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मंगलवार, 21 जुलाई 2026

Black Day of Education 2026

Paper leek


शिक्षा के लिए चलाया गया आंदोलन मेरे इतिहास का पहला और सबसे बड़ा आंदोलन है। जिसको मैने अपनी आर्टिफीशियल (कैमरा) आंखों से देखा है, ये आंखे शायद कभी झूठ नहीं देखती हैं।  इस आंदोलन की शुरुआत के कई कारण रहे,  लेकिन जिसमे शिक्षा व्यवस्था इसका मुख्य कारण था। सोशल मीडिया से शुरू हो कर एक विशाल युवा जन आंदोलन का रूप ले लिया।लगातार हो रहे पेपर लीक और भ्रष्टाचार। पेपर्स में जानकर गलत प्रश्नों को डालना और इससे पैसा कमाना। ऐसे आरोप लगातार शिक्षा मंत्री की एजेसिंयों पर लगते रहे हैं। पेपर की तैयारी करो, गलत प्रश्न खोजों और उसे सरकार को बताओ ।एक गलत प्रश्न का शुल्क 200-300 रूपये तक है, जिसको तुम्हे ही भरना है।27000 से भी ज्यादा सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया। हजारों बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी। पिछले 5 साल में 65 से 70 से ज्यादा पेपर 19 राज्यों में लीक हुए हैं। इसी प्रकार से चल रहा था पेपर लीक उद्योग ,जिसका शिकार  देश के पढ़ने वाले बच्चे हो रहे थे। पेपर लीक की समस्या से 20-22 बच्चों ने आत्महत्या कर ली जिसकी जवाबदेही या जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं था।

         इस आंदोलन की शुरूवात कुछ यूं ही मजाकिया अंदाज में 6 जून 2026 को हुई थी। इस आंदोलन को चलाने वाली पार्टी जिसका कोई अपना नाम नहीं । इसके नाम की भी एक दिलचस्प कहानी है। सबकुछ हमारी शिक्षा व्यवस्था से ही जुड़ा है। दरअसल 15 मई 2026 को अदालत में एक सुनवाई के दौरान , न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने काकोरोच शब्द का प्रयोग युवाओं के लिए किया था।  युवाओं ने इसे एक प्रतीक के रूप में लिया और अभिजीत दीपके के द्वारा काकोरोच जनता पार्टी की स्थापना की गई। इसके बाद यह पार्टी एक आंदोलन का रूप ले लिया। सोनम वांगचुक और कई स्टूडेंट्स ने भूख हड़ताल को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का रास्ता अपनाया और बताया हम गांधी जी और भगत सिंह के आदर्शों पर चलने वाले हैं। यहां पर हर एक धर्म, जाति,समुदाय और देश के लोग अलग अलग कोनों से आए और एक दूसरे का ध्यान भी रखा।

    आंदोलन की सबसे अच्छी बात यह है कि, इस आंदोलन में जुड़ने के लिए देश के अलग अलग कोनों से लोग इसमें उपस्थिति दर्ज कराई है। इस आंदोलन में लोग स्वतः अपने हक के लिए,अपने मन से जुड़ रहे थे। इसमें जुड़ने वाले युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा थी और यह कोई पैसे देकर बुलाई गयी भीड़ नहीं थी। युवा  बिना बताए अपने घर से, पॉकेट मनी पर और ट्रेन से भर कर आ रहे थे। यहां उनकी उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही थी।इन लोगों की कोई बहुत बड़ी मांगे नहीं थी ,ये जवाबदेही और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहे थे। पेपर की वजह से आत्महत्या करने वाले छात्रों के लिए एक करोड़ रुपए की मांग कर रहे थे।सरकार इनकी बातों का कोई जवाब नहीं दे रही थी, हद तो तब हो गई जब सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन उठा लिया। शायद यह आंदोलन के बड़ा होने का एक सबसे बड़ा कारण रहा हो।

   इसके बाद से यहां बड़ी संख्या में लोग स्वतः आने लगे 20 जुलाई को होने वाले मार्च में शामिल होने के लिए। यह मार्च जंतर मंतर दिल्ली से संसद तक होना था।  दिल्ली की  पूरी सड़के जनसैलाब से भरी थी। ऐसा युवाओं का जनसैलाब मैने पहले कभी नहीं देखा, केवल शिक्षा के लिए। बहुत सारे जवाब और सवाल थे। दिल्ली की चाक चौबंद देखकर ऐसा लग रहा था कि यहां कोई दहशतगर्द और आतंकी प्रदर्शन करने वाले हैं। हमारी सरकार का बच्चों के लिए ऐसा रवैया था। चारों तरफ बैरिकेडिंग लगी थी। पुलिस बच्चों को आगे पीछे खदेड़ रही थी, हालांकि बच्चों ने अपने धैर्य को बनाए रखा।यह आंदोलन 4 बजे शाम तक एकदम शांतिपूर्वक चल रहा था।  सरकार चाहती तो आंदोलन शांतिपूर्वक हो सकता था, लेकिन उसका इगो (अहंकार) इन बच्चों के  भविष्य से बड़ा है। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की भीड़ आक्रोश हुआ और संसद तक जाने की कोशिश करने लगी और कुछ संसद के पास पहुंच गए।

      इसके बाद पुलिस ने लॉयन ऑर्डर को बनाए रखने और संसद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लाठीचार्ज करने लगी। लाठी खाने वाले 15 से 27 साल तक के युवा थे, जो शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए आवाज उठा रहे थे। कुछ पुलिस वालों ने क्रूरता की सारी हदें पार दी, जाहिर सी बात है ये सब सरकार के आदेश पर हुआ होगा।  बच्चे खड़े होकर लाठियां खा रहे थे, ये कोई राजनीतिक बैकग्राउंड से नहीं थे । हम आप जैसे आम बच्चे थे।। सिर फटे, बच्चियों के कपड़े फाड़े गए,  पैर खींचे गए , आंसू गैस के गोले चले ,वाटर कैनन की गाड़ियां आई जो कुछ होना चाहिए था सब कुछ हुआ। पुलिस वालों ने अपने बैचेस हटा रखे थे कुछ सिविल ड्रेस में थे। ऐसा लग रहा था कि, सरकार को इन बच्चों की कोई परवाह नही है।इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने विरोध में पुलिस पर पत्थर चलाए और गाड़िया तोड़ी,जिससे कुछ पुलिस वालों को भी चोटें आई। किसी भी प्रकार का वायलेंस और विद्रोह, अच्छा नहीं होता है और न ही साथ देना चाहिए। चूक दोनों तरफ से हुई चाहे प्रशासन हो या सीजेपी के कार्यकर्ता, जिसके कारण पत्थर चले। शायद इन दोनों लोगों को अंदाजा नहीं था कि इतनी भीड़ में लोग आएंगे।तक जंतर मंतर कुछ समय के लिए सूना हो गया लेकिन इसके बाद फिर वही उत्साह और जोश के साथ युवा आने लगे।

     इतना सबकुछ होने के बाद भी सरकार ने कोई बात नहीं की और अभी तक न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हुआ (शायद हो भी न)। जिससे युवाओं में काफी ज्यादा आक्रोश देखा गया। यह एक लोकतन्त्र की अच्छी पहचान नहीं है। आंदोलन को दबाने का हर संभव प्रयास किया गया,लेकिन सरकार विफल रही।  आज के दिन को इतिहास में Black Day Of Education 2026 के नाम से जाना जायेगा। युवाओं में यह बदलाव का जोश , शिक्षा की एक नई पहल होगी। जिसमें युवाओं ने अपने लिए खुद लड़ाई लड़ी। देश के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझा और सरकार को बताया कि हम पढ़े लिखे युवा हैं न की अनपढ़ नेता। इस पूरे आंदोलन को main stream media ने नहीं दिखाया। कुछ यूट्यूब चैनल ने अपने मंच पर पूरे आंदोलन को  जगह दिया। इसी तरह की बहुत सारी बातें, इस आंदोलन को एक नई पहचान देती हैं। शिक्षा के लिए होने वाला यह आंदोलन, अपना नाम इतिहास के नए पन्नों में दर्ज करवाता है।जब कभी शिक्षा व्यवस्था की बात होगी तो इस आंदोलन की , युवाओं से जोड़ कर इसकी भी बात होगी।


सोमवार, 20 जुलाई 2026

जंतर मंतर पर गूंजा पेपर लीक का मुद्दा

 पेपर लीक का मुद्दा अब देश की शिक्षा व्यवस्था के सुधार का एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। जिसमे बच्चों से लेकर, युवाओं और बुजुर्गों ने अपनी उपस्थिति को दर्ज किया है। यह आंदोलन शांतिपूर्वक और गांधी जी के रास्ते पर चल रहा है, जिससे इसकी महत्वाकांक्षा और बढ़ गई है।  CJP आन्दोलन क्या है?  इसकी मांग और विचारधारा क्या है ? क्यों देश का इतना बड़ा मुद्दा बन गया है?  किसने इसकी शुरुआत की? सब  कुछ जानने की कोशिश करेंगे।

पिछले 5-6 सालों से देश में हो रहे लगातार पेपर लीक और पेपर में होने वाली खामियों को लेकर एक आंदोलन शुरू हुआ। जिसकी शुरुआत काकोरोच जनता पार्टी (CJP)के संस्थापक अभिजीत दीपके द्वारा 6 जून को जंतर मंतर दिल्ली से इसकी शुरुआत की गई। पूरे भारत के 19 राज्यों में 65-80 पेपर लीक हुए हैं। UDISE के अनुसार 27000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों को सरकार ने बंद कर दिया है। अब तो सरकार  यूनिवर्सिटी तोड़ने का प्रोजेक्ट चला रही है। केवल नीट पेपर लीक की वजह और पेपर रद्द होने से 20-21 बच्चों ने सुसाइड कर लिया । कई National education policy (NEP) आई और बजट भी बना लेकिन लागू नहीं हो पाई और न ही धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो पाया।

इस पेपर लीक उद्योग और भ्रष्टाचार से केवल युवाओं का भविष्य खतरे में नहीं है, बल्कि देश का भविष्य भी अंधकार में है। कई पेपर लीक हुए NEET, SSC, CGL, UPTET बहुत सारे पेपर्स लीक हुए लेकिन इनकी जवाबदेही तय करने वाला कोई नहीं है। शिक्षा मंत्री को शिक्षा से कोई मतलब नहीं है।एक महीना हो रहा है शिक्षा मंत्री, प्रधानमंत्री किसी न भी बात करना उचित नहीं समझा। क्या लोकतंत्र में यही सब होता है। 

शिक्षा व्यवस्था के चरमराते हालत को देखते हुए युवाओं ने जंतर मंतर पर,धूप , बारिश में आंदोलन कर रहे हैं। देश के दूर दराज इलाकों से, लोग आंदोलन को सफल बनाने के लिए आ रहे हैं। ये लोग किसी MP,Mnister IAS और IPS के लड़के नहीं है। आम लोग हैं जिनका सिस्टम विश्वास टूट गया है। ये कोई दहशत गर्द और आतंकी नहीं है, ये सब भारत के लोग हैं। जो अपने अधिकारों को मांग रहे हैं। यह आंदोलन शांतिपूर्वक चल रहा है,गांधी जी के सत्य अहिंसा मार्ग पर। सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन से जोडक़र इसको एक नई दिशा और दशा दी है। यह देश हम सबका है, हम सब मिलकर तय करेंगे  देश किन हाथों में हो । कई स्टूडेंट्स और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल कर रहे हैं। यही कारण है,हजारों लोग आंदोलन से जुड़ रहे हैं।

शनिवार, 23 मई 2026

नेता आते जाते रहेंगे,देश का क्या होगा

 कितनी सरकारें आई गयी , कुछ ने काम किया कुछ ने नही।देश कभी तेजी से आगे बढ़ा,कभी रुक सा गया। सभी सरकारों ने अपने अपने दावे किये , कभी पूरे हुए कभी नहीं।यही सिलसिला चलता रहा,शायद आगे भी चलता रहेगा। पर आम लोगों की जिन्दगी जैसी तब थी, वैसी ही शायद आज है।कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला आम लोगों के लिए। अमीर, अमीर होते चले गए ,गरीब मध्यम वर्ग में तो आ गए पर उनकी स्थिति गरीब से भी खराब है। वे लोग न तो अमीर बन पाए और न ही गरीब, शुरु से लेकर आजतक बीच में ही पिसते रहे। कहने को तो कागज पर बहुत काम हुआ पर जमीन पर कुछ नहीं। हॉस्पिटल्स, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटी बनते रहे हैं लेकिन ये सब नेताओं और अमीरों के लिए और उनके बेटों के लिए क्वालिटी नहीं दे पाएं। ये लोग अपने बेटों को पढ़ाने के लिए विदेश भेजते हैं और खुद बीमार हो जाएं तो विदेशों में इलाज करवाते हैं। जो नेता संसद में खड़े होकर समोसा चाय पानी रिचार्ज और युवाओ के मुद्दों को उठाते थे। ईमानदारी का डंका बजाते थे। आज वही नीट ,SSC जैसे युवाओं के मुद्दों पर चुप हैं। बाबू भैया सब रुपयों और  सत्ता का खेल है ।फिर वही पुराना सवाल आम लोगों का क्या। आम लोगों ने तो बनवाया नहीं एजुकेशन और हेल्थ संस्थानों को। जो उनकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। देश को चलने वाले जितने भी लोग हो चाहे नेता ,उद्योगपति या आला अफसर,इन सभी का हाथ है देश के बड़े संस्थानों को बनाने में। इन सब करप्ट और भ्रष्ट लोगों को पता है।जो भी हमने देश में बनाया है, वह अच्छा नहीं।इसी कारण ये लोग विदेश जाते हैं, चाहे पढ़ाई करना हो या इलाज करवाना हो। यही विकास का सबसे बड़ा सबूत है।  देश के सब लोग  करप्ट और भ्रष्ट नहीं हैं लेकिन जो है वो बहुत कुछ कंट्रोल करते हैं। आज आप देख लो कोई अपनी समस्याओं को लेकर धरना नही कर सकता है। जबकि यह हमारा अधिकार है।हम शांतिपूर्वक किसी का भी विरोध कर सकते हैं यही लोकतंत्र की खूबसूरती है। लोगों को जाति धर्म और मंदिर मस्जिद नहीं,उनको स्किल्स सिखाओ, रोजगार दो जिससे देश का विकास होगा। देश का विकास तो हो रहा है पर आम लोगों का नहीं , नेताओं का और कुछ बड़े आला अफसरों का। सारा विकास का रुपया इन्हीं सब के पास है।अब मैं देख पा रहा हूं कि नया यूथ इन सब बातों को समझ पा रहा है लेकिन इसमें देश के भविष्य के हित विषयों पर बात होनी चाहिए। देश हमेशा रहेगा, लेकिन ये लोग नहीं रहेंगे। देश किसी के भी हाथ में रहे । वह देश का सेवक बनकर काम करे ,भगवान बनकर नहीं।  देश की अर्थव्यवस्था 4th से 6th नम्बर पर आ गई है। हालात कैसे भी हो आम जनता को सच बताना चाहिए, और जनहित के मुद्दों पर बात होनी चाहिए। कोई पक्ष और विपक्ष आम लोगों के मुद्दों पर बात नहीं करना चाहता है। समय एक सा नही रहता है। बदलाव ही प्रकृति का नियम है।इसका कारण कुछ भी हो सकता है,और शुरूवात कही से भी।

Cacokroach News

Cacokroach Janta party  यह कोई रियल पार्टी नहीं है।
इसका नाम GenZ या किसी दूसरे ने नही दिया है।यह नाम हमारे देश के चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने दिया है। इतने बड़े पद पर होते हुए, उन्होंने युवाओं के लिए कोकरोच शब्द का इस्तेमाल किया।  उनका दोष यह था कि, वो रोजगार मांग रहे थे, भ्रष्टचार,  VIP culture, neet paper leek,  ssc , scam , इन सबके खिलाफ अपनी आवाज ,अपनी मांगो को रख रहे हैं और शांतिपूर्वक, तो इसमें गलत क्या है। क्या एक लोकतांत्रिक देश में यही सब होता है, सरकार की खिलाफ बोलने पर  आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है।क्या ये लोकतांत्रिक देश के सरकारों के अधिकार होते हैं। एक ऑनलाइन वर्चुअल कैंपेन से डर गई। इससे आप मुद्दों को रोक नही सकते है,बल्कि लोगों का और ज्यादा आक्रोश बढ़ता है। आपको उनकी मांगों को सुनना चाहिए।इसके बजाय आप उन पर आप लाठियां बरसाते हो।ये कहां का न्याय है।भाई साहब ऐसा कौन करता है। सबका साथ सबका विकास बोलने वाले। जिन्हें NCERT का full form नही पता उन्हें एजूकेशन मिनिस्टर बना दिया जाता है।  जब तक लोगों को रोजगार नही दोगे तबतक देश कैसे आगे बढ़ेगा। आज भारत IMF की रैंकिंग में वर्ल्ड में 4th  से 6th नम्बर पर आ गया है। बात करते हैं हम विश्व गुरु बनने की। जाती धर्म, मंदिर मस्जिद, मुद्दों से
 हटकर बात करने वाले ये नेता देश को कभी आगे नहीं ले जा सकते हैं।  स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हॉस्पिटल ये सब बनाने का क्या फायदा , उनके बच्चे विदेशों में पढ़ते।उनको हॉस्पिटल की जरूरत नहीं, उन्हें तो विदेशों में इलाज करवाना है।भाई तुम्हारे से फर्क पड़ता है और नहीं भी।  आज देख लो ऐसी कोई खाने वाली चीज नहीं बची है जिसमें मिलावट न हो, इन्ही चीजों को खाने से गंभीर बीमारियां हो रही है। किसी को कोई फर्क ही नही पड़ता है,FSSAI  (Food safety and standards Authority of India) आराम से सो रहा है। इन सब मुद्दों पर बात करने वाला देश द्रोही है। कितना ज्यादा खुलेआम कलर ग्रेडिएंट, एडेड शुगर और हानिकारक केमिकल को बेचा जा रहा है और हम खा भी रहे हैं। यह सब जिम्मेदारी किसकी है। और हम किससे पूछेंगे हमारे देश में बैठे सिस्टम के लोगों से या अमेरिका ,चीन  में बैठे सिस्टम के लोगों से।
 

रविवार, 17 मई 2026

जिसने दिया है ये जीवन

 जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

कैसे भूल जाते, हम उनको।

अनमोल रतन है, जीवन सबका।

बार बार है, न ये मिलता।

याद है करते, हम उनको।

जिसने दिया है , जीवन ये मुझको।

                        मां बाप से बढ़कर, कोई नहीं होता ।

                          दुनिया का दिखावा, कम नहीं होता।

                            कष्ट न होने दो, तुम उनको ।

                              जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

पाई पाई जोड़कर, तुमको पढ़ाते हैं।

खुद का मन मार कर, तुमको बढ़ाते हैं।

उनके बुढ़ापे का , तुम ही सहारा हो।

जिसने दिया है, जीवन ये मुझको।

कैसे भूल जाते, हम उनको।

                              सौरभ कुमार 

शनिवार, 16 मई 2026

आओ दीपों को लेकर हम

 आओ दीपों को लेकर हम, आगे बढ़ते जाएं।

जाति धर्म के अंधियारे से, सदा दूर हम हो जाएं।

इसकी विविधता जिसने देखा, उसमें वो खो जाये।

इतना बड़ा देश मेरा, फिर भी प्यार रह पाये।

जो हो देश के हित में, वो हम करते जाये।

आओ दीपों को लेकर हम, आगे बढ़ते जाएं।

                          सब कर्तव्यों से बढ़कर भी, देश की सेवा हो।

                           जहां रहे भी हम, वहां देश का नाम हो।

                            हिंदू मुस्लिम, सिख ईसाई, हिंदुस्तानी कहलायें।

                              आओ दीपों को लेकर हम, आगे बढ़ते जाएं।

सब धर्मों को माने हम, इसमें कोई बैर नहीं।

संभव है यह भारत में, बाकी कहीं और नहीं।

अपने देश का कर्ज हम, प्यार बांट कर भर जाएं।

आओ दीपों को लेकर हम, आगे बढ़ते जाएं।

                                                  सौरभ कुमार 


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JPSC विवाद में बड़ा एक्शन, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार

  झारखण्ड में अनियमित जेपीएससी परीक्षा भर्ती को लेकर लगातार छात्र आंदोलन बढ रहा था। आज 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने एलान कि...