्वक चल रहा था।  सरकार चाहती तो आंदोलन शांतिपूर्वक हो सकता था, लेकिन उसका इगो (अहंकार) इन बच्चों के  भविष्य से बड़ा है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ आक्रोश हुआ और संसद तक जाने की कोशिश करने लगी और कुछ संसद के पास पहुंच गए।

      इसके बाद पुलिस ने लॉयन ऑर्डर को बनाए रखने और संसद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाठीचार्ज करने लगी। लाठी खाने वाले 15 से 27 साल तक के युवा थे, जो शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आवाज उठा रहे थे। कुछ पुलिस वालों ने क्रूरता की सारी हदें पार दी, जाहिर सी बात है ये सब सरकार के आदेश पर हुआ होगा।  बच्चे खड़े होकर लाठियां खा रहे थे, ये कोई राजनीतिक बैकग्राउंड से नहीं थे । हम आप जैसे आम बच्चे थे।। सिर फटे, बच्चियों के कपड़े फाड़े गए,  पैर खींचे गए , आंसू गैस के गोले चले ,वाटर कैनन की गाड़ियां आई जो कुछ होना चाहिए था सब कुछ हुआ। पुलिस वालों ने अपने बैचेस हटा रखे थे कुछ सिविल ड्रेस में थे। ऐसा लग रहा था कि, सरकार को इन बच्चों की कोई परवाह नही है।इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध में पुलिस पर पत्थर चलाए और गाड़िया तोड़ी,जिससे कुछ पुलिस वालों को भी चोटें आई। किसी भी प्रकार का वायलेंस और विद्रोह, अच्छा नहीं होता है और न ही साथ देना चाहिए। चूक दोनों तरफ से हुई चाहे प्रशासन हो या सीजेपी के कार्यकर्ता, जिसके कारण पत्थर चले। शायद इन दोनों लोगों को अंदाजा नहीं था कि इतनी भीड़ में लोग आएंगे।तक जंतर मंतर कुछ समय के लिए सूना हो गया लेकिन इसके बाद फिर वही उत्साह और जोश के साथ युवा आने लगे।

     इतना सबकुछ होने के बाद भी सरकार ने कोई बात नहीं की और अभी तक न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हुआ (शायद हो भी न)। जिससे युवाओं में काफी ज्यादा आक्रोश देखा गया। यह एक लोकतन्त्र की अच्छी पहचान नहीं है। आंदोलन को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया,लेकिन सरकार विफल रही।  आज के दिन को इतिहास में Black Day Of Education 2026 के नाम से जाना जायेगा। युवाओं में यह बदलाव का जोश , शिक्षा की एक नई पहल होगी। जिसमें युवाओं ने अपने लिए खुद लड़ाई लड़ी। देश के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझा और सरकार को बताया कि हम पढ़े लिखे युवा हैं न की अनपढ़ नेता। इस पूरे आंदोलन को main stream media ने नहीं दिखाया। कुछ यूट्यूब चैनल ने अपने मंच पर पूरे आंदोलन को  जगह दिया। इसी तरह की बहुत सारी बातें, इस आंदोलन को एक नई पहचान देती हैं। शिक्षा के लिए होने वाला यह आंदोलन, अपना नाम इतिहास के नए पन्नों में दर्ज करवाता है।जब कभी शिक्षा व्यवस्था की बात होगी तो इस आंदोलन की , युवाओं से जोड़ कर इसकी भी बात होगी।


सोमवार, 20 जुलाई 2026

जंतर मंतर पर गूंजा पेपर लीक का मुद्दा

 पेपर लीक का मुद्दा अब देश की शिक्षा व्यवस्था के सुधार का एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। जिसमे बच्चों से लेकर, युवाओं और बुजुर्गों ने अपनी उपस्थिति को दर्ज किया है। यह आंदोलन शांतिपूर्वक और गांधी जी के रास्ते पर चल रहा है, जिससे इसकी महत्वाकांक्षा और बढ़ गई है।  CJP आन्दोलन क्या है?  इसकी मांग और विचारधारा क्या है ? क्यों देश का इतना बड़ा मुद्दा बन गया है?  किसने इसकी शुरुआत की? सब  कुछ जानने की कोशिश करेंगे।

पिछले 5-6 सालों से देश में हो रहे लगातार पेपर लीक और पेपर में होने वाली खामियों को लेकर एक आंदोलन शुरू हुआ। जिसकी शुरुआत काकोरोच जनता पार्टी (CJP)के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा 6 जून को जंतर मंतर दिल्ली से इसकी शुरुआत की गई। पूरे भारत के 19 राज्यों में 65-80 पेपर लीक हुए हैं। UDISE के अनुसार 27000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को सरकार ने बंद कर दिया है। अब तो सरकार  यूनिवर्सिटी तोड़ने का प्रोजेक्ट चला रही है। केवल नीट पेपर लीक की वजह और पेपर रद्द होने से 20-21 बच्चों ने सुसाइड कर लिया । कई National education policy (NEP) आई और बजट भी बना लेकिन लागू नहीं हो पाई और न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो पाया।

इस पेपर लीक उद्योग और भ्रष्टाचार से केवल युवाओं का भविष्य खतरे में नहीं है, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकार में है। कई पेपर लीक हुए NEET, SSC, CGL, UPTET बहुत सारे पेपर्स लीक हुए लेकिन इनकी जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं है। शिक्षा मंत्री को शिक्षा से कोई मतलब नहीं है।एक महीना हो रहा है शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री किसी न भी बात करना उचित नहीं समझा। क्या लोकतंत्र में यही सब होता है। 

शिक्षा व्यवस्था के चरमराते हालत को देखते हुए युवाओं ने जंतर मंतर पर,धूप , बारिश में आंदोलन कर रहे हैं। देश के दूर दराज इलाकों से, लोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए आ रहे हैं। ये लोग किसी MP,Mnister IAS और IPS के लड़के नहीं है। आम लोग हैं जिनका सिस्टम विश्वास टूट गया है। ये कोई दहशत गर्द और आतंकी नहीं है, ये सब भारत के लोग हैं। जो अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है,गांधी जी के सत्य अहिंसा मार्ग पर। सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन से जोडक़र इसको एक नई दिशा और दशा दी है। यह देश हम सबका है, हम सब मिलकर तय करेंगे  देश किन हाथों में हो । कई स्टूडेंट्स और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं। यही कारण है,हजारों लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं।

असम में बाढ़ का कहर लाखों लोगों का जीवन हुआ प्रभावित

  असम में बाढ़ का कहर पिछले कई दिनों से लगातार बारिश और ब्रह्मपुत्र नदी अपने उफान पर होने कारण,लाखों लोगों का  जन जीवन प्रभावित हुआ है। लोगो...