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रविवार, 26 जुलाई 2026

GenZ ने बनाया इतिहास In new era 2026

   GenZ ने वह कर दिखाया जो इस इतिहास में पहली बार और पिछले 12 सालों में पहली बार हुआ ।  Gen Z ने इस आंदोलन को देश में खराब शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चलाया था।  अंत में युवाओं की जीत हुई। यह जीत एक लोकतंत्र की जीत है। सरकार कहना था कि हमारी सरकार में इस्तीफे नहीं होते हैं ये दूसरी सरकारों में होता है। युवाओं ने बता दिया कि ये सब लोकतंत्र में नही होता है। युवाओं का कहना था कि हम सिस्टम को चलाने के लिए इन लोगों को चुनते हैं, बाद में यही लोग हम पर शासन करने लगते हैं। सरकारें कभी शासन करने के लिए नहीं है, शासन जनता ही करती है। चाहे इतिहास हो या आने वाला समय , रिवोल्यूशन इसका सबूत है।

      सोशल मीडिया से शुरू हुआ यह आंदोलन किसी ने सोचा नहीं था, धरातल पर जन आंदोलन का रूप ले लेगा। आन्दोलन में पूरे देश के युवाओं, बच्चे और बुजुर्गों ने इसको एक नई ऊर्जा दी और यह आंदोलन शांतिपूर्वक सफल हो पाया। यहां पर कोई जाति, नहीं समुदाय और पार्टी से हटकर देश के असल मुद्दों पर बात हो रही थी। युवाओं में डर खत्म हो गया था जहां बड़े बड़े लोग बोलने से डरते थे। ये लोकतंत्र है जहां हमारे अधिकार और हमारे कर्तव्य देश के लिए होते हैं।

   इस आंदोलन को देश के सभी वर्गों के लोगों ने साथ दिया। खासकर युवाओं ने जिससे यह आंदोलन जन आंदोलन बन गया।पर सरकार को पता नहीं किसी बात का अहंकार था। बहुत सारी छाप इस आंदोलन ने युवाओं के मन में जगह बना ली है।विपक्ष की सभी पार्टियों ने भी अपना पूरा साथ दिया, भले ही राजनीतिक लाभ से लेकिन दिया तो । अच्छे मुद्दों के लिए राजनीति क्यों नहीं हो सकती और कौन राजनीति नहीं करता। इसमें आप ज्यादा समझदार हैं। 

   युवाओं को क्या नहीं कहा गया इस आंदोलन में, चीन पाकिस्तान का एजेंट बताया गया। विदेशी फंडिंग से आंदोलन चल रहा है।  दिल्ली पुलिस के कुछ अधिकारियों ने क्रूरता की हद पार कर दी। बच्चों, युवाओं और लड़कियों, महिलाओं तक को नहीं छोड़ा। इसमें इसका साथ main stream media ने दिया और अपनी तरफ से पूरा आंदोलन दबाने की कोशिश की। मीडिया पूरी तरह से सरकार के चरणों मे लेटी हुई थी। मीडिया ने अपने पतन के रास्ते खुद से बनाए थे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को उठाया। मानता हूं ads और सरकार का दबाव होता है पर इतना भी नहीं होता है।

    GenZ ने साबित किया कर दिया कि सिस्टम में भ्रष्टाचार है और हम आतंकवादी नही है। सरकार में सब मंत्री संत्री करप्ट नहीं हैं अच्छे भी हैं। सरकार की आलोचना का सबसे बड़ा कारण मीडिया है,क्योंकि इसने युवाओं की आवाज को सरकार तक पहुंचने नहीं दिया। युवाओं को जगाने में CJI सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और युवा उनको धन्यवाद दे रहे थे। युवा एक नए भारत की कल्पना कर रहे थे,जिसमें सबकुछ अच्छा हो । युवाओं ने जबरन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा छीन लिया। सच में यही लोकतंत्र की ताकत है।

    युवा अभी जाग रहा है, अब देश में मनमाने ढंग से कुछ भी नहीं चल सकता। सबकी अलग अलग बाते थी और मुद्दे थे लेकिन आवाज एक थी। सिस्टम में सुधार होना चाहिए। सरकार और जनता के बीच संवाद होना चाहिए। भारत का एक जागरूक नागरिक होने के नाते यह सब जानना जरूरी है। पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री जी के बीच और जनता के बीच कोई बात ही नहीं हुई। यही सब कारण थे, जिसमें GenZ युवाओं ने इतिहास लिखा। 

शनिवार, 25 जुलाई 2026

Zen G जीत गए, सरकार को झुकना पड़ा।

    काकोरोच जनता पार्टी का आंदोलन करीब एक महीने से ज्यादा चला , सरकार को झुकना पड़ा। आज उन सभी युवाओं की जीत हुई, जो खराब शिक्षा व्यवस्था खिलाफ लड़ रहे थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद युवाओं में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला। इन युवाओं ने बता दिया कि देश हमारा है, और हम अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। जंतर मंतर का ऐसा नजारा था, कि शब्दों में बताना संभव नहीं है। उनकी  अलग ही खुशी थी ,ऐसा लग रहा था कि उन्हें सबकुछ मिल गया हो , आंखों में खुशी के आंसु थे। सरकार  का अहंकार टूट गया था।

Cacooroch protest 2026

     इन युवाओं के कोई ऐसे मुद्दे नहीं थे, जिसमें राजनीति हो सके । इनके सीधे सवाल सरकार से थे , शिक्षा व्यवस्था को लेकर,   खराब सिस्टम के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ये कोई सत्ता नहीं मांग रहे थे। इसमें भी सुनने में सरकार एक महीने से ज्यादा का समय ले लिया। शायद इनकी भाषा सरकार को समझ नहीं आ रही थी, हालांकि बाद मे समझ आ गई। युवाओं की अच्छी बात यह थी कि वह किसी पार्टी, जाति समुदाय और वर्ग का न होकर आम मुद्दों की बात कर रहे थे। जो सरकार को समझ नहीं आ रहा था। 

      ये नए जमाने के GenZ सोशल मीडिया पर व्यस्त रहने वाले , इनको सोशल मीडिया से हटकर देश मुद्दों की भी समझ है। ये कहना गलत है कि इन्हें कुछ पता नहीं है। ये लोग अब जाति, धर्म, हिन्दू, मुस्लिम और मंदिर, मस्जिद से हटकर भी सोच रहे हैं। अब इनको देश के असल मुद्दों से भटकाया नही जा सकता और डर नाम की जगह इनके अंदर नही है। चाहे कितनी  सिविल ड्रेस और बिना बैचेस के पुलिस उतार दो ।इनके सीधे सवाल सरकार से होते हैं। 

      GenZ का मानना है कि, देश इन सबसे बढ़कर कही उपर है। पार्टियां बनती बिगड़ती रहती हैं, लेकिन देश नही। सरकार के प्रचार तंत्र ने आंदोलन को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। विदेशों से फंडिंग आ रही है, पाकिस्तान के एजेंट है, चीन के एजेंट है, गुंडे और दहशतगर्द क्या नही बोला गया इन युवाओं को, जो पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। लाठियां खाई , आशु गैस के गोले चले और कैनन वाटर की गाड़ियां आई, सबकुछ हुआ जो एक आंदोलन मसलने के लिए किया जाता है। ये लोग फिर भी शांतिपूर्वक आंदोलन करते रहे और अपनी आवाज को उठाते रहे।

     आंदोलन में जुड़ने वाले सबसे ज्यादा युवा थे। जो इस आंदोलन से नही जुड़ पाए उन्होंने घर से ही चाय और खाना भेजा ।  यही इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत  बन गई और आंदोलन देश अलग कोनों में होने लगे। Main stream media ने इसे कोई कवरेज नहीं दिया, जिससे मीडिया के भी नाकामी के नारे लगे। News Pinch सहित कुछ यूट्यूब चैनल ने इनकी आवाज को अपने मंच पर जगह दिया। इस आंदोलन ने अपना एक इतिहास बना लिया। जिसमें मीडिया और सरकार इसके खिलाफ थी और इतिहास भी शांतिपूर्वक ऐसे ही बनता है। युवाओं ने भी इस नए समय में नई पहचान बनाई।

Dharmendra प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। नीट paper leek

      जंतर मंतर दिल्ली आंदोलन अब एक नया मोड़ ले लिया है। छात्रों का जमावड़ा बढ़ता जा रहा है।  और अब उनकी मांगे समय के अनुसार बदलती जा रही हैं। प्रधानमंत्री रील बनाते जा रहे हैं। वो  कैबिनेट मंत्रियों के साथ बैठक की ,जिसमें आरोपी को दस साल तक सजा और दस करोड़ जुर्माने के लिए बिल पास करने की बात कर रहे हैं। लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। प्रधानमंत्री जी की रील को लेकर युवाओं में नाराजगी देखी गई है।  आंदोलन का बड़ा होने का कारण सरकार है और अब तक उनकी मांगे मान ली  जाती।

   

Dharmendra Pradhan

   बहुत सारी अटकलों के चलते हुए इसी बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को दे दिया है। इसी बीच उन्होंने बहुत सारी बातें का जिक्र किया।  उन्होंने ने कहा हम दो दशक से शिक्षा मंत्री के रूप में भारत की सेवा कर रहे थे। हम युवाओं की भावनाओं को मानते हैं। नीट यूजी में हुए  पेपर लीक के चलते अपनी जिम्मेदारियों से मुंह नहीं मोड़ सकते हैं।

   इसी बीच उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकते इसका लाभ उठाएं और ये हमारी जिम्मेदारी थी। हम इससे पीछे नहीं हट सकते हैं।

शुक्रवार, 24 जुलाई 2026

जंतर मंतर दिल्ली में भीड़ बढ़ती जा रही है और आंदोलन देश के अलग अलग कोनों में हो रहे हैं। Sonam wangchuk ने भूख हड़ताल तोड़ दी

    जब से दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को जबरन उठाया है तब से लगातार छात्रों का सैलाब जंतर मंतर पर उमड़ता जा रहा है। थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सरकार समझने को तैयार नहीं है या समझ नहीं पा रही है सोशल मीडिया से शुरू हुए आंदोलन को और कैसे धरातल पर शिक्षा व्यवस्था के खराब सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो गया। सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल को तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की कोई बात नहीं की। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर 26 दिन के बाद अनशन तोड़वाया । यह काम सरकार इससे पहले भी कर सकती थी। प्रधानमंत्री जी अब अपनी शोक संवेदना रात को वयक्त कर रहे हैं।


लेकिन सीजेपी संस्थापक और इसके प्रवक्ता इस अनशन को तोड़ने पर कहा उनका जीवन अमूल्य है। उनके संघर्ष और साहस को सलाम करते हैं। यह आंदोलन अभी भी चलता रहेगा जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। अपने जवाब देही तय नही करेंगे। प्रधानमंत्री ने तो यह कहा कि पेपर लीक करने वालों में कोई नहीं बचेगा कड़ी से कड़ी सजा होगी और किसी तरह से छोड़ा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री जी ने धर्मेन्द्र प्रधान जी के इस्तीफे की कोई बात नहीं की।

     यही कारण है कि लगातार आंदोलन बढ़ता जा रहा है। अब यह आंदोलन किसी एक पार्टी और व्यक्ति का न होकर जन आंदोलन बन गया है  इस आंदोलन को चलाने वाले ही खुद के सहायक बन गए हैं।  वे एक दूसरे का ध्यान रखते हैं खाने के लिए खाना ,पानी  और दवाई सब कुछ देश के अलग अलग कोनों से मिल रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से क्या बदलेगा। बदलेगा तो कुछ नहीं लेकिन एक संदेश जाएगा और जवाबदेही तय होगी। लोकतंत्र में यही होना चाहिए।

    बहुत सारे लोग इस आंदोलन में पहली बार जंतर मंतर दिल्ली में पहुंचे हैं। कुछ तो अपने घरों में बिना बताए ही चले आए हैं। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन करने वाले छात्र आ रहे हैं। सरकार ये सब होने ही क्यों दिया  ये सब पहले भी हो सकता था। छात्र इस बात से भी नाराज हैं और सरकार शायद उन्हें समझने में देर कर दिया है। सरकार अब भी इंटरनेट और रेस्टोरेंट बंद करने में लगी है, इससे सरकार की मनसा का पता चल रहा है। ये सब करने बजाय सरकार को इनके मुद्दे सुनने चाहिए। 

     इनको दहशतगर्द गुंडे कहने के बजाय देशहित के मुद्दों पर बात करना चाहिए। ये सोचना चाहिए क्या इनके मुद्दे सही हैं।इस आंदोलन को बदनाम करने की भी कोशिश की गई।  राजनीति अच्छे कामों के लिए करनी है, तो सबको करनी चाहिए। पॉलिटिक्स तो सब कोई करता है इसमें कोई नई बात नहीं है। पॉलिटिक्स से  ही देश चलता है।

गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन 26 दिन के बाद, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह रहे महजूद। छात्र बोले जारी रहेगा आंदोलन।

 

मेदांता hospital sonam wangchuk 

पेपर लीक को लेकर हो रहे लगातार आंदोलन, दिल्ली में जंतर मंतर पर बड़ा बयान आया है। जिसमें सोनम वांगचुक ने कल अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि  अगर सरकार के कुछ केंद्रीय मंत्री आए और हमें भरोसा दे कि बच्चों पर कोई कार्यवाह न हो और जवाबदेही तय हो तो मैं अनशन को तोड़ सकता हूं।

जंतर मंतर दिल्ली में हो रहे आन्दोलन में भूख हड़ताल कर रहे सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया था।यह सब संसद तक मार्च होने के दो दिन पहले हुआ था। जिससे युवाओं में आक्रोश और ज्यादा बढ़ गया। अब यह एक विशाल जनांदोलन का रूप ले चुका है।नीट पेपर लीक को लेकर देश के अलग अलग कोनों में आंदोलन शुरू हो गए। अब ऐसी खबरें आ रही है कि कई जगह पर युवाओं और पुलिस में झड़प हो गई है। यह आंदोलन युवाओं के जागरूक  होने की याद दिला रहा है।

आज सुबह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह पहुंचे मेदांता हॉस्पिटल जहां सोनम वांगचुक का इलाज चला रहा है।इससे पहले उनका शब्दरगंज हॉस्पिटल में चला रहा था।कोर्ट के आदेश पर ,सोनम वांगचुक की पत्नी और उनके घर वाले वहां के इलाज से संतुष्ट नहीं थे। जोकि बाद फिर कोर्ट ने आदेश दिया और वहां से रेफर करके मेदांता हॉस्पिटल ले जाया गया। मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह ने जूस पिलाकर और  कई महत्वपूर्ण बातचीत के बाद, सोनम वांगचुक ने अपना अनशन 26 दिन के बाद तोड़ दिया।

    सोनम वांगचुक के अनशन तोड़ने के बाद भी युवाओं का कहना की, जब तक धर्मेन्द्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे तब तक आंदोलन शांतिपूर्वक देश के अलग अलग कोनों में चलता रहेगा। अब यह आंदोलन एक विशेष व्यक्ति का न होकर, जनांदोलन बन गया है, जिसमे स्वतः लोग जुड़ रहे हैं। अभीतक सरकार तक ने अपनी गलती को नही माना और न जवाब देही तय की है।

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बुधवार, 22 जुलाई 2026

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