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बुधवार, 29 जुलाई 2026

भारत, चीन पर US का लगेगा 100% टैरिफ रूस को आर्थिक रूप से घेरने की तैयारी।

US Russia sanction Bill 2026 


रूस और यूक्रेन युद्ध के बीच US ने रसिया को घेरने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिसमें US ने रसिया के खिलाफ सैंक्शन बिल को अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है। इस विधेयक के कानून बनाने के बाद भारत ,चीन  स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान  से निर्यात होने वाले उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है।  इसमें उन देशों को शामिल किया गया है जो रूस से तेल गैस और ऊर्जा से जुड़े उत्पादों का आयात करते हैं।डोलांड ट्रंप ने इस विधेयक को मंजूरी दे दी है।
      यह महत्वपूर्ण विधेयक US के दिवंगत सीनेट लिंडसे ग्राहम ने बनाया था। अमेरिका कैपिटल हिल जहां यह वोटिंग हो रही थी वहां जेलेंस्की भी महजूद रहे, यह एक दिलचस्प बात है। इस विधेयक के समर्थन में 86% सीनेटर्स  ने वोटिंग की जबकि इसके विरोध में 12%  वोट पड़े। इस विधेयक  का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाना। जिससे  उन देशों को किसी तरह से रूस से दूर किया जा सके जिनके रूस की साथ अच्छे रिश्ते हैं।
    अमेरिका के 100% टैरिफ से भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
मौजूदा समय में भारत से अमेरिका जाने वाले उत्पादों पर 10% टैरिफ है जबकि वही चीन पर 12.5% टैरिफ है। यदि 100% टैरिफ लग जाती है तो अमेरिका में भारतीय उत्पादों पर दोगुनी बढ़ोत्तरी देखने को मिलेगी। इस विधेयक को डोलांड ट्रंप ने हरी झंडी दिखा दी है।
   विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारतीय निर्यात में काफी गिरावट देखने को मिल सकती है।

   यह टैरिफ इस समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और पहले से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और अंतर्राष्ट्रीय मार्ग बाधित। जिससे तेल गैस की आवाजाही ठप हो गई है।

   पहले भारत अपने जरूरतों का 40% तेल गैस इन्हीं खड़ी देशों से पूरा करता था जब अंतर्राष्ट्रीय जलडमरू मध्य में आवाजाही बाधित है। जिसके कारण भारतीय तेल शोधन कंपनियों को विकल्प के तौर पर रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ी है ।

   सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंटल  के अनुसार हालांकि इस विधेयक में कुछ राहत दी गई है।इसमें यह छूट उन देशों को मिलेगी जो देश रूस के कुल तेल का 15% खरीदेगा ।

       

Lucknow कानपुर elevated expressway 13 दिन के अंदर ही धसा उद्घाटन में पहुंचे थे बड़े मंत्री।

 धसा लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे 


हाल में ही लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे  का उद्घाटन जुलाई 2026 को हुआ था। जिसमें नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता महजूद रहे। इस प्रोजेक्ट का नाम लखनऊ कानपुर एलिवेटेड एक्सप्रेसवे ग्रीन फील्ड है और अधिकारी इसकी मरम्मत करवाते नजर आये। यह लखनऊ  उन्नाव होते हुए कानपुर तक जाता है।कमाल की बात यह है उद्घाटन के 13 दिन बाद ही यह एक्सप्रेसवे धस गया ।इसको बनने में लगभग 4 साल से भी ज्यादा का समय लगा और काफी मेहनत बाद बन पाया । बताया गया इस एक्सप्रेसवे के माध्यम से यात्रा सुगम और समय की बचत होगी। इसको बनने में टोटल खर्च 4200 (42 हजार करोड़ ) रूपये लगे हैं।जिसको National   Highway Authority of India ने बनाया है।जिसकी पूरी लंबाई 63 किलोमीटर है।
    
  यह एक्सप्रेसवे आधुनिक सुविधाओं लैस है,जिस पर AI कैमरा , हाई स्पीड, इमर्जेंसी सुविधाएं है। जो यात्राओं को आसान बनाती हैं
      इसी क्रम मे उत्तराखंड  के नंदा की चौकी प्रेम नगर में टांस नदी पर बना पुल से जुड़ी रोड के एक साइड का हिस्सा बारिश के कारण धस गया है। इसको बनाने में 16 करोड़ रुपए खर्च हुए । उद्घाटन के 16 दिन बाद ही पुल डिस्ट्रॉयड हो गया। हालांकि अधिकारियों ने बताया पुल सुरक्षित है। यह सड़क मुख्यमार्ग को जोड़ती है।भ्रष्टाचार और उद्घाटन ये दोनों शब्द एक दूसरे से मिलते जुलते हैं। अगर जो उद्घाटन बंद हो गये तो भ्रष्टाचार अपने आप बंद हो जाएगा और भ्रष्टाचार होगा तो उद्घाटन भी होगा। पर एक बात नेता लोग को कोई फर्क नही पड़ता है।

मंगलवार, 28 जुलाई 2026

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, 18 साल से कम उम्र प्रदर्शनकारी छात्रों को रिहा करना होगा। ये मामला जंतर मंतर से जुड़ा है।।


20 जुलाई  को जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में जिन छात्रों पर कार्यवाही की मांग की जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा है प्रदर्शन कारी छात्रों पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। चीफ जस्टिस ने इससे पहले सुनवाई में कहा था कि लोकतंत्र में ऐसे प्रदर्शन होते रहते हैं । मामले की गंभीर और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

     Supreme कोर्ट का बड़ा आदेश चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ सुनाया है। नीट पेपर लीक में प्रदर्शन कर रहे छात्र जिनकी उम्र 18 साल से कम है उन पर कोई कार्यवाही नहीं होगी। यह किसी भी राज्य जुड़ा हो। CCTV camera या ड्रोन की द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग या डिजिटल डाटा को सुरक्षित रखे इसे किसी भी हाल सार्वजनिक नहीं क्या जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र और 7 राज्यों को नोटिस जारी किया है।  कोर्ट ने कहा राज्य सरकार का पक्ष जानने के बाद  हाई लेवल कमेटी का गठन होगा। इस कमेटी के द्वारा हाल में घटित हुए मामलों की निष्पक्ष जांच कराएगा।

     कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जिम्मेदारी तय होना जरूरी है जिसने भी ज्यादती की है कानून उसके खिलाफ अपना काम करेगा। इस सब के खिलाफ पारदर्शिता और निष्पक्षता से जांच होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने कहा यदि जिम्मेदारी तय नहीं होगी तब तक जांच का कोई मतलब नहीं है।

      CJI सूर्यकांत ने कहा इन सभी पिटीशन में एक आरोप कई बार लगाया गया है। जंतर मंतर दिल्ली के प्रदर्शन में पुलिस द्वारा पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया जिसमें कई लोगों चोटें आई हैं। एक 19 साल के लड़के की आँख रोशनी चली गई है। इलेक्ट्रॉनिक बैटन के कारण एक लड़की को ICU में भर्ती कराया गया है। एक और आरोप है जिसमे पुलिस के द्वारा कील वाली लाठी का प्रयोग जिसमें जान खतरा और एक आरोप  मीडियाकर्मी के घायल होने का भी मामला है। पुलिस वाले सिविल ड्रेस में, उनके पास बैचेस नहीं थे और पुलिस की हिंसा का मामला है।

  केन्द्र और दिल्ली सरकार की तरफ से सोलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि इस हिंसा में 250 से ज्यादा पुलिस कर्मी भी घायल हुए हैं। सरकार छात्रों पर बल का प्रयोग हल्के में नहीं ले रही है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुषार मेहता को टोकते हुए  कहा इसलिए हम चाहते हैं जांच हो ,इस तुषार मेहता ने कहा हम ये नहीं कहते हैं कि हिंसा छात्रों ने की लेकिन आंदोलन के दौरान इसमें कुछ असामाजिक तत्व घुसे जिसके द्वारा यह हिंसा हुई जिसका हम डेटा पेश करेंगे। उन्होंने ने दावा किया इसमें वो लोग शामिल थे जो पहले से किसी आरोपो में शामिल हैं।

   इसमें जांच समिति को लेकर भी दलील हुई  दोनों लोगों का कहना है कि यदि हम अपनी  अपनी तरफ से रिटायर्ड जजो का चुनाव करेंगे तो हम पर आरोप लगेंगे न इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा हम खुद से इस समिट का गठन करेंगे।

     इसी बीच बिहार का भी मामला सामने आया जिसमें सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि हम मुकदमे वापस ले रहे हैं। लेकिन अभी 150 ज्यादा नाबालिक बच्चे पुलिस की कस्टडी में है। जिनको 48 घंटे के अंदर मजिस्टेट के सामने पेश किया जाय।

सोमवार, 27 जुलाई 2026

Bihar Violence पुलिस ने चलाई AK 47 , पुलिस एक अनोखा इतिहास बना रही है। और अलग अलग राज्यों छात्रों को अरेस्ट किया जा रहा है।

 


देश में हुए पेपर लीक के कारण देश के कई राज्यों में इसके खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। जिसमें कही कही हिंसा भी हुई जिसको लेकर पुलिस ने कड़े कदम उठाए हैं। छात्रों को अलग अलग राज्यों से गिरफ्तार किया जा रहा है। दिल्ली पुलिस से लेकर और अलग अलग राज्यों की पुलिस ने छात्र प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता की है। मगर हद तो तब हो गई जब बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बिहार पुलिस ने AK 47 तानें नजर आई। कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस ने 4 राउंड फायरिंग की है। बाद में पुलिस बड़े अधिकारियों से पूछा गया तो बताया कि ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया। इसका आदेश किसने दिया क्या बिहार पुलिस को पता नहीं ये प्रदर्शनकारी कौन है। ये कौन सा तरीका बिहार पुलिस का है।

  हिंसा को कोई भी साथ नहीं देगा और हिंसा होनी भी नहीं चाहिए। इससे कुछ भी अच्छा नहीं होता है।बहुत सारे कैमरे लगे होते हैं रोड पर उनमें प्रदर्शन कर रहे छात्रों की तस्वीरों की पहचान करो और उन पर कार्यवाही करो।कई रिपोर्ट आ रही है कि पुलिस किसी बिना आरोप के लोगों उठा रही है और न ही उनके घर वालों को सूचना दी जा रही है। प्रशासन से पूछने पर बताया कि अभी ऐसी कोई बात नहीं सबकी हालत ठीक है।

    लोगों का क्या भरोसा शादी वर्दी में पुलिस वाले हैं या गुंडे जो भीड़ में मारपीट करते नजर आये। किसी ने भी उन्हें रोकने की कोशिश भी नहीं कि जैस जंतर मंतर दिल्ली में देखा गया।आखिर सरकार इन सब पर कब कार्यवाही करेगी। कई लोगों को बुलेट लगी है।विपक्ष ने पत्र लिखकर गृहमंत्री अमित शाह से जवाब मांगा है जिसको लेकर हर दिन संसद के दोनों सदनों में विपक्ष नारेबाजी कर रहा।

    विपक्ष अपनी मांग पर अड़ा और ओम बिड़ला बोल रहे यह पेपर लीक को रोकने के लिए महत्वपूर्ण विधेयक लाया जा रहा है इस पक्ष और विपक्ष शांतिपूर्वक बात करे । इसके लिए हम उनको पर्याप्त समय देंगे । CJP प्रोटेस्ट में शामिल छात्रों का कहना है कि यदि सरकार अपनी जिम्मेदारी पर खरी नहीं उतरती है तो हम फिर से आंदोलन कर सकते हैं।

Anti paper' leak Bill and Amendment

  Parliament मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे बीच सरकार ने आज यानी 27 जुलाई को Anti paper leak Bill और Amendment 2026 को संसद के दोनों सदन में संसदीय कार्यवाही के दौरान प्रधानमंत्री के कार्यकाल में राज्यमंत्री रहे जितेन्द्र सिंह ने पेश किया। इसमें पेपर लीक curruption को रोकना और सजा के लिए कड़े  नियमों को बनाना और उनका पालन करना। Fast track courts जिसमें संवेदनशील मुद्दों के लिए कार्यवाही को कम समय में सुनवाई करना और फैसला सुनाना। जिससे सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके।

   


किसी भी पेपर लीक से जुड़ी समस्या को हल्के में न लिया जाए, उस पर तुरंत कार्यवाही हो और नियमित समय से प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए । विपक्ष सदस्य दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों पर लाठीचार्ज हुई और अमितशाह से जवाब की मांग करते हुए हंगामा कर रहे थे। संसद की कार्यवाही स्थगन होने के बाद दोबारा 12 बजे के बाद शुरू हुई और दुबारा विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच उन्होंने एंटी पेपर लीक बिल पेश किया।

  लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने TMC सहित कई सांसदों का नाम लिया और कहा कि क्या वे इस विधेयक को लेकर कुछ बोलना चाहते। इस पर विपक्ष कि तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। ओम बिड़ला ने कहा यह महत्वपूर्ण विधेयक है इस पर देश की मंशा पर व्यापक चर्चा होगी। विपक्ष बहुत सारे लोग इस पर चर्चा करने की मांग कर रहे थे। यह सुधार का प्रथम चरण है। सबको इसे साथ देना चाहिए, हम इसके लिए पर्याप्त देंगे और यह बिल पास हो सके ताकि पेपर लीक रोकने का समुचित प्रावधान हो सके।

    सरकार के इस बिल में पेपर लीक और फ्रॉड करने वालों के लिए कड़े नियमों का प्रावधान है। जिसमें कानूनी प्रक्रिया को स्पीड देना ।किसी भी पेपर लीक खिलाफ दर्ज हुए मामलों में 90 दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल करना होगा। 2 महीनों के अंदर जांच प्रक्रिया पूरी करनी होगी। पेपर लीक या अनुचित संसाधनों का प्रयोग करने पर 5 से 10 साल तक सजा होगी। इससे पहले 3 से 5 साल सजा का प्रावधान था। यदि जुर्माने की बात करें तो पहले 50 लाख ,और 10 करोड़ है। एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन होगा  और हर राज्य में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन होगा। पेपर लीक माफिया को पकड़ कर  कम समय में मामलों को सुलझाया जा सके।

FCRA Act and Amendment Bill 2026

 


संसद के इस मानसून सत्र में सरकार FCRA बिल पारित करने के लिए ला रही है। यह मानसून सत्र 20 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक चलेगा। इसमें 5 नए बिल है और दो पहले से ही संसद में लागू करने के लिए ,बहस चल रही है। इस सत्र में नीट पेपर लीक को लेकर संसद में काफी हंगामा हो रहा है और कई बार सदन की कार्यवाही को रोकना  पड़ा।

FCRA ( Foreign Countribution Regulation Act) Amendment Bill 2026

इस बिल को  28 मार्च 2026 को भारत सरकार ने लोकसभा में प्रस्तावित किया था।  यह बिल विदेश से आने वाली फंडिंग पर कड़ी नजर रखने के लिए इसे लाया जा रहा है। कौन लोग और संस्थान है जो इस फंडिंग को प्राप्त कर रहे हैं। इसको खर्च किस पर किया जा रहा है। इन सब पर सरकार की नजर रहेगी।इसका मुख्य उद्देश्य है इसके गलत प्रयोग को रोकना और सिस्टम में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।  ऐसे कई खबरें आती रहती हैं कि फंडिंग का उपयोग गलत कार्यों में किया जा रहा था। राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हितों को ध्यान रखते हुए सरकार ने इस बिल को लाया है यह बिल होम मिनिस्ट्री ऑफ इंडिया के अंतर्गत लागू किया जाएगा।

     देश दुनिया में बहुत सारे NGOs या संस्थान है जिनको विदेशों से फंडिंग आती है। जिसके द्वारा बहुत सारे प्रोग्राम चलाए जाते हैं जैसे हेल्थ और एजुकेशन के क्षेत्र में और इन क्षेत्रों में सुधार के लिए विदेशों से फंडिंग मिलती । यह फंड पॉलिटिकल पार्टी , सांसद, जज, सरकारी कर्मचारी और मीडिया संस्थानों को नही मिल सकता है।

     यदि FCRA किसी कारण से रद्द या ले लिया जाता है तो उस पर बने कानून के अनुसार FCRA  उस संपति को अपने प्रबंधन में ले लेगा । यदि पंजीकरण समाप्त होने पर सारी संपति प्रबंधन के पास जाएगी ,यदि NGOs का सर्टिफिकेट बहाल कर दिया जाता है तो सारी संपति वापस कर दी जाएगी।

  यदि पंजीकरण एक निश्चित समय तक जारी नहीं किया जाता तो सरकार सारी संपति जप्त कर लेगी और उसका उपयोग सार्वजनिक हितों के लिए किया जाएगा।

   यदि पंजीकरण कैंसिल कर दिया जाता है तो आप ऑथोरिटी विरोध कोर्ट में इसकी अपील कर सकते हैं।

    FCRA नियम के तहत अनुसार कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर सजा अधिकतम कारावास 5 वर्ष से 1वर्ष तक घटने प्रावधान है।

    जितने भी राज्यों में NGOs  पंजीकरण है उन सभी को सरकार को अपने कार्यों के विषय में बताना होगा। जिससे सरकार सुनिश्चित करे पाए।

   सरकार का कहना है कि इसके दुरुपयोग होने की संभावना ज्यादा है और हम देश में राष्ट्रीय सुरक्षा ,संप्रभुता और शांति को बनाए रख पाएं। बहुत सारे लोगों का कहना है कि सरकार इस पर अपना ज्यादा नियंत्रण रखना चाहती। इसके परिणाम स्वरूप इसका प्रभाव पर देखा  लोगों पर इसका प्रभाव देखा जा सकता। उन लोगों के लिए यह बहुत बड़ा झटका होगा जो विदेशों से NGOs की फंडिंग का  दुरूपयोग करते हैं और जो यह सब करवाते हैं। यह बिल अभी पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया है और संसद में इसकी बहस चल रही है। 

रविवार, 26 जुलाई 2026

शिक्षा मंत्रालय पद संभालते ही पहलाद जोशी ने अधिकारियों से अहम मुलाकात होंगे कुछ बड़े बदलाव

    नीट पेपर घोटाला में केंद्रीय मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद, केंद्रीय मंत्री पहलाद जोशी संभालेंगे शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्य भार । आज यानी रविवार को ही वरिष्ठ अधिकारियों से की बातचीत।  हालांकि पहलाद जोशी के पास पहले से ही कई बड़े मंत्रालय हैं और उनके पास ही मौजूद रहेंगे। अभी उनके पास कई मंत्रालय हैं जैसे उपभोक्ता मामले, खाद्य और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय। भारत सरकार ने उन पर भरोसा जताया है।

   पहलाद जोशी काफी लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं और उनकी संगठन में मजबूत पकड़ मानी जाती है। उनकी छवि संसद के बाहर हो या अंदर एक सक्रिय नेता के रूप में देखी जाती है। उन्होंने ने अपने जीवन की शुरुआत कर्नाटक के धारवाड़ से की थी। कर्नाटक में उन्होंने ने संगठन के लिए जमीनी स्तर से जुड़कर काम किया है और उनकी अच्छी पहचान है अपने क्षेत्र में  और लगातार काम करते रहे हैं।

    अपना पहला चुनाव 2004 में लड़ा था और अब वह 22 साल से  लगातार संसद है।  लगातार 5 बार कर्नाटक से लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं। जिससे वो अपने क्षेत्र के प्रभावशाली नेता बन गए है।। समय समय पर उनको सरकार ने कई जिम्मेदारियां दी हैं।

  सरकार में रहते हुए कई बड़े पदों को संभाला है वर्ष 2012 कर्नाटक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वर्ष 2014  के बाद लोकसभा में संसदीय समितियों की जिम्मेदारी मिली। 2019 में मोदी सरकार ने कोयला और खान मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उपभोक्ता मामले और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का भार सौंपा गया है। अब उनके पास अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी आ गई है।

    उनके पास शिक्षा व्यवस्था को लेकर इस समय कई चुनौतियां हैं। चाहे नीट पेपर लीक को लेकर हो या नई शिक्षा नीति लागू करना हो। शिक्षा नीति में कई बदलाव सख्त जरूरत है। NTA हो या और शिक्षा से जुड़े संस्थान। अब युवाओं और उनके माता पिता का भरोसा नए शिक्षा मंत्री पहलाद जोशी पर टीका हैं। बहुत सारी पॉलिसीज बनानी और लागू होनी है।

JPSC विवाद में बड़ा एक्शन, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार

  झारखण्ड में अनियमित जेपीएससी परीक्षा भर्ती को लेकर लगातार छात्र आंदोलन बढ रहा था। आज 10 अगस्त को छात्रों ने विधानसभा का घेराव करने एलान कि...